क्या केंद्र ने बिजली, ऊर्जा और बैंकिंग क्षेत्रों में 9,700 से अधिक साइबर सुरक्षा ऑडिट किए?

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क्या केंद्र ने बिजली, ऊर्जा और बैंकिंग क्षेत्रों में 9,700 से अधिक साइबर सुरक्षा ऑडिट किए?

सारांश

केंद्र सरकार ने बिजली, ऊर्जा और बैंकिंग जैसे महत्वपूर्ण सेक्टर में 9,798 साइबर सुरक्षा ऑडिट किए हैं। ये ऑडिट साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आवश्यक हैं। क्या यह भारत के डिजिटल और फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित करेगा?

मुख्य बातें

9,798 सुरक्षा ऑडिट किए गए हैं।
साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए विभिन्न उपाय किए गए हैं।
सीईआरटी-इन ने 200 संगठनों को सूचीबद्ध किया है।
सरकार ने सीसीएमपी तैयार किया है।
205 वर्कशॉप्स आयोजित की गई हैं।

नई दिल्ली, 27 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। केंद्र सरकार की ओर से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (सीईआरटी-इन) और नेशनल क्रिटिकल इंफोर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन सेंटर (एनसीआईआईपीसी) ने मिलकर देशभर में बिजली, ऊर्जा और बीएफएसआई जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 9,798 सुरक्षा ऑडिट किए हैं।

सरकार, भारत के डिजिटल और भौतिक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए साइबर खतरों के प्रति जागरूक है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने राज्यसभा में कहा, "भारत सरकार की नीतियों का उद्देश्य सभी उपयोगकर्ताओं के लिए एक सुरक्षित, विश्वसनीय और जवाबदेह साइबरस्पेस सुनिश्चित करना है। बिजली, परिवहन या बैंकिंग जैसे महत्वपूर्ण ढांचे के निर्बाध और सुरक्षित संचालन के लिए कई पहल की गई हैं।"

सीईआरटी-इन ने इन ऑडिट के लिए 200 साइबर सुरक्षा संगठनों को सूचीबद्ध किया है।

साइबर एजेंसी स्टेट/सेक्टोरल कंप्यूटर सिक्योरिटी इंसीडेंट रिस्पॉन्स टीम्स (सीएसआईआरटी) की स्थापना के लिए आवश्यक दिशानिर्देश प्रदान करती है।

सेक्टर-स्पेसिफिक सीएसआईआरटी, जैसे कि वित्तीय क्षेत्र में सीएसआईआरटी-फिन और ऊर्जा क्षेत्र में सीएसआईआरटी-पावर, साइबर सुरक्षा मुद्दों के समन्वय और संबंधित क्षेत्रों में साइबर मजबूती बढ़ाने का कार्य करती हैं।

राज्य मंत्री ने कहा कि सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक) ने विदेशी समाधानों पर निर्भरता कम करने के लिए मोबाइल सुरक्षा, फोरेंसिक, लॉग संग्रहण और विश्लेषण जैसे कई स्वदेशी साइबर सुरक्षा उपकरण विकसित किए हैं।

सीईआरटी-इन ने साइबर हमलों और साइबर आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए सभी सरकारी निकायों के लिए एक साइबर क्राइसिस मैनेजमेंट प्लान (सीसीएमपी) तैयार किया है। सीसीएमपी साइबर संकट से उबरने में समन्वय और मजबूती बढ़ाने के लिए एक रणनीतिक ढांचा प्रदान करता है।

इसके अतिरिक्त, स्टेट/सेक्टोरल लेवल क्राइसिस मैनेजमेंट प्लान के विकास और कार्यान्वयन में सहायता के लिए दिशानिर्देश दस्तावेज और टेम्पलेट प्रकाशित किए गए हैं।

सीईआरटी-इन नियमित रूप से सरकारी निकायों और प्रमुख संगठनों के लिए वर्कशॉप आयोजित करता है ताकि उन्हें साइबर सुरक्षा खतरे के परिदृश्य के बारे में जागरूक किया जा सके और उन्हें सीसीएमपी तैयार करने और लागू करने में सक्षम बनाया जा सके। अब तक ऐसी 205 सीसीएमपी वर्कशॉप आयोजित की जा चुकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

मेरा मानना है कि इस तरह के कदम भारत की साइबर सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साइबर खतरों के बढ़ते मामलों के दृष्टिगत, यह आवश्यक है कि हम अपने डिजिटल और फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाएं।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

साइबर सुरक्षा ऑडिट का महत्व क्या है?
साइबर सुरक्षा ऑडिट से हमें साइबर खतरों की पहचान करने और उन्हें रोकने में मदद मिलती है।
सरकार की नीतियों का उद्देश्य क्या है?
सरकार की नीतियों का उद्देश्य सभी उपयोगकर्ताओं के लिए सुरक्षित और विश्वसनीय साइबरस्पेस सुनिश्चित करना है।
राष्ट्र प्रेस
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