सिंटा विवाद: उपासना सिंह और नगमा का पूनम ढिल्लों-पद्मिनी कोल्हापुरे पर ₹90 लाख की एफडी तोड़ने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
सिने एंड टेलीविजन आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (सिंटा) में नेतृत्व को लेकर चल रहा विवाद अब संस्था के बैंक खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) तक जा पहुँचा है। अभिनेत्री और सिंटा की पूर्व पदाधिकारी उपासना सिंह ने 1 अक्टूबर 2026 को पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे पर संस्था के करीब ₹90 लाख की एफडी सदस्यों की सहमति के बिना तोड़ने का गंभीर आरोप लगाया है। अभिनेत्री नगमा ने भी इन आरोपों में अपनी आवाज़ मिलाई और कहा कि कलाकारों के पैसों का इस तरह इस्तेमाल करना सरासर गलत है।
मुख्य घटनाक्रम
उपासना सिंह के अनुसार, जब सिंटा की पुरानी कमेटी भंग हुई, तब उन्होंने सभी संबंधित बैंकों को लिखित रूप से सूचित किया था कि खाते तब तक फ्रीज रखे जाएँ जब तक नई कमेटी कार्यभार न संभाल ले। उनका दावा है कि कोर्ट का आदेश आने के बाद ही खाते दोबारा खोले जाने चाहिए थे, लेकिन कथित तौर पर इस दौरान एक खाता पहले ही खोल लिया गया और एफडी का पैसा दूसरे खाते में स्थानांतरित कर दिया गया।
उपासना ने कहा, 'हमारे पाँच बैंकों में एफडी हैं और पाँच बैंकों में अकाउंट हैं। जब हमारी कमेटी भंग हुई थी, तब दीपक पाराशर ट्रेजरर थे। इसलिए हमने सभी बैंकों को बताया था कि कमेटी भंग हो चुकी है।' उन्होंने यह भी कहा, 'किसी संस्था की फिक्स्ड डिपॉजिट तोड़ने से पहले उसके सदस्यों की सहमति ज़रूरी होती है। आखिर बिना सदस्यों से पूछे एफडी कैसे तोड़ी जा सकती है?'
आरोप: ऑफिस स्टाफ की मिलीभगत का दावा
उपासना ने आरोप लगाया कि फ्रीज़ खाते को खुलवाने के लिए ऑफिस स्टाफ की मदद ली गई। उनके अनुसार, कथित तौर पर स्टाफ को बैंक ले जाकर स्टांप, ईमेल आईडी और ऑफिस दस्तावेज़ दिखाकर KYC के ज़रिये खाता खुलवाया गया। उन्होंने दावा किया कि पेंटल साहब, पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे बैंक गए और संस्था से जुड़े दस्तावेज़ दिखाकर खाता खुलवाने की प्रक्रिया कराई, जबकि उस समय वे सिंटा कमेटी के अधिकृत पदों पर कथित तौर पर नहीं थे।
गौरतलब है कि इन आरोपों के जवाब में पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
नगमा की आपत्ति: 'कलाकारों का पैसा स्टाफ की सैलरी में नहीं लगाया जा सकता'
अभिनेत्री नगमा ने सिंटा फंड के कथित दुरुपयोग पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, 'यह पैसा कलाकारों के लिए है। इसका गलत इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है? उन्होंने नया अकाउंट खोल लिया है, लेकिन नया अकाउंट खोलने का क्या मतलब है?' नगमा ने यह भी सवाल उठाया कि जब कोर्ट ने 26 अक्टूबर की सुनवाई की तारीख दे रखी है, तो उससे पहले ऑफिस का ताला तोड़कर एफडी तोड़ने की क्या ज़रूरत थी।
नगमा ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'आप कह रहे हैं कि स्टाफ को सैलरी देना ज़रूरी है। लेकिन यह पैसा किसका है? आप कलाकारों के पैसे से स्टाफ को सैलरी दे रहे हैं। यह सही नहीं है।'
विवाद का दायरा और कानूनी स्थिति
उपासना सिंह के अनुसार सिंटा के पास कुल करीब ₹90 लाख की एफडी है, और अलग-अलग ट्रांज़ैक्शन के ज़रिये पैसा स्थानांतरित किया गया है। अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कुल कितनी एफडी तोड़ी गई हैं। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब सिंटा की कमेटी के गठन और नेतृत्व को लेकर मामला पहले से ही अदालत में है, और अगली सुनवाई 26 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है।
आने वाले हफ्तों में कोर्ट का फैसला इस विवाद की दिशा तय करेगा — और तय करेगा कि सिंटा जैसी संस्थाओं में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए क्या व्यवस्था होनी चाहिए।