9 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर दिल्ली में जनजातीय संस्कृतिक समागम, 550 से अधिक जनजातियों का ऐतिहासिक जमावड़ा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर दिल्ली में जनजातीय संस्कृतिक समागम, 550 से अधिक जनजातियों का ऐतिहासिक जमावड़ा

सारांश

बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर दिल्ली में जुटी 550 से अधिक जनजातियाँ — यह महज एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि आदिवासी पहचान, धर्मांतरण के खतरे और विरासत संरक्षण पर एक सशक्त राष्ट्रीय संदेश था। अर्जुन मुंडा और गणेश राम भगत ने इसे ऐतिहासिक जमावड़ा करार दिया।

मुख्य बातें

बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर नई दिल्ली में 'जनजातीय संस्कृतिक समागम' का आयोजन किया गया।
देश की 705 जनजातियों में से 550 से अधिक समुदायों के प्रतिनिधि इस कार्यक्रम में शामिल हुए।
केवल संथाल समुदाय के 2,500 से 3,000 लोग कार्यक्रम में उपस्थित रहे; अंडमान-निकोबार , नागालैंड , मेघालय और सिक्किम से भी प्रतिनिधि पहुँचे।
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने जनजातीय संस्कृति और विरासत को देश की अनोखी पहचान बताया।
'जनजाति सुरक्षा मंच' के राष्ट्रीय संयोजक गणेश राम भगत ने धर्मांतरण को जनजातीय समाज की सबसे बड़ी चुनौती करार दिया।
भाजपा नेता इंदर भगत ने इसे देश के इतिहास में जनजातीय समाज का अब तक का सबसे बड़ा एकल मंच बताया।

नई दिल्ली में आयोजित 'जनजातीय संस्कृतिक समागम' में देशभर के जनजातीय समुदायों ने 24 मई 2025 को अपनी संस्कृति, परंपरा और एकता का भव्य प्रदर्शन किया। 'धरती आबा' बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में देश की 705 जनजातियों में से 550 से अधिक समुदायों के प्रतिनिधि एकत्र हुए — जिसे भाजपा नेताओं ने देश के इतिहास में जनजातीय समाज का अब तक का सबसे बड़ा एकल मंच बताया।

मुख्य घटनाक्रम

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कार्यक्रम के संदर्भ में कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सभा को संबोधित करते हुए बिरसा मुंडा सहित अनेक आदिवासी योद्धाओं की ऐतिहासिक विरासत को श्रद्धांजलि अर्पित की। अर्जुन मुंडा के अनुसार, शाह ने आदिवासी कल्याण के लिए केंद्र सरकार द्वारा संचालित कार्यक्रमों और भविष्य के दृष्टिकोण पर भी विस्तार से चर्चा की।

अर्जुन मुंडा ने कहा, 'केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि आदिवासी समुदायों को अपनी सांस्कृतिक परंपराओं, वैचारिक जड़ों और प्राचीन विरासत को संरक्षित रखते हुए आगे बढ़ना चाहिए, जिससे भारत की आदिवासी पहचान का अनूठा स्वरूप अक्षुण्ण बना रहे।'

जनजातीय समाज की अनोखी पहचान

पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि देशभर से जनजातीय समाज का इस प्रकार एक मंच पर एकत्र होना न केवल आदिवासी समाज, बल्कि पूरे देश के लिए एक सशक्त संदेश है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज अपनी प्राचीन सभ्यता, संस्कृति और परंपराओं के कारण देश में एक विशिष्ट पहचान रखता है और यह समुदाय सदैव अपनी विरासत को जीवित रखने की परंपरा निभाता आया है।

धर्मांतरण और सामाजिक चुनौतियाँ

'जनजाति सुरक्षा मंच' के राष्ट्रीय संयोजक गणेश राम भगत ने कहा कि धर्मांतरण जनजातीय समाज के सामने एक बड़ी चुनौती बन चुका है और भगवान बिरसा मुंडा ने इसी मुद्दे के लिए अपना जीवन समर्पित किया था। उन्होंने उन प्रतिभागियों को नमन किया जो अपनी मेहनत की कमाई खर्च कर और भीषण गर्मी में दिल्ली पहुँचे।

