बिरसा मुंडा पुण्यतिथि: BJP मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों ने 'धरती आबा' को किया नमन
सारांश
मुख्य बातें
9 जून को बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं ने आदिवासी स्वाधीनता संग्राम के इस महानायक को श्रद्धांजलि अर्पित की। नेताओं ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर 'धरती आबा' के अदम्य साहस, ब्रिटिश शासन के विरुद्ध ऐतिहासिक उलगुलान और जनजातीय अस्मिता की रक्षा में उनके योगदान को याद किया।
मुख्यमंत्रियों की श्रद्धांजलि
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने एक्स पर लिखा, "आदिवासी संस्कृति, स्वाभिमान और जनजागरण के प्रतीक भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। उन्होंने अपने अदम्य साहस, संघर्षशील व्यक्तित्व और राष्ट्रभक्ति से समाज में नई चेतना का संचार किया। अन्याय और शोषण के विरुद्ध उनका जीवनभर का संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है।"
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लिखा, "धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। जनजातीय अस्मिता तथा जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध उनके नेतृत्व में हुआ ऐतिहासिक उलगुलान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का अमर अध्याय है। उनका अदम्य साहस, संघर्ष और सर्वोच्च बलिदान कृतज्ञ राष्ट्र सदैव स्मरण रखेगा।"
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी पोस्ट में लिखा, "अंग्रेजी शासन के अन्याय के विरुद्ध जनजातीय स्वाभिमान को नई ऊर्जा एवं 'उलगुलान' के अमर उद्घोष से भारत के स्वाधीनता संघर्ष को नई दिशा देने वाले 'धरती आबा' भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर शत-शत नमन। त्याग, तप और राष्ट्रनिष्ठा से आलोकित आपका जीवन भारत की अमर प्रेरणा है।"
केंद्रीय मंत्रियों के संदेश
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने लिखा, "अंग्रेजों से आदिवासी अस्मिता की लड़ाई लड़कर भगवान बिरसा मुंडा ने अपना पूरा जीवन देशहित और वनवासी भाईयों के अधिकारों तथा सशक्तिकरण के लिए समर्पित कर दिया। ऐसे महान लोकनायक के बलिदान दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।"
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने अपनी श्रद्धांजलि में कहा, "जनजातीय अस्मिता और मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व अर्पण करने वाले धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा जी को उनकी पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि। अपने अदम्य साहस और बलिदान से उन्होंने राष्ट्रीयता की चेतना को जगाया और जनजातीय समाज को अन्याय के विरुद्ध संगठित किया।"
अन्य वरिष्ठ नेताओं की प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने लिखा कि बिरसा मुंडा ने अन्याय और विदेशी शासन के विरुद्ध संघर्ष का बिगुल फूंककर आदिवासी समाज में स्वाभिमान और अधिकारों की चेतना जागृत की। उन्होंने कहा कि अल्पायु में मातृभूमि के लिए दिया गया उनका सर्वोच्च बलिदान भारतीय इतिहास में सदैव अमर रहेगा।
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी' और बिहार BJP अध्यक्ष संजय सरावगी ने भी बिरसा मुंडा के संघर्षपूर्ण जीवन और आदिवासी संस्कृति की रक्षा में उनकी भूमिका को याद किया। बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा तथा सामाजिक न्याय के लिए बिरसा मुंडा का संघर्ष आज भी प्रेरणादायक है।
बिरसा मुंडा का ऐतिहासिक महत्व
गौरतलब है कि बिरसा मुंडा ने 19वीं सदी के अंत में झारखंड क्षेत्र में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन और जमींदारी प्रथा के विरुद्ध 'उलगुलान' (महाविद्रोह) का नेतृत्व किया था। मात्र 25 वर्ष की आयु में 9 जून 1900 को उनका निधन हुआ, किंतु उनकी विरासत आज भी जनजातीय अधिकारों और स्वाभिमान की प्रेरणा बनी हुई है। केंद्र सरकार ने उनकी जयंती 15 नवंबर को 'जनजातीय गौरव दिवस' के रूप में घोषित किया है।
राजनीतिक परिप्रेक्ष्य
यह ऐसे समय में आया है जब जनजातीय मतदाताओं को साधने की राजनीतिक होड़ कई राज्यों में तेज़ है। BJP का यह सामूहिक श्रद्धांजलि अभियान दर्शाता है कि पार्टी आदिवासी पहचान और विरासत के प्रतीकों से अपने जुड़ाव को सार्वजनिक रूप से रेखांकित करने की रणनीति पर काम कर रही है।