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डीओटी के FRI सिस्टम ने 15 महीनों में ₹5,043 करोड़ की साइबर ठगी रोकी, अप्रैल-अगस्त 2026 में ₹2,000 करोड़ बचाए

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डीओटी के FRI सिस्टम ने 15 महीनों में ₹5,043 करोड़ की साइबर ठगी रोकी, अप्रैल-अगस्त 2026 में ₹2,000 करोड़ बचाए

सारांश

DoT का FRI सिस्टम महज 15 महीनों में ₹5,043 करोड़ की साइबर ठगी रोककर एक मिसाल बन गया है। यह पारंपरिक 'पहले ठगी, फिर जाँच' मॉडल को पलटकर भुगतान के क्षण में ही खतरे को पहचानता है — और यही इसकी असली ताकत है।

मुख्य बातें

दूरसंचार विभाग (DoT) के फाइनेंशियल फ्रॉड रिस्क इंडिकेटर (FRI) ने 22 मई 2025 से अगस्त 2026 तक ₹5,043.73 करोड़ की संभावित साइबर ठगी रोकी।
अगस्त 2025 तक यह आँकड़ा केवल ₹139.16 करोड़ था — एक वर्ष में लगभग 36 गुना वृद्धि।
केवल अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच ₹2,000 करोड़ से अधिक की संभावित धोखाधड़ी रोकी गई।
FRI प्रणाली डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP) के ज़रिए मोबाइल नंबरों को मध्यम, उच्च और अत्यधिक उच्च जोखिम श्रेणियों में वर्गीकृत करती है।
जाँच एक सेकंड से भी कम में पूरी होती है, जिससे लेनदेन शुरू होने से पहले ही संदिग्ध भुगतान रोका जा सकता है।
डेटा स्रोतों में संचार साथी , I4C का साइबर अपराध पोर्टल, बैंक और दूरसंचार कंपनियाँ शामिल हैं।

दूरसंचार विभाग (DoT) ने मंगलवार, 8 सितंबर 2026 को घोषणा की कि उसके फाइनेंशियल फ्रॉड रिस्क इंडिकेटर (FRI) ने लॉन्च के मात्र 15 महीनों के भीतर ₹5,043.73 करोड़ की संभावित साइबर धोखाधड़ी को रोकने में निर्णायक भूमिका निभाई है। 22 मई 2025 को शुरू हुई यह प्रणाली अब तक की सबसे तेज़ी से प्रभावशाली सिद्ध होने वाली सरकारी साइबर-सुरक्षा पहलों में से एक बताई जा रही है।

मुख्य घटनाक्रम

संचार मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2025 तक FRI के ज़रिए केवल ₹139.16 करोड़ की संदिग्ध वित्तीय हानि रोकी गई थी। यही आँकड़ा अगस्त 2026 तक बढ़कर ₹5,043.73 करोड़ हो गया — यानी एक वर्ष में लगभग 36 गुना की वृद्धि। विभाग ने बताया कि केवल अप्रैल 2026 से अगस्त 2026 के बीच चार महीनों में ₹2,000 करोड़ से अधिक की संभावित साइबर ठगी को रोका गया।

यह वह धनराशि है जो नागरिकों के खातों से बाहर जाने से पहले ही सुरक्षित कर ली गई, जिससे बाद में धन की खोज, खातों को फ्रीज़ करने या राशि वापस हासिल करने की आवश्यकता नहीं पड़ी।

FRI प्रणाली कैसे काम करती है

DoT द्वारा विकसित फाइनेंशियल फ्रॉड रिस्क इंडिकेटर एक वास्तविक-समय जोखिम मूल्यांकन ढाँचा है। यह वित्तीय संस्थानों को यह पहचानने में सक्षम बनाता है कि कोई मोबाइल नंबर साइबर अपराध या वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़ा हो सकता है या नहीं। यह प्रणाली DoT के डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP) के माध्यम से संचालित होती है।

DIP मोबाइल नंबरों को संभावित संलिप्तता के आधार पर मध्यम, उच्च और अत्यधिक उच्च जोखिम वाली तीन श्रेणियों में वर्गीकृत करता है। जोखिम मूल्यांकन के लिए कई स्रोतों से डेटा एकत्र किया जाता है — इनमें संचार साथी प्लेटफॉर्म पर नागरिकों की शिकायतें, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल से प्राप्त डेटा, तथा दूरसंचार कंपनियों, बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों द्वारा साझा किए गए आँकड़े शामिल हैं।

किन संस्थाओं को मिलती है खुफिया जानकारी

DIP से प्राप्त जोखिम संकेत सुरक्षित माध्यम से बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं, बीमा कंपनियों, प्रतिभूति बाज़ार संस्थानों और पेंशन क्षेत्र की इकाइयों के साथ साझा किए जाते हैं। ये संस्थान इन संकेतों को अपने ग्राहक सत्यापन, लेनदेन निगरानी और धोखाधड़ी पहचान तंत्र में एकीकृत करते हैं।

