भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ: PM मोदी ने स्वतंत्रता सेनानियों को किया नमन, बोले- 'साहस हमेशा रहेगा प्रेरणा'
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 अगस्त 2025 को 'भारत छोड़ो आंदोलन' की 84वीं वर्षगांठ पर उन सभी राष्ट्रनायकों और अमर स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया, जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। मोदी ने कहा कि इस ऐतिहासिक आंदोलन में भाग लेने वालों का साहस और बलिदान हर भारतीय के लिए सदा प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
प्रधानमंत्री मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'ऐतिहासिक भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने वाले सभी लोगों को याद करते हैं। उनका साहस हर भारतीय के लिए हमेशा प्रेरणा बना रहेगा।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि महात्मा गांधी के नेतृत्व में दिए गए 'भारत छोड़ो' के आह्वान ने स्वतंत्रता संग्राम में नई ऊर्जा का संचार किया और औपनिवेशिक शासन से मुक्ति पाने के भारतीयों के अटूट संकल्प को स्वर दिया।
लोकसभा अध्यक्ष की भावपूर्ण श्रद्धांजलि
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी एक्स पर पोस्ट कर उन सभी राष्ट्रनायकों और अमर सेनानियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने स्वतंत्र भारत के स्वप्न को साकार करने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने महात्मा गांधी के 'करो या मरो' के आह्वान को उस युग में करोड़ों भारतीयों के लिए साहस और संकल्प की आवाज़ बताया।
बिरला ने यह भी कहा कि इस आंदोलन में असंख्य ज्ञात-अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों ने जेल यातनाएँ सहीं, संघर्ष किया और प्राणों की आहुति दी। उनके अनुसार यह संघर्ष केवल राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए नहीं, बल्कि सत्य, अहिंसा, लोकतंत्र, समानता और राष्ट्रभक्ति जैसे मूल्यों पर आधारित भारत के निर्माण के लिए था।
केंद्रीय मंत्री नड्डा का 'अगस्त क्रांति' को नमन
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने अपने संदेश में अगस्त 1942 में शुरू हुए इस आंदोलन को स्वतंत्रता संग्राम का एक निर्णायक अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि इस 'अगस्त क्रांति' ने देशभर में नई चेतना का संचार किया और असंख्य भारतीयों को एकजुट होकर स्वाधीनता के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी।
नड्डा ने गुमनाम योद्धाओं के अदम्य साहस, त्याग और बलिदान को 'अगस्त क्रांति' की अमर गाथाओं का आधार बताते हुए कहा कि ये गाथाएँ आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा और देशभक्ति के लिए सदैव प्रेरित करती रहेंगी। उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और सभी महान स्वतंत्रता सेनानियों को सादर नमन अर्पित किया।
ऐतिहासिक महत्व और आज की प्रासंगिकता
गौरतलब है कि 8 अगस्त 1942 को मुंबई के गवालिया टैंक मैदान में महात्मा गांधी ने 'भारत छोड़ो' का ऐतिहासिक आह्वान किया था, जिसने ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी थी। यह आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का अंतिम और सबसे व्यापक जन-आंदोलन माना जाता है। स्वतंत्रता के अमृतकाल में इस वर्षगांठ पर देश के शीर्ष नेताओं का एक स्वर में श्रद्धांजलि देना उस विरासत को जीवित रखने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
आने वाले वर्षों में इस आंदोलन की स्मृति को और व्यापक रूप से जन-जन तक पहुँचाने के प्रयास जारी रहने की उम्मीद है, ताकि नई पीढ़ी उन बलिदानों से प्रेरणा ले सके जिन पर आज़ाद भारत की नींव टिकी है।