बिरसा मुंडा बलिदान दिवस: PM मोदी ने एक्स पर किया नमन, बोले- 'हर पीढ़ी में राष्ट्रभक्ति का संचार करेगी उनकी गाथा'
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 जून को धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि मातृभूमि के लिए सर्वस्व त्याग करने की बिरसा मुंडा की गाथा देश की हर पीढ़ी में राष्ट्रभक्ति का संचार करती रहेगी।
प्रधानमंत्री मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर लिखा, 'धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा के बलिदान दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। उन्होंने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए विदेशी हुकूमत के विरुद्ध अदम्य साहस के साथ संघर्ष किया।' मोदी ने आगे लिखा कि बिरसा मुंडा का पूरा जीवन जनजातीय समाज के स्वाभिमान, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा को समर्पित रहा।
उपराष्ट्रपति की श्रद्धांजलि
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भी एक्स पोस्ट के ज़रिए भगवान बिरसा मुंडा को नमन किया। उन्होंने लिखा, 'भगवान बिरसा मुंडा के बलिदान दिवस पर, मैं धरती आबा को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जिनका जीवन साहस, आत्म-सम्मान और न्याय के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक था।' राधाकृष्णन ने ऐतिहासिक 'उलगुलान' आंदोलन को भी याद किया, जिसके माध्यम से बिरसा मुंडा ने दमन के विरुद्ध प्रतिरोध की भावना जगाई थी।
उपराष्ट्रपति ने यह भी उल्लेख किया कि उन्हें झारखंड के राज्यपाल के रूप में पदभार संभालने के पहले दिन और हाल ही में भारत के उपराष्ट्रपति के रूप में बिरसा मुंडा के पवित्र जन्मस्थान 'उलिहातू' पर श्रद्धांजलि अर्पित करने का अवसर मिला — जिसे उन्होंने गहरे व्यक्तिगत सम्मान की बात बताया।
भाजपा अध्यक्ष का संदेश
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी शासन के विरुद्ध बिरसा मुंडा का अदम्य साहस और आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए उनका संघर्ष भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण अध्याय रहा है। नितिन नवीन ने आगे लिखा, 'उनका जीवन हमें अपनी जड़ों, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा करते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का संदेश देता है।'
बिरसा मुंडा की विरासत
गौरतलब है कि भगवान बिरसा मुंडा ने 19वीं सदी के अंत में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन और जमींदारी व्यवस्था के विरुद्ध आदिवासी समुदायों को एकजुट किया था। उनके नेतृत्व में चले 'उलगुलान' (महाविद्रोह) ने झारखंड क्षेत्र की जनजातीय पहचान और अधिकारों की रक्षा में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। केंद्र सरकार ने उनकी जयंती 15 नवंबर को 'जनजातीय गौरव दिवस' के रूप में घोषित किया है, जो उनकी स्थायी विरासत का प्रमाण है।
आगे की दिशा
देश के शीर्ष नेताओं की इन श्रद्धांजलियों से स्पष्ट है कि जनजातीय स्वाभिमान और आदिवासी अधिकारों का विमर्श राष्ट्रीय राजनीति में केंद्रीय स्थान बनाए हुए है। बिरसा मुंडा के आदर्श — सामाजिक न्याय, सशक्तिकरण और समावेशी विकास — आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।