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साइबर सुरक्षा पर सरकारी IT बजट का 15% खर्च हो: MeitY सचिव एस. कृष्णन का आह्वान

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साइबर सुरक्षा पर सरकारी IT बजट का 15% खर्च हो: MeitY सचिव एस. कृष्णन का आह्वान

सारांश

MeitY सचिव एस. कृष्णन ने सरकारी IT बजट का 15% साइबर सुरक्षा पर खर्च करने और 'सिक्योरिटी बाय डिज़ाइन' अपनाने का आह्वान किया। DRDO के AGI रोडमैप और पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी की ज़रूरत पर भी CII सम्मेलन में गंभीर चर्चा हुई।

मुख्य बातें

कृष्णन ने कहा कि सरकारी IT बजट का कम से कम 15% साइबर सुरक्षा पर खर्च होना चाहिए।
साइबर सुरक्षा को डिजिटल प्रणालियों में 'सिक्योरिटी बाय डिज़ाइन' के तहत शुरुआत से ही शामिल करने पर ज़ोर दिया गया।
उद्योग जगत से आग्रह किया गया कि साइबर घटनाओं की सूचना तत्काल CERT-In को दी जाए।
DRDO ने बुनियादी एआई मॉडल निर्माण के लिए RFI जारी किया; AGI की वैश्विक दौड़ को भू-राजनीतिक बदलाव बताया गया।
5G और 6G नेटवर्क के विस्तार से साइबर हमले का दायरा बड़े और छोटे — दोनों उद्यमों के लिए बढ़ा: डॉ.
पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी को राष्ट्रीय प्राथमिकता बताया गया, क्योंकि क्वांटम कंप्यूटिंग से पारंपरिक एन्क्रिप्शन प्रणालियाँ अप्रासंगिक हो जाएंगी।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन ने 4 जुलाई 2025 को स्पष्ट किया कि सरकारी आईटी बजट का कम से कम 15 प्रतिशत हिस्सा साइबर सुरक्षा पर अनिवार्य रूप से खर्च किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि साइबर सुरक्षा को डिजिटल प्रणालियों में 'बाद में जोड़ी जाने वाली सुविधा' नहीं, बल्कि डिज़ाइन के प्रारंभिक चरण से ही अनिवार्य अंग बनाया जाए।

शिखर सम्मेलन में क्या कहा गया

कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) द्वारा MeitY और इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) की साझेदारी में आयोजित 'साइबरसिक्योरिटी 360 समिट' को संबोधित करते हुए कृष्णन ने कहा, 'जब सरकार आईटी पर खर्च करती है, तो आईटी बजट का कम से कम 15 प्रतिशत हिस्सा साइबर सुरक्षा पर खर्च किया जाना चाहिए।' उन्होंने जोर दिया कि कोई भी संगठन साइबर जोखिमों को हल्के में नहीं ले सकता और इस क्षेत्र में निरंतर सतर्कता अपरिहार्य है।

कृष्णन ने 'सिक्योरिटी बाय डिज़ाइन' को प्रौद्योगिकी विकास का मूल सिद्धांत बताया। साथ ही उद्योग जगत से आग्रह किया कि वे साइबर सुरक्षा में पर्याप्त संसाधन लगाएँ, घरेलू साइबर सुरक्षा उत्पादों को प्राथमिकता दें और किसी भी साइबर घटना की सूचना तत्काल CERT-In को दें, ताकि सामूहिक सुरक्षा और सूचना-साझाकरण का तंत्र मजबूत हो सके।

रक्षा मंत्रालय की AGI और क्वांटम पर चेतावनी

रक्षा मंत्रालय के रक्षा विभाग के अतिरिक्त महानिदेशक एवं सलाहकार डॉ. अमित शर्मा ने कहा कि आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (AGI) की वैश्विक दौड़ एक बड़े भू-राजनीतिक बदलाव का संकेत है। उन्होंने अत्याधुनिक एआई मॉडल विकसित करने के लिए एक सक्रिय राष्ट्रीय रोडमैप तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया।

डॉ. शर्मा ने बताया कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) अपने प्रौद्योगिकी विकास कार्यक्रम के अंतर्गत बुनियादी एआई मॉडल निर्माण के लिए पहले ही 'रिक्वेस्ट फॉर इंफॉर्मेशन' (RFI) जारी कर चुका है। उन्होंने यह भी चेताया कि क्वांटम कंप्यूटिंग के आगमन से पारंपरिक क्रिप्टोग्राफिक प्रणालियाँ अंततः अप्रासंगिक हो जाएंगी, जिससे 'पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी' की ओर संक्रमण एक राष्ट्रीय प्राथमिकता बन जाएगी।

