9 अगस्त 2026
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भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ: अमित शाह, गडकरी, योगी समेत दर्जनों नेताओं ने स्वतंत्रता सेनानियों को नमन किया

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भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ: अमित शाह, गडकरी, योगी समेत दर्जनों नेताओं ने स्वतंत्रता सेनानियों को नमन किया

सारांश

9 अगस्त 2026 को भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ पर गृह मंत्री अमित शाह से लेकर उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, बिहार, उत्तराखंड, गुजरात और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों तक — देश के शीर्ष नेताओं ने एकस्वर में 1942 के उन वीरों को नमन किया जिन्होंने 'करो या मरो' के संकल्प से ब्रिटिश साम्राज्य को चुनौती दी थी।

मुख्य बातें

9 अगस्त 2026 को भारत छोड़ो आंदोलन (अगस्त क्रांति) की 84वीं वर्षगांठ मनाई गई।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह , सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक्स पर श्रद्धांजलि दी।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ , राजस्थान के भजनलाल यादव , दिल्ली की रेखा गुप्ता , हरियाणा के नायब सैनी , बिहार के सम्राट चौधरी और उत्तराखंड के पुष्कर सिंह धामी ने भी नमन किया।
गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की।
9 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी ने 'करो या मरो' का नारा देकर भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत की थी।

9 अगस्त 2026 को भारत छोड़ो आंदोलन (अगस्त क्रांति) की 84वीं वर्षगांठ पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, बिहार, उत्तराखंड, गुजरात और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों एवं उपमुख्यमंत्रियों ने स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। 9 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी के नेतृत्व में शुरू हुए इस आंदोलन ने 'करो या मरो' के उद्घोष के साथ ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी थी।

अगस्त क्रांति का ऐतिहासिक महत्व

9 अगस्त 1942 को मुंबई के गवालिया टैंक मैदान से शुरू हुआ भारत छोड़ो आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की सबसे बड़ी जनक्रांतियों में से एक था। महात्मा गांधी के 'करो या मरो' के आह्वान ने देशभर में लाखों नागरिकों को एकजुट किया और ब्रिटिश शासन के विरुद्ध निर्णायक संघर्ष का मार्ग प्रशस्त किया। गौरतलब है कि इस आंदोलन के बाद ब्रिटिश सरकार को स्पष्ट संदेश मिल गया था कि भारत पर उनका शासन अधिक समय तक टिकाऊ नहीं रहेगा।

केंद्रीय मंत्रियों की श्रद्धांजलि

गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर लिखा कि 'भारत छोड़ो आंदोलन' स्वाधीनता संग्राम का वह ऐतिहासिक अध्याय है जिसने देशवासियों को एकजुट कर 'करो या मरो' का संकल्प और अदम्य साहस प्रदान किया। उन्होंने इस दिन को स्वदेशी अपनाने, आत्मनिर्भर भारत और 'विकसित भारत' के संकल्प को साकार करने की प्रेरणा का स्रोत बताया।

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने एक्स पर स्मरण किया कि 1942 में आज ही के दिन महात्मा गांधी के नेतृत्व में भारतवासियों ने अंग्रेजों के विरुद्ध इस आंदोलन की शुरुआत की थी, और आजादी के लिए सर्वस्व अर्पण करने वाले अमर बलिदानियों को शत-शत नमन अर्पित किया।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि अगस्त क्रांति ने देशवासियों में आजादी की लौ और संघर्ष का संकल्प जगाया, तथा सभी अमर वीर सेनानियों के त्याग, संघर्ष और बलिदान को राष्ट्र सदैव स्मरण करता रहेगा।

मुख्यमंत्रियों की प्रतिक्रियाएँ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर लिखा कि 'करो या मरो' के उद्घोष से राष्ट्र चेतना का जागरण करने वाले स्वतंत्रता संग्राम के नायकों का अदम्य साहस, त्याग और बलिदान स्वाधीनता आंदोलन को निर्णायक दिशा देने वाला रहा और उनका राष्ट्र के प्रति समर्पण प्रत्येक भारतवासी के लिए सदैव प्रेरणापुंज बना रहेगा।