गौरतलब है कि FRI-आधारित जाँच एक सेकंड से भी कम समय में पूरी की जा सकती है, जिससे संदिग्ध लेनदेन को राशि स्थानांतरित होने से पहले ही रोका जा सकता है।

पारंपरिक प्रणाली से कितना अलग है यह तंत्र

DoT के अनुसार, यह व्यवस्था पारंपरिक प्रतिक्रिया-आधारित प्रणाली से मौलिक रूप से भिन्न है। पहले की व्यवस्था में धोखाधड़ी हो जाने के बाद धन की खोज और खातों को फ्रीज़ करने की प्रक्रिया शुरू होती थी — जो अक्सर निष्फल रहती थी।

साइबर अपराधी चोरी की गई राशि को बेहद कम समय में कई फर्जी खातों या तथाकथित 'म्यूल अकाउंट्स' में स्थानांतरित कर देते हैं, जिससे धन वापस पाना अत्यंत कठिन हो जाता है। FRI इस चुनौती को भुगतान शुरू होने के क्षण में ही संबोधित करता है — न कि उसके बाद।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब भारत में डिजिटल भुगतान का दायरा तेज़ी से बढ़ रहा है और साइबर ठगी के मामले भी समानांतर रूप से बढ़ रहे हैं। DoT के इस तंत्र की बढ़ती प्रभावशीलता यह संकेत देती है कि आने वाले महीनों में और अधिक वित्तीय संस्थानों को DIP से जोड़ा जाएगा, जिससे सुरक्षा का दायरा और व्यापक होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

043 करोड़ का यह आँकड़ा प्रभावशाली है, लेकिन इसे 'रोकी गई संभावित हानि' के रूप में पढ़ा जाना चाहिए — न कि पुष्टि की गई वसूली के रूप में। असली सवाल यह है कि इनमें से कितने मामलों में वास्तव में धोखाधड़ी होती और कितने वैध लेनदेन को गलत तरीके से रोका गया। भारत में डिजिटल भुगतान की रफ्तार और साइबर अपराध की बढ़ती जटिलता को देखते हुए FRI जैसी प्रणाली की दिशा सही है, लेकिन झूठे अलार्म (false positives) की दर और छोटे व्यापारियों पर पड़ने वाले असर का स्वतंत्र मूल्यांकन अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। पारदर्शी ऑडिट के बिना यह एक शक्तिशाली उपकरण तो है, पर अधूरी जवाबदेही के साथ।
RashtraPress
9 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

DoT का फाइनेंशियल फ्रॉड रिस्क इंडिकेटर (FRI) क्या है?
FRI दूरसंचार विभाग द्वारा विकसित एक वास्तविक-समय जोखिम मूल्यांकन प्रणाली है जो वित्तीय संस्थानों को यह पहचानने में मदद करती है कि कोई मोबाइल नंबर साइबर अपराध से जुड़ा हो सकता है या नहीं। यह 22 मई 2025 को शुरू हुई और डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP) के ज़रिए काम करती है।
15 महीनों में FRI ने कितनी साइबर ठगी रोकी?
DoT के आँकड़ों के अनुसार, 22 मई 2025 से अगस्त 2026 तक FRI ने ₹5,043.73 करोड़ की संभावित साइबर धोखाधड़ी रोकी। इसमें से ₹2,000 करोड़ से अधिक केवल अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच के चार महीनों में रोके गए।
FRI प्रणाली पारंपरिक साइबर फ्रॉड जाँच से कैसे अलग है?
पारंपरिक प्रणाली में धोखाधड़ी होने के बाद खातों को फ्रीज़ करने और धन वापस पाने की कोशिश की जाती थी, जो अक्सर असफल रहती थी। FRI भुगतान शुरू होने के क्षण में ही — एक सेकंड से भी कम समय में — संदिग्ध लेनदेन की पहचान करके उसे रोक देती है।
FRI से किन संस्थाओं को जोखिम संकेत मिलते हैं?
DIP से प्राप्त जोखिम संकेत बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं, बीमा कंपनियों, प्रतिभूति बाज़ार संस्थानों और पेंशन क्षेत्र की इकाइयों के साथ सुरक्षित तरीके से साझा किए जाते हैं। ये संस्थान इन संकेतों को अपने ग्राहक सत्यापन और धोखाधड़ी पहचान तंत्र में शामिल करते हैं।
FRI के लिए डेटा कहाँ से आता है?
FRI के जोखिम मूल्यांकन के लिए संचार साथी प्लेटफॉर्म पर नागरिकों की शिकायतें, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल का डेटा, तथा दूरसंचार कंपनियों, बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा साझा की गई जानकारी का उपयोग किया जाता है।
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