विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर अमित शाह, गडकरी, योगी समेत कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 14 अगस्त — विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर देशभर के नेताओं ने 1947 के विभाजन में जान गंवाने वाले और विस्थापित हुए लाखों लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मनोहर लाल से लेकर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों तक — सभी ने इस दिन को राष्ट्रीय स्मरण और एकता के संकल्प के रूप में चिह्नित किया।
अमित शाह का एक्स पोस्ट: कांग्रेस पर सीधा निशाना
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर लिखा, '14 अगस्त 1947 का दिन इतिहास के उस क्रूरतम अध्याय का साक्षी है, जिसमें अमानवीय पीड़ा सहते हुए लाखों लोगों को अपना जीवन गंवाना पड़ा और करोड़ों लोगों को घर, संपत्ति व अपनों को छोड़कर विस्थापित होना पड़ा। देश के बंटवारे का यह दंश, जो कांग्रेस की देन है, उसे इतिहास कभी भूल नहीं पाएगा।' शाह ने यह भी कहा कि मोदी सरकार इस दिवस के माध्यम से विभाजन की त्रासदी की स्मृतियों को युवा पीढ़ी तक पहुँचा रही है, 'ताकि देश को फिर से तोड़ने वाली ताकतें कभी सफल न हो सकें और एक भारत, श्रेष्ठ भारत ही हमारा सर्वोच्च ध्येय बने।'
गडकरी और मनोहर लाल की श्रद्धांजलि
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि धर्म के आधार पर 1947 में हुआ देश का विभाजन 'भारतीय इतिहास का एक अमानवीय और काला अध्याय है।' उन्होंने उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि दी जिन्हें विभाजन के दौरान अपनी जान गंवानी पड़ी। केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से इस दिवस को मनाने की परंपरा 'राष्ट्रनिर्माण की ओर उठाया गया मजबूत कदम है।'
योगी आदित्यनाथ और रेखा गुप्ता का संदेश
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 1947 का विभाजन 'मात्र सीमाओं का ही नहीं, बल्कि असंख्य परिवारों के सपनों, संबंधों और संवेदनाओं का बिखराव भी था।' उन्होंने इस दिवस को राष्ट्र की एकता-अखंडता को सर्वोच्च मानने का संदेश बताया। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, '14 अगस्त 1947 को केवल देश की सीमाएं नहीं बदली थीं — किसी की जन्मभूमि छूट गई, किसी का घर उजड़ गया, किसी के अपने बिछड़ गए।' उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की इस पहल को विस्थापित परिवारों की पीड़ा को राष्ट्र की सामूहिक स्मृति में स्थापित करने का प्रयास बताया।
मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव का आह्वान
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विभाजन में प्राण गंवाने वालों को नमन करते हुए कहा कि यह त्रासदी 'मानवता की रक्षा, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता के महत्व का सदैव स्मरण कराती है।' उन्होंने सभी नागरिकों से राष्ट्र की एकता व अखंडता को सुदृढ़ बनाने के प्रयासों में सहभागिता का संकल्प लेने का आह्वान किया।
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस: पृष्ठभूमि
यह दिवस 2021 से प्रतिवर्ष 14 अगस्त को मनाया जाता है — स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले — ताकि 1947 के विभाजन की मानवीय त्रासदी को राष्ट्रीय स्मृति में जीवित रखा जा सके। अनुमानों के अनुसार विभाजन के दौरान 10 लाख से अधिक लोग मारे गए और 1 करोड़ से अधिक लोग विस्थापित हुए। यह दिन उन सभी के संघर्ष और बलिदान को याद करने और आने वाली पीढ़ियों को उस इतिहास से जोड़ने का अवसर है।