क्या भारत 400 से अधिक स्टार्टअप्स के साथ ग्लोबल साइबरसिक्योरिटी हब बन रहा है?
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नई दिल्ली, 30 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (सीईआरटी-इन) के महानिदेशक डॉ. संजय बहल ने बताया कि भारत 400 से अधिक स्टार्टअप्स और 6.5 लाख पेशेवरों के कुशल कार्यबल के साथ एक ग्लोबल साइबरसिक्योरिटी हब के रूप में उभर रहा है, जो कि 20 अरब डॉलर की साइबर सिक्योरिटी इंडस्ट्री को सशक्त बना रहा है।
उन्होंने कहा कि ये इन्वेटर्स थ्रेट डिटेक्शन, साइबर फोरेंसिक और एआई आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम के लिए उन्नत समाधान विकसित कर रहे हैं, जिससे भारत की सुरक्षित और मजबूत डिजिटल इकोसिस्टम बनाने की प्रतिबद्धता और भी मजबूत हो रही है।
इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (सीईआरटी-इन) और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय ने विदेश मंत्रालय के सहयोग से यूरोपीय संघ के देशों के पत्रकारों के लिए एक इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. संजय बहल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) एक दोधारी तलवार की तरह कार्य करती है, जो रक्षकों और हमलावरों दोनों को सक्षम बनाती है।
उन्होंने विस्तार से बताया कि सीईआरटी-इन किस प्रकार रीयल टाइम में साइबर घटनाओं का पता लगाने, उन्हें रोकने और उन पर प्रतिक्रिया देने के लिए एआई-ड्रिवन विश्लेषण और ऑटोमेशन का उपयोग करता है।
कार्यक्रम में उपस्थित पत्रकारों को सीईआरटी-इन के निरंतर प्रयासों, क्षमता निर्माण पहलों और अंतरराष्ट्रीय सहयोगों के बारे में जानकारी दी गई।
डॉ. बहल ने जानकारी देते हुए बताया कि भारत ने 2024 में 147 रैंसमवेयर घटनाओं की रिपोर्ट की थी, जिसमें सीईआरटी-इन की समन्वित कार्रवाई ने रीयल टाइम में खुफिया जानकारी साझा करने और फोरेंसिक हस्तक्षेपों के माध्यम से उनके प्रभाव को काफी हद तक कम कर दिया।
इस सत्र में साइबर घटनाओं के प्रबंधन, वल्नरेबिलिटी असेसमेंट, जानकारी साझा करने और समन्वित प्रतिक्रिया के संबंध में सीईआरटी-इन की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों पर चर्चा की गई।
डॉ. बहल ने इस बात पर जोर दिया कि सीईआरटी-इन उभरते खतरों के प्रति संगठनों और नागरिकों को समय पर अलर्ट और परामर्श जारी करता है, जिससे अनावश्यक भय पैदा किए बिना सक्रिय सुरक्षा सुनिश्चित होती है।