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चंद्रशेखर आजाद जयंती: PM मोदी, राजनाथ सिंह समेत देश के शीर्ष नेताओं ने किया नमन

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चंद्रशेखर आजाद जयंती: PM मोदी, राजनाथ सिंह समेत देश के शीर्ष नेताओं ने किया नमन

सारांश

चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर देश के शीर्ष नेता एकजुट हुए। PM मोदी ने एक्स पर लिखा कि आजाद का निडर साहस और देशभक्ति स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में गौरवपूर्ण स्थान रखती है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, CM योगी आदित्यनाथ सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अमर क्रांतिकारी को नमन किया।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 जुलाई को चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर एक्स पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आजाद ने हर भारतीय के मन में स्वाभिमान और राष्ट्रचेतना जगाई।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ , रेखा गुप्ता , मोहन यादव , भजनलाल शर्मा , सम्राट चौधरी , नायब सिंह सैनी ने भी नमन किया।
चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को हुआ था; उन्होंने 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में अंतिम सांस तक संघर्ष किया।
मध्य प्रदेश के CM मोहन यादव ने आजाद को 'मध्यप्रदेश की माटी का गौरव' कहा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 जुलाई को महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मोदी ने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में आजाद के निडर साहस और अटूट देशभक्ति का गौरवपूर्ण स्थान है, और उनका संकल्प पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। देशभर के वरिष्ठ नेताओं और मुख्यमंत्रियों ने भी इस अवसर पर अमर क्रांतिकारी को नमन किया।

प्रधानमंत्री मोदी की श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'चंद्रशेखर आजाद को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में उनके निडर साहस और अटूट देशभक्ति का गौरवपूर्ण स्थान है। उन्होंने अनगिनत युवा भारतीयों को देश के प्रति खुद को समर्पित करने के लिए प्रेरित किया। उनका संकल्प पीढ़ियों को प्रेरित करता रहता है।' यह ऐसे समय में आया है जब देश अपने स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने पर विशेष ज़ोर दे रहा है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का नमन

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'महान स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन। उन्होंने न सिर्फ ब्रिटिश शासन के खिलाफ आजीवन संघर्ष किया बल्कि हर भारतीय के मन में स्वाभिमान, आत्मविश्वास और राष्ट्रचेतना जगाने का भी कार्य किया।' राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि आजाद ने अपने अदम्य साहस, अटूट संकल्प और सर्वोच्च बलिदान से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को नई ऊर्जा प्रदान की और अनगिनत युवाओं के हृदय में मातृभूमि के प्रति समर्पण की ज्योति प्रज्वलित की।

केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्रियों की श्रद्धांजलि

केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आजाद को 'मां भारती के अनन्य उपासक और महान क्रांतिकारी' बताते हुए कहा कि उनकी त्याग, संघर्ष और बलिदान की अमर गाथा युगों-युगों तक राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करती रहेगी।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर आजाद की प्रसिद्ध उक्ति — 'दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे, आजाद ही रहे हैं, आजाद ही रहेंगे' — को उद्धृत करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने उन्हें 'अमर शहीद और महान क्रांतिकारी' कहते हुए नमन किया।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आजाद को 'मध्यप्रदेश की माटी का गौरव' बताया और कहा कि उनके अदम्य साहस ने स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा दी। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने उन्हें 'अदम्य साहस, अद्वितीय पराक्रम और अटूट राष्ट्रभक्ति का प्रतीक' कहा।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि आजाद ने अंतिम सांस तक 'आजाद' रहने का प्रण निभाया। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि आजाद ने युवाओं में क्रांति की अलख जगाई और अंग्रेजी हुकूमत की नींव को चुनौती दी।

चंद्रशेखर आजाद: एक अमर विरासत

गौरतलब है कि चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को हुआ था। वे हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) के प्रमुख नेता थे और भगत सिंह के साथ मिलकर ब्रिटिश साम्राज्यवाद के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व किया। 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में अंग्रेज़ों से घिरने के बाद उन्होंने स्वयं को गोली मार ली — अपना प्रण निभाते हुए कि वे कभी जीवित पकड़े नहीं जाएंगे। उनकी यह शहादत भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में सबसे प्रेरणादायी अध्यायों में से एक है।

राष्ट्रीय एकता का संदेश

विभिन्न दलों और राज्यों के नेताओं का एकसाथ आजाद को नमन करना इस बात का प्रमाण है कि स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत आज भी राष्ट्रीय एकता का आधार बनी हुई है। आने वाले समय में भी आजाद जैसे क्रांतिकारियों की जीवनगाथाएँ नई पीढ़ी को देशसेवा के लिए प्रेरित करती रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह स्मरण केवल एक्स-पोस्ट तक सीमित है या स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत को पाठ्यक्रम, सार्वजनिक संस्थाओं और युवा नीति में भी उतनी ही प्रमुखता मिल रही है। आजाद जैसे क्रांतिकारियों का योगदान अक्सर मुख्यधारा की कवरेज में नेताओं के बयानों तक सिमट जाता है, जबकि उनके वैचारिक और संगठनात्मक योगदान की गहरी पड़ताल कम होती है। राष्ट्रीय स्मृति को सोशल मीडिया की सीमाओं से परे ले जाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चंद्रशेखर आजाद की जयंती कब मनाई जाती है?
चंद्रशेखर आजाद की जयंती प्रतिवर्ष 23 जुलाई को मनाई जाती है। उनका जन्म 23 जुलाई 1906 को हुआ था और वे भारत के सबसे प्रमुख क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानियों में गिने जाते हैं।
PM मोदी ने चंद्रशेखर आजाद जयंती पर क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर लिखा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में चंद्रशेखर आजाद के निडर साहस और अटूट देशभक्ति का गौरवपूर्ण स्थान है। उन्होंने यह भी कहा कि आजाद ने अनगिनत युवा भारतीयों को देश के प्रति समर्पित होने के लिए प्रेरित किया।
चंद्रशेखर आजाद कौन थे और उनका स्वतंत्रता आंदोलन में क्या योगदान था?
चंद्रशेखर आजाद हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) के प्रमुख नेता थे जिन्होंने भगत सिंह के साथ मिलकर ब्रिटिश साम्राज्यवाद के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व किया। 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में अंग्रेज़ों से घिरने पर उन्होंने स्वयं को गोली मार ली, अपना प्रण निभाते हुए कि वे कभी जीवित नहीं पकड़े जाएंगे।
किन-किन नेताओं ने चंद्रशेखर आजाद जयंती 2025 पर श्रद्धांजलि दी?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के CM योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की CM रेखा गुप्ता, मध्य प्रदेश के CM मोहन यादव, राजस्थान के CM भजनलाल शर्मा, बिहार के CM सम्राट चौधरी और हरियाणा के CM नायब सिंह सैनी ने एक्स पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
चंद्रशेखर आजाद का मध्य प्रदेश से क्या संबंध है?
चंद्रशेखर आजाद का जन्म मध्य प्रदेश की धरती पर हुआ था, इसीलिए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उन्हें 'मध्यप्रदेश की माटी का गौरव' कहा। राज्य उन्हें अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का अभिन्न हिस्सा मानता है।
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