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PM मोदी ने साझा किए संस्कृत श्लोक, एकता-सौहार्द और स्वतंत्रता का दिया संदेश

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PM मोदी ने साझा किए संस्कृत श्लोक, एकता-सौहार्द और स्वतंत्रता का दिया संदेश

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी ने इस सप्ताह बुधवार से शुक्रवार तक तीन संस्कृत सुभाषित साझा किए — राष्ट्रीय समृद्धि, स्वतंत्रता और सामूहिक एकता पर। गुरुवार को संविधान हत्या दिवस पर आपातकाल के विरोधियों को नमन करते हुए उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा का आह्वान भी किया।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 26 जून 2026 को सोशल मीडिया पर एकता व सौहार्द पर आधारित संस्कृत श्लोक 'सङ्गच्छध्वं संवदध्वं…' साझा किया।
गुरुवार को संविधान हत्या दिवस के अवसर पर मोदी ने आपातकाल को 'काला दौर' बताया और विरोधियों को नमन किया।
गुरुवार को ही स्वतंत्रता पर आधारित श्लोक 'स्वातन्त्र्यात् सुखमाप्नोति…' भी साझा किया गया।
बुधवार, 24 जून को राष्ट्रीय समृद्धि पर श्लोक 'यत्रोत्साहसमारम्भो…' और सामूहिक समर्पण का संदेश दिया गया।
इस सप्ताह प्रधानमंत्री ने तीन संस्कृत सुभाषित क्रमशः समृद्धि, स्वतंत्रता और एकता के भाव से साझा किए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 जून 2026 को सोशल मीडिया पर एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए देशवासियों को एकजुटता और आपसी सद्भाव का संदेश दिया। इस सप्ताह उन्होंने क्रमशः राष्ट्रीय समृद्धि, स्वतंत्रता और सामूहिक एकता के भाव को रेखांकित करने वाले कई श्लोक प्रस्तुत किए।

शुक्रवार का श्लोक: एकता और सौहार्द

प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को संस्कृत श्लोक 'सङ्गच्छध्वं संवदध्वं, सं वो मनांसि जानताम्। देवा भागं यथा पूर्वे, सञ्जानाना उपासते॥' साझा किया। इस श्लोक का भावार्थ है कि हम सब साथ मिलकर चलें, एक सुर में बोलें और हमारे मन व विचार एक हों — ठीक उसी प्रकार जैसे प्राचीनकाल में देवता एकमत होकर अपने कर्तव्यों का निर्वाह करते थे।

गुरुवार का संदेश: संविधान हत्या दिवस और आपातकाल

एक दिन पूर्व गुरुवार को मोदी ने संविधान हत्या दिवस के अवसर पर लिखा, 'संविधान हत्या दिवस आज हमें उस काले दौर की याद दिला रहा है, जब भारतीय लोकतंत्र को बुरी तरह से कुचला गया था। यह हमें लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहने को प्रेरित करता है। आपातकाल का विरोध करने वाली सभी विभूतियों को सादर नमन।' इसके साथ उन्होंने स्वतंत्रता पर आधारित श्लोक 'स्वातन्त्र्यात् सुखमाप्नोति स्वातन्त्र्याल्लभते परम्। स्वातन्त्र्यान्निर्वृत्तिं गच्छेत् स्वातन्त्र्यात् परमं पदम्।' भी साझा किया, जिसका अर्थ है कि स्वतंत्रता से ही मनुष्य सुख, सर्वोच्च उपलब्धि, शांति और परम पद को प्राप्त करता है।

बुधवार का श्लोक: राष्ट्र की समृद्धि

बुधवार, 24 जून को प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय समृद्धि के संदर्भ में श्लोक 'यत्रोत्साहसमारम्भो यत्रालस्यविहीनता। नयविक्रमसंयोगस्तत्र श्रीरचला ध्रुवम्॥' साझा किया। उन्होंने लिखा, 'सामूहिक समर्पण और पुरुषार्थ से राष्ट्र की समृद्धि अक्षुण्ण रहती है। यही भावना समाज को नई ऊर्जा देती है और विकास के संकल्पों को सिद्धि तक पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त करती है।' इस श्लोक का भाव है कि जहाँ परिश्रम, राष्ट्रभक्ति, अनवरत कर्तव्य-निष्ठा और विनम्रता के साथ साहस का संयोग हो, वहाँ राष्ट्र की समृद्धि सदा अटल रहती है।

सप्ताह भर के संदेशों का महत्व

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी समय-समय पर सोशल मीडिया के माध्यम से संस्कृत सुभाषितों को साझा करते रहे हैं, जो प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को समकालीन राष्ट्रीय विमर्श से जोड़ने का प्रयास है। इस सप्ताह के तीनों संदेश — समृद्धि, स्वतंत्रता और एकता — मिलकर एक समग्र राष्ट्रीय दृष्टि प्रस्तुत करते हैं। आने वाले दिनों में भी इस श्रृंखला के जारी रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दोनों को एक साथ देखें तो एक स्पष्ट कथा-निर्माण दिखता है। हालाँकि, यह श्रृंखला जितनी प्रेरणादायी है, उतनी ही यह सवाल भी उठाती है कि क्या प्राचीन ज्ञान के उद्धरण समकालीन शासन की चुनौतियों — बेरोज़गारी, सामाजिक विभाजन, संस्थागत दबाव — के विकल्प बन सकते हैं।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने 26 जून को कौन-सा संस्कृत श्लोक साझा किया?
प्रधानमंत्री मोदी ने 26 जून को 'सङ्गच्छध्वं संवदध्वं, सं वो मनांसि जानताम्। देवा भागं यथा पूर्वे, सञ्जानाना उपासते॥' श्लोक साझा किया। इसका भावार्थ है कि हम सब मिलकर चलें, एक सुर में बोलें और हमारे विचार एकजुट हों।
संविधान हत्या दिवस पर मोदी ने क्या कहा?
गुरुवार को संविधान हत्या दिवस के अवसर पर मोदी ने कहा कि यह दिन उस काले दौर की याद दिलाता है जब भारतीय लोकतंत्र को कुचला गया था। उन्होंने आपातकाल का विरोध करने वाली विभूतियों को नमन किया और लोकतंत्र व नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्धता दोहराई।
इस सप्ताह मोदी ने कितने संस्कृत श्लोक साझा किए?
इस सप्ताह प्रधानमंत्री ने तीन संस्कृत सुभाषित साझा किए — बुधवार 24 जून को राष्ट्र की समृद्धि पर, गुरुवार को स्वतंत्रता पर, और शुक्रवार 26 जून को एकता व सौहार्द पर।
मोदी द्वारा साझा किए गए स्वतंत्रता वाले श्लोक का अर्थ क्या है?
गुरुवार को साझा किए गए 'स्वातन्त्र्यात् सुखमाप्नोति…' श्लोक का अर्थ है कि स्वतंत्रता से ही मनुष्य सुख, सर्वोच्च उपलब्धि, शांति और परम पद प्राप्त करता है। यह श्लोक संविधान हत्या दिवस के संदर्भ में साझा किया गया था।
PM मोदी सोशल मीडिया पर संस्कृत श्लोक क्यों साझा करते हैं?
प्रधानमंत्री मोदी समय-समय पर सोशल मीडिया पर संस्कृत सुभाषित साझा करते हैं, जो प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को समकालीन राष्ट्रीय विमर्श से जोड़ने का प्रयास माना जाता है। इस सप्ताह के श्लोक राष्ट्रीय एकता, स्वतंत्रता और समृद्धि जैसे विषयों पर केंद्रित रहे।
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