लोकमान्य तिलक की पुण्यतिथि पर देशभर के मुख्यमंत्रियों ने दी श्रद्धांजलि, 'स्वराज मंत्र' को किया याद
सारांश
मुख्य बातें
1 अगस्त को भारतीय स्वाधीनता संग्राम के महानायक लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि पर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, गुजरात और बिहार के मुख्यमंत्रियों एवं वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। सभी ने उनके अमर उद्घोष 'स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा' को राष्ट्रीय चेतना की आत्मा बताया।
मुख्यमंत्रियों की श्रद्धांजलि
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर लिखा कि लोकमान्य का जीवन राष्ट्रभक्ति का आदर्श है और उनका 'स्वराज मंत्र' भारत की आत्मा का अमर स्वर है। उन्होंने तिलक को 'स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है' का अमर मंत्र देकर राष्ट्रचेतना को नई दिशा देने वाला महानायक बताया।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स पर अपनी श्रद्धांजलि में कहा कि तिलक ने गणेश उत्सव और छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती को राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक समरसता और जनजागरण का माध्यम बनाया। उन्होंने तिलक को 'स्वदेशी, स्वराज और राष्ट्रीय पुनर्जागरण के महान पुरोधा' की संज्ञा दी।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक्स पर लिखा कि तिलक ने 'स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है' का अमर मंत्र देकर देशवासियों में स्वतंत्रता की चेतना का संचार किया। उन्होंने तिलक को 'स्वराज के प्रबल उद्घोषक, महान स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक' बताया।
अन्य राज्यों के नेताओं का नमन
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने एक्स पर लिखा कि तिलक के 'स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है' के अमर उद्घोष ने देशवासियों में स्वतंत्रता, आत्मसम्मान और राष्ट्रभक्ति की अलख जगाई। उन्होंने तिलक को 'राष्ट्रचेतना के महान अग्रदूत' बताया।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक्स पोस्ट में कहा कि तिलक ने अपने प्रखर विचारों और लेखनी से देशवासियों में स्वाधीनता और राष्ट्रभक्ति की चेतना जागृत की। उन्होंने कहा कि 'राष्ट्र सदैव उनका ऋणी रहेगा।'
गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने एक्स पर तिलक के अमर उद्घोष को उद्धृत करते हुए उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक्स पर लिखा कि तिलक का त्याग, साहस और राष्ट्रसेवा का आदर्श सदैव प्रेरणा देता रहेगा।
तिलक की विरासत और ऐतिहासिक महत्त्व
गौरतलब है कि बाल गंगाधर तिलक को 'लोकमान्य' की उपाधि जनता ने दी थी, जिसका अर्थ है 'जनता द्वारा सम्मानित।' उन्होंने केसरी और मराठा समाचार-पत्रों के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना को जन-जन तक पहुँचाया। गणेश उत्सव को सामूहिक उत्सव के रूप में पुनर्जीवित करने का श्रेय भी उन्हीं को जाता है, जो उस काल में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध एकजुटता का प्रतीक बना।
यह ऐसे समय में स्मरणीय है जब देश 15 अगस्त की स्वतंत्रता वर्षगाँठ की तैयारियों में जुटा है — तिलक की पुण्यतिथि हर वर्ष राष्ट्रीय संकल्प के नवीनीकरण का अवसर बनती है।
आम जनता और सोशल मीडिया पर असर
कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा एक साथ एक्स पर श्रद्धांजलि देने से लोकमान्य तिलक की पुण्यतिथि सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई। नागरिकों ने भी तिलक के विचारों को साझा कर उनकी स्मृति को नमन किया। यह परंपरा हर वर्ष 1 अगस्त को राष्ट्रीय स्तर पर दोहराई जाती है।