14 अगस्त 2026
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विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर अमित शाह, गडकरी, योगी समेत कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

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विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर अमित शाह, गडकरी, योगी समेत कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

सारांश

14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर देशभर के नेताओं ने 1947 की त्रासदी में जान गंवाने वालों को नमन किया। गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर कांग्रेस को बंटवारे का जिम्मेदार ठहराया, जबकि योगी आदित्यनाथ, रेखा गुप्ता और मोहन यादव ने राष्ट्रीय एकता का संकल्प दोहराया।

मुख्य बातें

14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर केंद्र और राज्यों के शीर्ष नेताओं ने 1947 के विभाजन के पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पोस्ट में देश के बंटवारे को कांग्रेस की देन बताया।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मनोहर लाल ने धर्म-आधारित विभाजन को भारतीय इतिहास का 'काला अध्याय' करार दिया।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विभाजन को सीमाओं के साथ-साथ परिवारों और संवेदनाओं के बिखराव के रूप में याद किया।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नागरिकों से राष्ट्रीय एकता व सामाजिक सद्भाव के प्रति संकल्प लेने का आह्वान किया।
यह दिवस 2021 से प्रतिवर्ष 14 अगस्त को मनाया जाता है।

नई दिल्ली, 14 अगस्तविभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर देशभर के नेताओं ने 1947 के विभाजन में जान गंवाने वाले और विस्थापित हुए लाखों लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मनोहर लाल से लेकर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों तक — सभी ने इस दिन को राष्ट्रीय स्मरण और एकता के संकल्प के रूप में चिह्नित किया।

अमित शाह का एक्स पोस्ट: कांग्रेस पर सीधा निशाना

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर लिखा, '14 अगस्त 1947 का दिन इतिहास के उस क्रूरतम अध्याय का साक्षी है, जिसमें अमानवीय पीड़ा सहते हुए लाखों लोगों को अपना जीवन गंवाना पड़ा और करोड़ों लोगों को घर, संपत्ति व अपनों को छोड़कर विस्थापित होना पड़ा। देश के बंटवारे का यह दंश, जो कांग्रेस की देन है, उसे इतिहास कभी भूल नहीं पाएगा।' शाह ने यह भी कहा कि मोदी सरकार इस दिवस के माध्यम से विभाजन की त्रासदी की स्मृतियों को युवा पीढ़ी तक पहुँचा रही है, 'ताकि देश को फिर से तोड़ने वाली ताकतें कभी सफल न हो सकें और एक भारत, श्रेष्ठ भारत ही हमारा सर्वोच्च ध्येय बने।'

गडकरी और मनोहर लाल की श्रद्धांजलि

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि धर्म के आधार पर 1947 में हुआ देश का विभाजन 'भारतीय इतिहास का एक अमानवीय और काला अध्याय है।' उन्होंने उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि दी जिन्हें विभाजन के दौरान अपनी जान गंवानी पड़ी। केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से इस दिवस को मनाने की परंपरा 'राष्ट्रनिर्माण की ओर उठाया गया मजबूत कदम है।'

योगी आदित्यनाथ और रेखा गुप्ता का संदेश

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 1947 का विभाजन 'मात्र सीमाओं का ही नहीं, बल्कि असंख्य परिवारों के सपनों, संबंधों और संवेदनाओं का बिखराव भी था।' उन्होंने इस दिवस को राष्ट्र की एकता-अखंडता को सर्वोच्च मानने का संदेश बताया। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, '14 अगस्त 1947 को केवल देश की सीमाएं नहीं बदली थीं — किसी की जन्मभूमि छूट गई, किसी का घर उजड़ गया, किसी के अपने बिछड़ गए।' उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की इस पहल को विस्थापित परिवारों की पीड़ा को राष्ट्र की सामूहिक स्मृति में स्थापित करने का प्रयास बताया।

मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव का आह्वान

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विभाजन में प्राण गंवाने वालों को नमन करते हुए कहा कि यह त्रासदी 'मानवता की रक्षा, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता के महत्व का सदैव स्मरण कराती है।' उन्होंने सभी नागरिकों से राष्ट्र की एकता व अखंडता को सुदृढ़ बनाने के प्रयासों में सहभागिता का संकल्प लेने का आह्वान किया।

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस: पृष्ठभूमि

यह दिवस 2021 से प्रतिवर्ष 14 अगस्त को मनाया जाता है — स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले — ताकि 1947 के विभाजन की मानवीय त्रासदी को राष्ट्रीय स्मृति में जीवित रखा जा सके। अनुमानों के अनुसार विभाजन के दौरान 10 लाख से अधिक लोग मारे गए और 1 करोड़ से अधिक लोग विस्थापित हुए। यह दिन उन सभी के संघर्ष और बलिदान को याद करने और आने वाली पीढ़ियों को उस इतिहास से जोड़ने का अवसर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सत्तारूढ़ दल के लिए एक सुसंगत राजनीतिक कथा का भी हिस्सा है। गौरतलब है कि विभाजन एक जटिल ऐतिहासिक प्रक्रिया थी जिसमें कई राजनीतिक दलों, ब्रिटिश नीतियों और सांप्रदायिक ताकतों की भूमिका थी — इसे किसी एक दल की 'देन' तक सीमित करना इतिहासकारों के बीच विवादास्पद है। असली सवाल यह है कि क्या यह दिवस आने वाली पीढ़ियों में सहिष्णुता और एकता की भावना जगाता है, या विभाजनकारी राजनीति को और गहरा करता है।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस क्या है और यह कब मनाया जाता है?
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस प्रतिवर्ष 14 अगस्त को मनाया जाता है — यह 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन में जान गंवाने वाले और विस्थापित हुए लाखों लोगों की स्मृति में राष्ट्रीय स्मरण दिवस है। इसकी शुरुआत 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर हुई थी।
अमित शाह ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर क्या कहा?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर लिखा कि 14 अगस्त 1947 इतिहास के क्रूरतम अध्यायों में से एक है, जिसमें लाखों लोगों को जीवन गंवाना पड़ा और करोड़ों लोग विस्थापित हुए। उन्होंने बंटवारे के दंश को 'कांग्रेस की देन' बताया और कहा कि मोदी सरकार इस त्रासदी की स्मृतियों को युवा पीढ़ी तक पहुँचा रही है।
इस दिवस पर किन-किन नेताओं ने श्रद्धांजलि दी?
14 अगस्त 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मनोहर लाल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विभाजन के पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
योगी आदित्यनाथ ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर क्या संदेश दिया?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 1947 का विभाजन केवल सीमाओं का नहीं, बल्कि असंख्य परिवारों के सपनों, संबंधों और संवेदनाओं का भी बिखराव था। उन्होंने इस दिवस को राष्ट्र की एकता-अखंडता को सर्वोच्च मानने का संदेश देने वाला अवसर बताया।
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाने का उद्देश्य क्या है?
इस दिवस का उद्देश्य 1947 के विभाजन की मानवीय त्रासदी को राष्ट्रीय स्मृति में जीवित रखना और युवा पीढ़ी को उस इतिहास से जोड़ना है। सरकार का मानना है कि इससे राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव और 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना को बल मिलता है।
राष्ट्र प्रेस
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