लोकमान्य तिलक जयंती: PM मोदी, राजनाथ सिंह, अमित शाह ने दी श्रद्धांजलि, 'स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार' की गूँज
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 23 जुलाई को लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा सहित देश के शीर्ष नेताओं ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री मोदी ने तिलक को भारत के स्वतंत्रता संग्राम का महानायक बताते हुए कहा कि उन्होंने राष्ट्रवाद की अखंड ज्योति जलाई और पीढ़ी-दर-पीढ़ी समाज सेवा की प्रेरणा दी।
प्रधानमंत्री मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार सुबह एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'लोकमान्य तिलक को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महानायक के रूप में उन्होंने राष्ट्रवाद की भावना जगाई और पीढ़ियों को समाज सेवा के लिए प्रेरित किया। हमारी संस्कृति को लोकप्रिय बनाने और भाईचारे की भावना को बढ़ाने के उनके प्रयास भी उतने ही प्रेरणादायक थे। उनकी लेखनी ने लोगों में नया आत्मविश्वास जगाया और गर्व की भावना को बढ़ावा दिया।'
राजनाथ सिंह की श्रद्धांजलि
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। उनका अमर उद्घोष, 'स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा', करोड़ों भारतीयों में स्वतंत्रता और राष्ट्रभावना की चेतना जगाने वाला मंत्र बना।' उन्होंने यह भी कहा कि तिलक का अटूट राष्ट्रप्रेम, स्वराज के प्रति दृढ़ संकल्प और स्वदेशी पर बल आने वाली पीढ़ियों को भी राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।
अमित शाह का संबोधन
केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने तिलक को स्वाधीनता संग्राम के अग्रणी नायकों में बताया, जिन्होंने युवाओं को संगठित करने के साथ-साथ स्वभाषा, स्वदेशी और स्वसंस्कृति के लिए आजीवन संघर्ष किया। शाह ने विशेष रूप से गणेश उत्सव और छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती जैसे आयोजनों के माध्यम से तिलक के राष्ट्रीय जागरण के अभूतपूर्व कार्य का उल्लेख किया। उन्होंने तिलक के कालजयी ग्रंथ 'गीता रहस्य' को आज भी कर्तव्यपथ पर अडिग रहने की प्रेरणा का स्रोत बताया।
जेपी नड्डा का नमन
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने लोकमान्य तिलक को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रखर पुरोधा और अदम्य राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि स्वदेशी आंदोलन, शिक्षा प्रसार और निरंतर सक्रियता के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना को बलवती करने में लोकमान्य तिलक की महती भूमिका रही। नड्डा के अनुसार, तिलक की राष्ट्रवादी पत्रकारिता और जनजागरण के प्रयासों ने करोड़ों भारतीयों को स्वाधीनता आंदोलन में भागीदारी के लिए प्रेरित किया।
तिलक की विरासत और आज की प्रासंगिकता
यह ऐसे समय में आया है जब देश स्वतंत्रता संग्राम के नायकों की विरासत को नए सिरे से रेखांकित कर रहा है। गौरतलब है कि बाल गंगाधर तिलक को 'लोकमान्य' की उपाधि स्वयं जनता ने दी थी और उनका नारा आज भी भारतीय राजनीतिक चेतना में जीवित है। उनके विचार, लेखन और जन-आंदोलन की रणनीति ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में आगे चले जन-आंदोलन की नींव रखी। देश के शीर्ष नेताओं द्वारा एकस्वर में दी गई यह श्रद्धांजलि इस विरासत की निरंतर राजनीतिक और सांस्कृतिक प्रासंगिकता को रेखांकित करती है।