सीबीआई का बड़ा एक्शन: टीटीआई समेत 7 आरोपियों पर एफआईआर, ₹92.55 करोड़ की कथित अवैध विदेशी फंडिंग का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 27 अगस्त 2026 को अमेरिका स्थित संस्था द टिमोथी इनिशिएटिव (TTI) और उससे जुड़े सात आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। यह मामला विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) के कथित उल्लंघन, आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को नष्ट करने जैसे गंभीर आरोपों से जुड़ा है। जांच एजेंसियों के अनुसार, नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच कथित तौर पर ₹92.55 करोड़ (लगभग 99.95 लाख अमेरिकी डॉलर) की राशि FCRA प्रावधानों के उल्लंघन में इस्तेमाल की गई।
मुख्य आरोपी और एफआईआर का विवरण
सीबीआई की नई दिल्ली स्थित आर्थिक अपराध शाखा (EO-II) द्वारा दर्ज एफआईआर में कुल सात व्यक्तियों और संस्था TTI, USA को आरोपी बनाया गया है। ये आरोपी हैं — जोनाथन एस राजन, मिकाह मार्क, अजीत वर्गीज मथाई, वर्गीज चाको, बाबलू कुर्मी, सुप्रीम जॉय और संस्था द टिमोथी इनिशिएटिव (TTI)। मामले की जांच इंस्पेक्टर अभिषेक कुमार गुप्त को सौंपी गई है।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि आरोपियों ने आपराधिक साजिश के तहत अमेरिका के ट्रुइस्ट बैंक द्वारा जारी विदेशी डेबिट कार्डों का उपयोग करते हुए भारत के विभिन्न एटीएम से बड़े पैमाने पर विदेशी धनराशि निकाली। इसके अतिरिक्त, जनवरी 2024 से मार्च 2026 के बीच ₹44 करोड़ की राशि विदेशी डेबिट कार्डों के माध्यम से कर्नाटक, छत्तीसगढ़, असम और अन्य राज्यों में निकाली गई।
बेंगलुरु हवाई अड्डे पर बरामदगी और डेटा नष्ट करने का आरोप
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच रिपोर्ट के अनुसार, 18 अप्रैल 2026 को बेंगलुरु हवाई अड्डे पर आरोपी मिकाह मार्क के पास से 24 विदेशी डेबिट कार्ड बरामद किए गए। उल्लेखनीय है कि इन कार्डों पर 'संतोष कुमार' नाम दर्ज था, जबकि जांच एजेंसियों का कहना है कि वास्तविक पहचान छिपाने और KYC नियमों से बचने के लिए इन्हें इस फर्जी नाम से जारी कराया गया था।
जांच में भारत में 1,000 से अधिक ऐसे डेबिट कार्ड वितरित किए जाने का दावा किया गया है। ED की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 18 अप्रैल 2026 को ही bill.com पर भारत से संबंधित डेटा का एक्सेस प्रतिबंधित कर दिया गया और उसी दिन एक HP लैपटॉप का पूरा डेटा मिटा दिया गया। अगले दिन QuickBooks पर उपलब्ध भारत संबंधी डेटा भी बंद कर दिया गया। ED ने इसे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को नष्ट करने या जांच एजेंसियों की पहुंच से दूर करने का प्रयास बताया है।
गृह मंत्रालय की भूमिका और कानूनी आधार
गृह मंत्रालय के FCRA प्रभाग ने ED की जांच रिपोर्ट के आधार पर मामले को सीबीआई को सौंपने की सिफारिश की। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि FCRA की धारा 43 और केंद्र सरकार की अधिसूचना के तहत आगे की जांच सीबीआई करेगी। इसके साथ ही भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराएं भी मामले में शामिल की गई हैं।
ED की रिपोर्ट के अनुसार, जोनाथन राजन भारत में TTI की गतिविधियों के प्रभारी थे, जबकि अजीत वर्गीज मथाई वित्तीय संचालन से जुड़े प्रमुख व्यक्ति बताए गए हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, एटीएम से निकाली गई राशि का उपयोग भारत में TTI के प्रशिक्षण कार्यक्रमों, धार्मिक प्रचार और अन्य आयोजनों पर किया जाता था। रिपोर्ट में दावा है कि TTI ने भारत में कुल मिलाकर ₹95 करोड़ से अधिक खर्च किए।
आगे क्या होगा
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच के दौरान आयकर अधिनियम, धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) या अन्य कानूनों के उल्लंघन के साक्ष्य सामने आते हैं, तो मामले को संबंधित एजेंसियों को आगे की कार्रवाई के लिए भेजा जा सकता है। यह मामला FCRA उल्लंघन की बड़ी श्रृंखला में एक और कड़ी के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें विदेशी वित्त पोषित संस्थाओं पर केंद्र सरकार की नज़र लगातार कड़ी होती जा रही है।