बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर दिल्ली में जनजातीय संस्कृतिक समागम, 550 से अधिक जनजातियों का ऐतिहासिक जमावड़ा
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में आयोजित 'जनजातीय संस्कृतिक समागम' में देशभर के जनजातीय समुदायों ने 24 मई 2025 को अपनी संस्कृति, परंपरा और एकता का भव्य प्रदर्शन किया। 'धरती आबा' बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में देश की 705 जनजातियों में से 550 से अधिक समुदायों के प्रतिनिधि एकत्र हुए — जिसे भाजपा नेताओं ने देश के इतिहास में जनजातीय समाज का अब तक का सबसे बड़ा एकल मंच बताया।
मुख्य घटनाक्रम
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कार्यक्रम के संदर्भ में कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सभा को संबोधित करते हुए बिरसा मुंडा सहित अनेक आदिवासी योद्धाओं की ऐतिहासिक विरासत को श्रद्धांजलि अर्पित की। अर्जुन मुंडा के अनुसार, शाह ने आदिवासी कल्याण के लिए केंद्र सरकार द्वारा संचालित कार्यक्रमों और भविष्य के दृष्टिकोण पर भी विस्तार से चर्चा की।
अर्जुन मुंडा ने कहा, 'केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि आदिवासी समुदायों को अपनी सांस्कृतिक परंपराओं, वैचारिक जड़ों और प्राचीन विरासत को संरक्षित रखते हुए आगे बढ़ना चाहिए, जिससे भारत की आदिवासी पहचान का अनूठा स्वरूप अक्षुण्ण बना रहे।'
जनजातीय समाज की अनोखी पहचान
पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि देशभर से जनजातीय समाज का इस प्रकार एक मंच पर एकत्र होना न केवल आदिवासी समाज, बल्कि पूरे देश के लिए एक सशक्त संदेश है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज अपनी प्राचीन सभ्यता, संस्कृति और परंपराओं के कारण देश में एक विशिष्ट पहचान रखता है और यह समुदाय सदैव अपनी विरासत को जीवित रखने की परंपरा निभाता आया है।
धर्मांतरण और सामाजिक चुनौतियाँ
'जनजाति सुरक्षा मंच' के राष्ट्रीय संयोजक गणेश राम भगत ने कहा कि धर्मांतरण जनजातीय समाज के सामने एक बड़ी चुनौती बन चुका है और भगवान बिरसा मुंडा ने इसी मुद्दे के लिए अपना जीवन समर्पित किया था। उन्होंने उन प्रतिभागियों को नमन किया जो अपनी मेहनत की कमाई खर्च कर और भीषण गर्मी में दिल्ली पहुँचे।
'जनजाति सुरक्षा मंच' के सदस्य मनोहर संथाल ने बताया कि इस कार्यक्रम में अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के साथ-साथ नागालैंड, मेघालय और सिक्किम जैसे पूर्वोत्तर राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुँचे। उन्होंने बताया कि केवल संथाल समुदाय के ही करीब 2,500 से 3,000 लोग इस कार्यक्रम में शामिल हुए।
सांस्कृतिक प्रदर्शन और पारंपरिक पहनावा
कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागी पारंपरिक जनजातीय वेशभूषा में नज़र आए। मनोहर संथाल ने कहा कि पारंपरिक पहनावा, खानपान और जीवनशैली ही जनजातीय समाज की असली पहचान है। यह आयोजन सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय एकता का जीवंत प्रतीक बना।
ऐतिहासिक महत्व और आगे की राह
भाजपा नेता इंदर भगत ने दावा किया कि देश के इतिहास में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में जनजातीय समाज एक मंच पर एकत्र हुआ है। गौरतलब है कि यह आयोजन ऐसे समय में हुआ जब जनजातीय अधिकार, भूमि संरक्षण और सांस्कृतिक पहचान राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में हैं। मनोहर संथाल ने कहा कि समाज के विकास और समस्याओं के समाधान के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा — यह संकल्प इस समागम की सबसे बड़ी उपलब्धि है।