क्या भारत 400 से अधिक स्टार्टअप्स के साथ ग्लोबल साइबरसिक्योरिटी हब बन रहा है?

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क्या भारत 400 से अधिक स्टार्टअप्स के साथ ग्लोबल साइबरसिक्योरिटी हब बन रहा है?

सारांश

भारत की साइबरसिक्योरिटी क्षमताएं तेजी से बढ़ रही हैं, जहां 400+ स्टार्टअप्स और 6.5 लाख पेशेवर मिलकर 20 अरब डॉलर की इंडस्ट्री को मजबूती दे रहे हैं। जानें कैसे इन इन्वेटर्स की मेहनत से डिजिटल सुरक्षा में सुधार हो रहा है।

मुख्य बातें

भारत में 400+ स्टार्टअप्स साइबर सुरक्षा में योगदान दे रहे हैं।
6.5 लाख पेशेवरों की कुशल कार्यबल है।
भारत का 20 अरब डॉलर का साइबर सुरक्षा उद्योग।
सीईआरटी-इन की समन्वित कार्रवाई से रैंसमवेयर घटनाओं में कमी।
AI का उपयोग रीयल टाइम में साइबर घटनाओं का प्रबंधन करने के लिए।

नई दिल्ली, 30 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (सीईआरटी-इन) के महानिदेशक डॉ. संजय बहल ने बताया कि भारत 400 से अधिक स्टार्टअप्स और 6.5 लाख पेशेवरों के कुशल कार्यबल के साथ एक ग्लोबल साइबरसिक्योरिटी हब के रूप में उभर रहा है, जो कि 20 अरब डॉलर की साइबर सिक्योरिटी इंडस्ट्री को सशक्त बना रहा है।

उन्होंने कहा कि ये इन्वेटर्स थ्रेट डिटेक्शन, साइबर फोरेंसिक और एआई आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम के लिए उन्नत समाधान विकसित कर रहे हैं, जिससे भारत की सुरक्षित और मजबूत डिजिटल इकोसिस्टम बनाने की प्रतिबद्धता और भी मजबूत हो रही है।

इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (सीईआरटी-इन) और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय ने विदेश मंत्रालय के सहयोग से यूरोपीय संघ के देशों के पत्रकारों के लिए एक इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. संजय बहल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) एक दोधारी तलवार की तरह कार्य करती है, जो रक्षकों और हमलावरों दोनों को सक्षम बनाती है।

उन्होंने विस्तार से बताया कि सीईआरटी-इन किस प्रकार रीयल टाइम में साइबर घटनाओं का पता लगाने, उन्हें रोकने और उन पर प्रतिक्रिया देने के लिए एआई-ड्रिवन विश्लेषण और ऑटोमेशन का उपयोग करता है।

कार्यक्रम में उपस्थित पत्रकारों को सीईआरटी-इन के निरंतर प्रयासों, क्षमता निर्माण पहलों और अंतरराष्ट्रीय सहयोगों के बारे में जानकारी दी गई।

डॉ. बहल ने जानकारी देते हुए बताया कि भारत ने 2024 में 147 रैंसमवेयर घटनाओं की रिपोर्ट की थी, जिसमें सीईआरटी-इन की समन्वित कार्रवाई ने रीयल टाइम में खुफिया जानकारी साझा करने और फोरेंसिक हस्तक्षेपों के माध्यम से उनके प्रभाव को काफी हद तक कम कर दिया।

इस सत्र में साइबर घटनाओं के प्रबंधन, वल्नरेबिलिटी असेसमेंट, जानकारी साझा करने और समन्वित प्रतिक्रिया के संबंध में सीईआरटी-इन की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों पर चर्चा की गई।

डॉ. बहल ने इस बात पर जोर दिया कि सीईआरटी-इन उभरते खतरों के प्रति संगठनों और नागरिकों को समय पर अलर्ट और परामर्श जारी करता है, जिससे अनावश्यक भय पैदा किए बिना सक्रिय सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

भारतीय स्टार्टअप्स ने वैश्विक स्तर पर साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया है। यह न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक है, बल्कि एक मजबूत डिजिटल इकोसिस्टम के निर्माण में भी सहायक है।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में कितने स्टार्टअप्स साइबर सुरक्षा में काम कर रहे हैं?
भारत में 400 से अधिक स्टार्टअप्स साइबर सुरक्षा क्षेत्र में सक्रिय हैं।
डॉ. संजय बहल के अनुसार भारत की साइबर सुरक्षा स्थिति कैसी है?
डॉ. संजय बहल ने कहा कि भारत ग्लोबल साइबरसिक्योरिटी हब के रूप में उभर रहा है।
भारत में साइबर सुरक्षा उद्योग का मूल्य क्या है?
20 अरब डॉलर का साइबर सुरक्षा उद्योग भारत में तेजी से बढ़ रहा है।
सीईआरटी-इन के कार्यों में क्या शामिल है?
सीईआरटी-इन साइबर घटनाओं का पता लगाने, रोकने और प्रतिक्रिया देने में मदद करता है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का साइबर सुरक्षा में क्या योगदान है?
AI रक्षकों और विरोधियों दोनों को सक्षम बनाता है, जिससे साइबर सुरक्षा में सुधार होता है।
राष्ट्र प्रेस
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