जनजाति संस्कृति समागम: मनोज तिवारी बोले — '550 से अधिक आदिवासी समाज एकजुट, दिल्ली उनकी भी है'
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 24 मई 2026 को लाल किला मैदान पर 'जनजाति सुरक्षा मंच' द्वारा आयोजित 'जनजाति संस्कृति समागम' में देशभर के 550 से अधिक आदिवासी समाजों के प्रतिनिधि एकत्रित हुए। यह आयोजन 'धरती आबा' भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के सम्मान में किया गया, जो भारत के आदिवासी स्वाधीनता संग्राम के सबसे प्रतिष्ठित प्रतीकों में से एक हैं।
मनोज तिवारी का संबोधन
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद मनोज तिवारी इस समागम में विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने कहा, 'आज दिल्ली का लाल किला मैदान लोकतंत्र की पूर्णता का प्रतिनिधित्व कर रहा है। यह भारत के लिए एक अवसर है। मैं यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति की ओर से एक प्रतिनिधि के रूप में खड़ा हूं।'
तिवारी ने आगे कहा, 'यह हमारा सौभाग्य है। आज, भगवान बिरसा मुंडा के 150 वर्ष पूरे होने पर, दिल्ली में एक जनजातीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। अरुणाचल प्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल सहित देश के हर हिस्से से जनजातीय भाई-बहन आए हैं। वे देश की मुख्यधारा का हिस्सा हैं। दिल्ली उनकी भी है और हम उनके साथ बैठकर उनके बेहतर भविष्य की योजनाएं बनाना चाहते हैं।'
लघु भारत का नज़ारा
समागम में शामिल एक प्रतिभागी ने बताया कि भारत में लगभग 750 आदिवासी समुदाय हैं और यहाँ 550 से अधिक आदिवासी समाजों के लोग एकत्रित हुए। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में विभिन्न आदिवासी समुदायों की अनूठी संस्कृतियाँ, परंपराएँ, वेशभूषा, बोलियाँ, भाषाएँ, वाद्ययंत्र और जीवन-शैलियाँ प्रदर्शित हो रही हैं — मानो यहाँ एक 'लघु भारत' इकट्ठा हो गया हो।
एक अन्य प्रतिभागी ने कहा कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक के लोग इस आदिवासी सांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल हुए हैं और सभी 'भारत माता की जय' के एक ही संकल्प से एकजुट हैं।
महिलाओं की सक्रिय भागीदारी
समागम में महिलाओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। एक प्रतिभागी ने बताया कि उनके साथ कम से कम 50 महिलाओं की एक टीम आई है। उन्होंने अतिथियों का स्वागत मंदिर से लाए गए तिलक के साथ किया। उत्तराखंड के पारंपरिक पहनावे में आई एक महिला प्रतिभागी ने कहा, 'अतिथि देवो भव की भावना से मेहमानों की सेवा करनी चाहिए। मैंने अपने जीवन में ऐसा कार्यक्रम नहीं देखा है।'
आयोजन का उद्देश्य
एक प्रतिभागी ने स्पष्ट किया कि इस समागम का मूल उद्देश्य जनजातीय समुदायों को एकजुट करना, बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि अर्पित करना और विभिन्न क्षेत्रों व भाषाओं के लोगों के बीच संवाद स्थापित करना है। साथ ही आदिवासी समाज के क्षेत्रीय मुद्दों और माँगों को राष्ट्रीय मंच पर उठाना भी इस आयोजन का एक प्रमुख लक्ष्य है। गौरतलब है कि बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती को केंद्र सरकार ने 'जनजातीय गौरव दिवस' के रूप में मनाने की परंपरा स्थापित की है, और यह समागम उसी भावना की एक विस्तृत अभिव्यक्ति है।