5G और 6G से बढ़ता साइबर खतरे का दायरा

CII साइबर सुरक्षा टास्क फोर्स के अध्यक्ष और पूर्व राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा समन्वयक डॉ. गुलशन राय ने कहा कि 5G और आने वाले 6G नेटवर्क के तीव्र विस्तार ने बड़े कॉरपोरेट घरानों और लघु व्यवसायों — दोनों के लिए साइबर हमले का दायरा काफी बड़ा कर दिया है। उन्होंने इस बढ़ते खतरे से निपटने के लिए उद्योग और सरकार के बीच घनिष्ठ समन्वय की वकालत की।

सम्मेलन का उद्देश्य और व्यापक संदर्भ

इस शिखर सम्मेलन में नीति-निर्माता, उद्योग जगत के नेता और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ एक मंच पर आए। इसका केंद्रीय उद्देश्य बदलते वैश्विक खतरों के परिप्रेक्ष्य में भारत की डिजिटल अवसंरचना को अधिक सुदृढ़ बनाने की रणनीतियाँ तय करना था। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत में साइबर हमलों की संख्या और परिष्कार दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है। आगे देखें तो इस सम्मेलन में उभरी सिफारिशें सरकारी साइबर सुरक्षा नीति के अगले मसौदे को प्रभावित कर सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे लागू करने का कोई बाध्यकारी तंत्र फिलहाल सामने नहीं आया है — यह सिफारिश है, नीतिगत अनिवार्यता नहीं। भारत में सरकारी विभागों के बीच साइबर सुरक्षा व्यय की पारदर्शी रिपोर्टिंग अभी भी अपवाद है, नियम नहीं। 'सिक्योरिटी बाय डिज़ाइन' का सिद्धांत वर्षों से चर्चा में है, परंतु सरकारी खरीद नीतियाँ अभी भी लागत को सुरक्षा से ऊपर रखती हैं। जब तक बजट आवंटन और CERT-In रिपोर्टिंग को ऑडिट-योग्य ढाँचे से नहीं जोड़ा जाता, ये आह्वान अच्छे इरादों की सूची से आगे नहीं बढ़ेंगे।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

MeitY सचिव ने साइबर सुरक्षा बजट को लेकर क्या कहा?
MeitY सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि सरकारी IT बजट का कम से कम 15 प्रतिशत हिस्सा साइबर सुरक्षा पर खर्च किया जाना चाहिए। उन्होंने यह बात CII साइबरसिक्योरिटी 360 समिट में कही।
'सिक्योरिटी बाय डिज़ाइन' का क्या अर्थ है?
'सिक्योरिटी बाय डिज़ाइन' का अर्थ है कि साइबर सुरक्षा उपायों को किसी भी डिजिटल प्रणाली के निर्माण के प्रारंभिक चरण में ही शामिल किया जाए, न कि बाद में जोड़ा जाए। MeitY सचिव ने इसे प्रौद्योगिकी विकास का मूल सिद्धांत बताया।
DRDO ने AI के क्षेत्र में क्या कदम उठाया है?
DRDO ने अपने प्रौद्योगिकी विकास कार्यक्रम के तहत बुनियादी AI मॉडल बनाने के लिए 'रिक्वेस्ट फॉर इंफॉर्मेशन' (RFI) जारी कर दिया है। रक्षा मंत्रालय के सलाहकार डॉ. अमित शर्मा ने AGI की वैश्विक दौड़ को एक बड़े भू-राजनीतिक बदलाव का संकेत बताया।
पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी क्यों ज़रूरी है?
क्वांटम कंप्यूटिंग के आने से मौजूदा पारंपरिक क्रिप्टोग्राफिक प्रणालियाँ अप्रभावी हो जाएंगी, जिससे संवेदनशील डेटा की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। डॉ. अमित शर्मा ने पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी की ओर बढ़ने को राष्ट्रीय प्राथमिकता करार दिया।
5G और 6G नेटवर्क से साइबर सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा?
CII साइबर सुरक्षा टास्क फोर्स के अध्यक्ष डॉ. गुलशन राय के अनुसार, 5G और आने वाले 6G नेटवर्क के तेज़ विस्तार से बड़े और छोटे — दोनों तरह के व्यवसायों के लिए साइबर हमले का दायरा काफी बढ़ गया है। इससे निपटने के लिए उद्योग और सरकार के बीच समन्वय और भी ज़रूरी हो गया है।
राष्ट्र प्रेस
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