'जनजाति सुरक्षा मंच' के सदस्य मनोहर संथाल ने बताया कि इस कार्यक्रम में अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के साथ-साथ नागालैंड, मेघालय और सिक्किम जैसे पूर्वोत्तर राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुँचे। उन्होंने बताया कि केवल संथाल समुदाय के ही करीब 2,500 से 3,000 लोग इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

सांस्कृतिक प्रदर्शन और पारंपरिक पहनावा

कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागी पारंपरिक जनजातीय वेशभूषा में नज़र आए। मनोहर संथाल ने कहा कि पारंपरिक पहनावा, खानपान और जीवनशैली ही जनजातीय समाज की असली पहचान है। यह आयोजन सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय एकता का जीवंत प्रतीक बना।

ऐतिहासिक महत्व और आगे की राह

भाजपा नेता इंदर भगत ने दावा किया कि देश के इतिहास में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में जनजातीय समाज एक मंच पर एकत्र हुआ है। गौरतलब है कि यह आयोजन ऐसे समय में हुआ जब जनजातीय अधिकार, भूमि संरक्षण और सांस्कृतिक पहचान राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में हैं। मनोहर संथाल ने कहा कि समाज के विकास और समस्याओं के समाधान के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा — यह संकल्प इस समागम की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह आयोजन नीतिगत बदलाव में तब्दील होगा। धर्मांतरण और भूमि अधिकार जैसे मुद्दे दशकों से विमर्श में हैं, फिर भी ठोस विधायी प्रगति सीमित रही है। गौरतलब है कि जनजातीय कल्याण पर सरकारी व्यय और ज़मीनी परिणामों के बीच की खाई अभी भी चिंता का विषय है। बिरसा मुंडा की विरासत को राजनीतिक मंचों पर भुनाना तब तक अधूरा है जब तक वन अधिकार, शिक्षा और स्वास्थ्य के मोर्चे पर मापनीय सुधार न दिखें।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जनजातीय संस्कृतिक समागम क्या है और यह कहाँ आयोजित हुआ?
यह नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य जनजातीय सांस्कृतिक कार्यक्रम है, जो 'धरती आबा' बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। इसमें देश की 705 जनजातियों में से 550 से अधिक समुदायों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
अर्जुन मुंडा ने इस कार्यक्रम में क्या कहा?
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि जनजातीय समाज अपनी प्राचीन सभ्यता, संस्कृति और परंपराओं के कारण देश में एक विशिष्ट पहचान रखता है। उन्होंने इस जमावड़े को पूरे देश के लिए एक सशक्त संदेश बताया।
धर्मांतरण का मुद्दा इस कार्यक्रम में क्यों उठा?
'जनजाति सुरक्षा मंच' के राष्ट्रीय संयोजक गणेश राम भगत ने कहा कि धर्मांतरण जनजातीय समाज की सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है और बिरसा मुंडा ने इसी मुद्दे के लिए अपना जीवन समर्पित किया था। यह मुद्दा जनजातीय सांस्कृतिक पहचान की रक्षा से सीधे जुड़ा माना जाता है।
इस कार्यक्रम में किन राज्यों से प्रतिनिधि आए?
मनोहर संथाल के अनुसार, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के साथ-साथ नागालैंड, मेघालय और सिक्किम जैसे पूर्वोत्तर राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुँचे। केवल संथाल समुदाय के ही करीब 2,500 से 3,000 लोग इस आयोजन में शामिल हुए।
बिरसा मुंडा कौन थे और उनकी 150वीं जयंती का क्या महत्व है?
बिरसा मुंडा एक महान आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक थे, जिन्हें 'धरती आबा' कहा जाता है। उनकी 150वीं जयंती जनजातीय अस्मिता, सांस्कृतिक संरक्षण और आदिवासी अधिकारों के प्रति पुनः संकल्प लेने का अवसर मानी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले