राष्ट्रपति मुर्मु: विकसित भारत 2047 का अर्थ केवल आर्थिक नहीं, आध्यात्मिक जागरण भी जरूरी
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार, 23 सितंबर 2026 को वडोदरा में स्पष्ट किया कि 2047 तक विकसित भारत का सपना केवल आर्थिक समृद्धि तक सीमित नहीं रहना चाहिए — इसमें आध्यात्मिक जागरण को भी समान महत्व मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश को ऐसे युवा तैयार करने होंगे जो ज्ञान, तकनीक और कौशल के साथ साथ आत्मविश्वास, आत्मअनुशासन और नैतिक मूल्यों से भी परिपूर्ण हों।
कार्यक्रम और संदर्भ
राष्ट्रपति मुर्मु ब्रह्माकुमारी संस्था की राष्ट्रीय पहल 'अवेकनिंग इनर स्ट्रेंथ फॉर नेशन बिल्डिंग' के वर्चुअल शुभारंभ के बाद नडियाद में उपस्थित श्रोताओं को संबोधित कर रही थीं। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी संस्था की 90 वर्षों की आध्यात्मिक यात्रा पूरी होने का उत्सव भी मनाया गया, और संगठन की वर्ष 2026 की राष्ट्रीय थीम 'विश्व नवसृजन के लिए आध्यात्मिक जागरण' का औपचारिक शुभारंभ किया गया।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार विकसित भारत @2047 के रोडमैप पर विभिन्न मंचों से चर्चा कर रही है, और राष्ट्रपति का यह संदेश उस बहस में एक नई परत जोड़ता है — कि विकास का पैमाना केवल GDP नहीं, बल्कि मानवीय चरित्र भी होना चाहिए।
युवाओं पर विशेष जोर
राष्ट्रपति ने रेखांकित किया कि भारत की लगभग 1.4 अरब जनसंख्या में करीब 65 प्रतिशत युवा हैं। उन्होंने कहा, "आज युवा जाग चुका है। 2047 तक विकसित भारत का सपना केवल आर्थिक विकास का नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जागरण का भी है। आज पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है।"
उन्होंने कहा कि इस जनसांख्यिकीय शक्ति का सदुपयोग तभी संभव है जब युवाओं में आत्मजागरूकता, एकाग्रता, भावनात्मक संतुलन, सकारात्मक दृष्टिकोण और आत्मअनुशासन जैसे गुण विकसित किए जाएँ। उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल दुनिया, सूचनाओं की अधिकता, कड़ी प्रतिस्पर्धा और बदलती जीवनशैली जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए आंतरिक शक्ति अनिवार्य है।
आध्यात्मिक विरासत और आधुनिक विज्ञान का संगम
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि भारत की आध्यात्मिक विरासत — योग, ध्यान, अहिंसा, करुणा और 'वसुधैव कुटुंबकम्' का दर्शन — आज भी वैश्विक प्रेरणा का स्रोत है। उनके अनुसार, इस विरासत को आधुनिक विज्ञान, तकनीक और नवीन विचारों के साथ जोड़कर विकास का एक व्यापक और समावेशी मॉडल तैयार किया जा सकता है।
उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल की राष्ट्र निर्माण की विरासत का भी उल्लेख किया और कहा कि उनका जीवन विशेष रूप से आज के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है।
विकसित भारत की समग्र परिकल्पना
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में विकसित भारत की एक चतुर्मुखी परिकल्पना रखी — आर्थिक रूप से समृद्ध, वैज्ञानिक रूप से शक्तिशाली, सामाजिक रूप से समावेशी और आध्यात्मिक रूप से जागृत। उन्होंने कहा कि जब युवा अपने विचारों, भावनाओं और कार्यों को सकारात्मक दिशा देते हैं, तो उसका प्रभाव परिवार, कार्यस्थल, समाज और अंततः पूरे राष्ट्र तक पहुँचता है।
गौरतलब है कि यह वक्तव्य ऐसे दौर में आया है जब देशभर में युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य, रोज़गार की चुनौतियों और मूल्यों के क्षरण पर व्यापक बहस हो रही है — और राष्ट्रपति का यह संदेश नीति निर्माताओं के लिए भी एक स्पष्ट संकेत है।