17 अगस्त 2026
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PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत सुभाषित: 'सामूहिक संकल्प और एकता से ही देश आगे बढ़ता है'

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PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत सुभाषित: 'सामूहिक संकल्प और एकता से ही देश आगे बढ़ता है'

सारांश

स्वतंत्रता दिवस सप्ताह में प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लगातार तीसरा संस्कृत सुभाषित साझा किया — इस बार राष्ट्रीय एकता और सामूहिक संकल्प का संदेश। 13, 14 और 17 अगस्त की यह श्रृंखला दर्शाती है कि वे वैदिक साहित्य को सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में लाने की सुनियोजित कोशिश कर रहे हैं।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 17 अगस्त 2026 को एक्स पर संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें एकता और सामूहिक संकल्प को भारत की प्रगति का आधार बताया।
साझा किया गया श्लोक — 'समानी व आकूतिः...' — वैदिक साहित्य में राष्ट्रीय एकजुटता का प्रतीक माना जाता है।
14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर पुरुषार्थ और परिश्रम पर केंद्रित श्लोक साझा किया गया था।
13 अगस्त को दृढ़ संकल्प और प्रतिकूल परिस्थितियों पर विजय के संदेश वाला श्लोक पोस्ट किया गया था।
स्वतंत्रता दिवस सप्ताह में तीन दिनों में तीन सुभाषित — मोदी की सांस्कृतिक-वैचारिक सोशल मीडिया रणनीति का हिस्सा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार, 17 अगस्त 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें राष्ट्रीय एकता और सामूहिक संकल्प को भारत की प्रगति का आधार बताया। उन्होंने लिखा, 'सामूहिक संकल्प और एकता की शक्ति से ही देश आगे बढ़ता है। यही भावना भारत की प्रगति और समृद्धि की मजबूत नींव है।'

सोमवार का सुभाषित और उसका अर्थ

प्रधानमंत्री मोदी ने 17 अगस्त को जो श्लोक साझा किया, वह है — 'समानी व आकूतिः समाना हृदयानि वः। समानमस्तु वो मनो यथा वः सुसहासति॥' इस श्लोक का भाव यह है कि सभी के संकल्प एक समान हों, हृदय एकता के सूत्र में बंधे हों, और परस्पर सहयोग तथा समभाव के साथ समाज की उन्नति के लिए सतत प्रयास जारी रहें। यह श्लोक वैदिक साहित्य में राष्ट्रीय एकजुटता का प्रतीक माना जाता है।

स्वतंत्रता दिवस सप्ताह में सुभाषितों की श्रृंखला

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस सप्ताह के दौरान लगातार कई दिनों तक सुभाषित साझा किए। 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर उन्होंने उन नागरिकों को नमन किया जिन्होंने विभाजन की त्रासदी से उबरकर देश के निर्माण में योगदान दिया। उस दिन साझा किया गया श्लोक था — 'उद्यमस्य प्रसादेन दृश्यन्ते विविधाः कलाः। कातरा एव जल्पन्ति यद् भाव्यं तद् भविष्यति॥' जिसका संदेश था कि परिश्रम और पुरुषार्थ से ही विज्ञान, कला और नवाचार का मार्ग प्रशस्त होता है, भाग्य के भरोसे बैठना उचित नहीं।

13 अगस्त को प्रधानमंत्री ने श्लोक साझा किया था — 'दैवं पुरुषकारेण यः समर्थः प्रबाधितुम्। न दैवेन विपन्नार्थः पुरुषः सोऽवसीदति॥' इसका अर्थ है कि जो व्यक्ति दृढ़ संकल्प और अथक परिश्रम से प्रतिकूल परिस्थितियों को भी अनुकूल बना लेता है, वह जीवन की बाधाओं से कभी पराजित नहीं होता।

संदेश का राजनीतिक-सांस्कृतिक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब स्वतंत्रता दिवस के बाद देश में राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव के विमर्श को नई गति मिली है। प्रधानमंत्री का वैदिक श्लोकों के माध्यम से सार्वजनिक संवाद स्थापित करना उनकी सोशल मीडिया रणनीति का एक सुस्थापित हिस्सा बन चुका है। यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने संस्कृत सुभाषितों के ज़रिए राष्ट्रीय मूल्यों को रेखांकित किया हो।

आगे की दिशा

प्रधानमंत्री मोदी के इस सुभाषित-क्रम से स्पष्ट है कि स्वतंत्रता दिवस सप्ताह को वे केवल उत्सव नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और वैचारिक संवाद के अवसर के रूप में भी प्रस्तुत कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इस श्रृंखला के जारी रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

तीन श्लोक — यह संयोग नहीं, संदेश है। हालाँकि, आलोचक यह भी पूछ सकते हैं कि क्या सांस्कृतिक एकता के ये संदेश उन नीतिगत सवालों से ध्यान हटाते हैं जो ज़मीनी स्तर पर अनुत्तरित हैं। सुभाषित की भाषा सर्वसमावेशी है, लेकिन उसकी व्याख्या और राजनीतिक उपयोग हमेशा तटस्थ नहीं होते।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने 17 अगस्त को एक्स पर क्या साझा किया?
प्रधानमंत्री मोदी ने 17 अगस्त 2026 को एक्स पर संस्कृत श्लोक 'समानी व आकूतिः समाना हृदयानि वः...' साझा किया। इसके साथ उन्होंने लिखा कि सामूहिक संकल्प और एकता की शक्ति से ही देश आगे बढ़ता है।
स्वतंत्रता दिवस सप्ताह में मोदी ने कितने सुभाषित साझा किए?
प्रधानमंत्री मोदी ने 13, 14 और 17 अगस्त को तीन अलग-अलग संस्कृत सुभाषित एक्स पर साझा किए। तीनों का केंद्रीय भाव — परिश्रम, दृढ़ संकल्प और राष्ट्रीय एकता — था।
14 अगस्त को मोदी ने किस अवसर पर सुभाषित साझा किया था?
14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री ने उन नागरिकों को नमन किया जिन्होंने विभाजन की त्रासदी से उबरकर देश के निर्माण में योगदान दिया। उन्होंने पुरुषार्थ और परिश्रम पर केंद्रित श्लोक भी साझा किया था।
'समानी व आकूतिः' श्लोक का क्या अर्थ है?
इस वैदिक श्लोक का भाव है कि सभी के संकल्प एक समान हों, हृदय एकता के सूत्र में बंधे हों, और परस्पर सहयोग तथा समभाव के साथ समाज की उन्नति के लिए सतत प्रयास किए जाएँ। यह राष्ट्रीय एकजुटता का प्रतीक श्लोक माना जाता है।
PM मोदी एक्स पर सुभाषित क्यों साझा करते हैं?
प्रधानमंत्री मोदी का वैदिक श्लोकों और सुभाषितों को सोशल मीडिया पर साझा करना उनकी स्थापित संचार रणनीति का हिस्सा है, जिसके ज़रिए वे सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्रीय भावना को डिजिटल माध्यम से जन-जन तक पहुँचाते हैं। विशेष राष्ट्रीय अवसरों पर यह क्रम अधिक सक्रिय हो जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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