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बाल गंगाधर तिलक पुण्यतिथि: अमित शाह, राजनाथ सिंह समेत केंद्रीय मंत्रियों ने लोकमान्य को किया नमन

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बाल गंगाधर तिलक पुण्यतिथि: अमित शाह, राजनाथ सिंह समेत केंद्रीय मंत्रियों ने लोकमान्य को किया नमन

सारांश

1 अगस्त को लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि पर गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला समेत कई केंद्रीय मंत्रियों ने एक्स पर श्रद्धांजलि दी और 'स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है' के उद्घोष को याद किया।

मुख्य बातें

1 अगस्त को लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि पर केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
गृह मंत्री अमित शाह ने तिलक को स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा देने वाला बताया और उनकी लेखनी को ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध प्रतिकार की आवाज कहा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 'केसरी' और 'मराठा' पत्रिकाओं तथा 'गीता रहस्य' के माध्यम से तिलक के योगदान को रेखांकित किया।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला , जेपी नड्डा , शिवराज सिंह चौहान , नितिन गडकरी और मनोहर लाल ने भी एक्स पर श्रद्धांजलि दी।
सभी मंत्रियों ने तिलक के अमर उद्घोष 'स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है' को राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा बताया।

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि पर 1 अगस्त को केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला सहित कई केंद्रीय मंत्रियों ने तिलक के स्वाधीनता संग्राम में योगदान और उनके राष्ट्रवादी विचारों को याद किया। सभी ने एक्स पर अपनी भावनाएँ साझा करते हुए तिलक को भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का अग्रदूत बताया।

राजनाथ सिंह की श्रद्धांजलि

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स पर लिखा, 'भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के महानायक और प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।' उन्होंने कहा कि तिलक ने अपनी 'मराठा' और 'केसरी' पत्रिकाओं के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना का संचार किया और स्वाधीनता के विचारों को जन-जन तक पहुँचाया। राजनाथ सिंह ने तिलक की कालजयी कृति 'गीता रहस्य' का उल्लेख करते हुए कहा कि इसने कर्मयोग, कर्तव्य और राष्ट्रधर्म का संदेश दिया।

अमित शाह और ओम बिड़ला का संदेश

गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर लिखा कि तिलक ने अपने ओजस्वी विचारों और अद्वितीय संगठन कौशल से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी। शाह ने कहा, 'एक ओर उन्होंने स्वराज के संकल्प के साथ युवाओं को स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़कर राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित किया, तो दूसरी ओर उनकी लेखनी अंग्रेज़ी हुकूमत के विरुद्ध प्रतिकार की सशक्त आवाज बनी।' लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने भी एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि तिलक ने 'केसरी' और 'मराठा' जैसे समाचार पत्रों के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना का प्रसार किया और सार्वजनिक गणेशोत्सव तथा शिवाजी जयंती जैसे आयोजनों से जनजागरण किया।

अन्य मंत्रियों की प्रतिक्रिया

स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने एक्स पर लिखा कि तिलक की निर्भीक राष्ट्रवादी पत्रकारिता और जनजागरण के प्रयासों ने करोड़ों भारतीयों को स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें 'पूर्ण स्वराज्य का मंत्र जागृत करने वाले महान स्वाधीनता संग्राम सेनानी' बताया। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि तिलक ने 'स्वराज से सुराज्य' का मूल मंत्र दिया, जबकि केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने उनके प्रसिद्ध उद्घोष — 'स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा' — को उद्धृत करते हुए श्रद्धांजलि दी।

लोकमान्य तिलक की विरासत

गौरतलब है कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उन अग्रणी नेताओं में थे जिन्होंने जन-जन में राष्ट्रीयता की भावना जागृत की। उन्होंने सार्वजनिक गणेश उत्सव और छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती के आयोजनों को सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना के माध्यम के रूप में प्रयोग किया। स्वदेशी आंदोलन और शिक्षा के प्रसार में उनकी भूमिका को आज भी राष्ट्रनिर्माण की प्रेरणा के रूप में स्मरण किया जाता है।

आगे की प्रासंगिकता

यह ऐसे समय में आया है जब स्वाधीनता आंदोलन के नायकों को याद करने की परंपरा राष्ट्रीय विमर्श में केंद्रीय स्थान रखती है। तिलक का जीवन-दर्शन — स्वराष्ट्र, स्वभाषा और स्वसंस्कृति के प्रति समर्पण — आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह देखना ज़रूरी है कि क्या इन स्मरणों के साथ तिलक के मूल विचारों — स्वदेशी, जन-शिक्षा और सांस्कृतिक स्वायत्तता — पर ठोस नीतिगत चर्चा भी होती है। तिलक ने 'केसरी' और 'मराठा' के ज़रिए जो निर्भीक पत्रकारिता की, वह आज की मीडिया परिस्थितियों में और भी प्रासंगिक हो जाती है। श्रद्धांजलि की भावना तब सार्थक होती है जब वह केवल सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित न रहे, बल्कि उनके विचारों को नीति और व्यवहार में उतारने की प्रेरणा दे।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि कब है?
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि 1 अगस्त को मनाई जाती है। इसी दिन 1920 में उनका निधन हुआ था और तब से प्रत्येक वर्ष इस दिन उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है।
तिलक को 'लोकमान्य' क्यों कहा जाता है?
'लोकमान्य' का अर्थ है जनता द्वारा सम्मानित। बाल गंगाधर तिलक को यह उपाधि उनके जन-जागरण, राष्ट्रवादी पत्रकारिता और स्वतंत्रता संग्राम में अतुलनीय योगदान के कारण मिली। उन्होंने 'केसरी' और 'मराठा' पत्रिकाओं के माध्यम से करोड़ों भारतीयों में राष्ट्रीय चेतना जागृत की।
तिलक का प्रसिद्ध नारा क्या था?
तिलक का अमर उद्घोष था — 'स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा।' यह नारा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक बन गया और आज भी राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा देता है।
तिलक ने स्वतंत्रता आंदोलन में क्या योगदान दिया?
तिलक ने 'केसरी' और 'मराठा' पत्रिकाओं के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना फैलाई, सार्वजनिक गणेश उत्सव और छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती को सामाजिक एकता के मंच के रूप में स्थापित किया। उनकी कृति 'गीता रहस्य' ने कर्मयोग और राष्ट्रधर्म का संदेश दिया। स्वदेशी आंदोलन और शिक्षा के प्रसार में भी उनकी महती भूमिका रही।
1 अगस्त 2025 को किन मंत्रियों ने तिलक को श्रद्धांजलि दी?
1 अगस्त को गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मनोहर लाल ने एक्स पर पोस्ट करके लोकमान्य तिलक को श्रद्धांजलि अर्पित की।
राष्ट्र प्रेस
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