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल यादव ने एक्स पर कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों का संघर्ष, राष्ट्रभक्ति और अटूट संकल्प राष्ट्र की एकता, अखंडता और गौरव की रक्षा के लिए सदैव प्रेरित करता रहेगा। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स पर लिखा कि अगस्त क्रांति ने ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी और 'करो या मरो' के मंत्र ने जन-जन में स्वाधीनता की ज्वाला प्रज्वलित कर दी।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने एक्स पर कहा कि यह आंदोलन भारत की आजादी के संघर्ष में जनशक्ति और राष्ट्रभक्ति का अद्वितीय प्रतीक बना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी एक्स पर अमर वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने 'करो या मरो' के संकल्प से स्वतंत्रता की अलख जगाने वाले वीरों को नमन किया। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने एक्स पर कहा कि अगस्त क्रांति के दिन पूरे देश में भारत छोड़ो का आह्वान गूंजा था और देश की आजादी के लिए प्राणों की आहुति देने वाले सभी महान क्रांतिकारियों को कोटि-कोटि नमन है।

राष्ट्रीय स्मरण का संदेश

यह ऐसे समय में आया है जब देश 15 अगस्त 2026 को 79वें स्वतंत्रता दिवस की ओर बढ़ रहा है। अगस्त क्रांति दिवस पर इस व्यापक राष्ट्रीय स्मरण ने एक बार फिर स्वतंत्रता संग्राम की विरासत को वर्तमान पीढ़ी के सामने जीवंत किया। नेताओं के संदेशों में 'आत्मनिर्भर भारत' और 'विकसित भारत' के लक्ष्यों को स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान की निरंतरता के रूप में प्रस्तुत किया गया।

संपादकीय दृष्टिकोण

परंतु विचारणीय भी — क्योंकि भारत छोड़ो आंदोलन मूलतः सत्ता के विरुद्ध जनशक्ति का विद्रोह था, जबकि आज इसे सत्तारूढ़ दल के नीतिगत एजेंडे की वैधता के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। असली श्रद्धांजलि तब होगी जब स्वतंत्रता संग्राम की जवाबदेही और जन-भागीदारी की भावना को आज की शासन प्रणाली में भी उतनी ही गंभीरता से आत्मसात किया जाए।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत छोड़ो आंदोलन क्या था और इसकी 84वीं वर्षगांठ क्यों मनाई जाती है?
भारत छोड़ो आंदोलन 9 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी के नेतृत्व में शुरू हुआ था, जिसमें 'करो या मरो' के नारे के साथ ब्रिटिश शासन को तत्काल समाप्त करने की माँग की गई थी। यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की सबसे बड़ी जनक्रांतियों में से एक मानी जाती है। हर वर्ष 9 अगस्त को अगस्त क्रांति दिवस के रूप में मनाया जाता है।
9 अगस्त 2026 को किन-किन नेताओं ने श्रद्धांजलि दी?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राजस्थान के भजनलाल यादव, दिल्ली की रेखा गुप्ता, हरियाणा के नायब सैनी, बिहार के सम्राट चौधरी, उत्तराखंड के पुष्कर सिंह धामी, गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने एक्स पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
'करो या मरो' का नारा किसने और कब दिया था?
'करो या मरो' का नारा महात्मा गांधी ने 9 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत के अवसर पर दिया था। इस नारे ने देशभर के नागरिकों में स्वतंत्रता के लिए अदम्य संकल्प जगाया और ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध निर्णायक जनआंदोलन खड़ा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अमित शाह ने अगस्त क्रांति दिवस पर क्या संदेश दिया?
गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर लिखा कि भारत छोड़ो आंदोलन स्वाधीनता संग्राम का ऐतिहासिक अध्याय है जिसने देशवासियों को 'करो या मरो' का संकल्प और अदम्य साहस प्रदान किया। उन्होंने इस दिन को स्वदेशी अपनाने, आत्मनिर्भर भारत के निर्माण और 'विकसित भारत' के संकल्प को साकार करने की प्रेरणा का दिन बताया।
भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ का वर्तमान संदर्भ में क्या महत्व है?
यह वर्षगांठ 15 अगस्त 2026 को 79वें स्वतंत्रता दिवस से ठीक एक सप्ताह पहले आती है, जिससे इसका राष्ट्रीय महत्व और बढ़ जाता है। नेताओं ने 1942 के बलिदान को 'आत्मनिर्भर भारत' और 'विकसित भारत' जैसे समकालीन लक्ष्यों से जोड़ते हुए स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत को वर्तमान पीढ़ी के सामने प्रस्तुत किया।
राष्ट्र प्रेस
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