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जनजातीय सांस्कृतिक समागम में सीएम विष्णुदेव साय बोले — '12 करोड़ आदिवासी, हम सभी प्रकृति के उपासक'

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जनजातीय सांस्कृतिक समागम में सीएम विष्णुदेव साय बोले — '12 करोड़ आदिवासी, हम सभी प्रकृति के उपासक'

सारांश

नई दिल्ली के लाल किले मैदान में जनजातीय सांस्कृतिक समागम में छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय ने कहा कि देश की 12 करोड़ से अधिक आदिवासी आबादी प्रकृति की उपासक है और अपनी संस्कृति व परंपराओं की रक्षा के लिए एकजुट है।

मुख्य बातें

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 24 मई 2025 को नई दिल्ली के लाल किले मैदान में जनजातीय सांस्कृतिक समागम में भाग लिया।
साय ने कहा कि भारत में 12 करोड़ से अधिक जनजातीय आबादी है और सभी प्रकृति के उपासक हैं।
उन्होंने धर्म-विरोधी तत्वों द्वारा आदिवासी परंपराओं को कमज़ोर करने के प्रयासों पर चिंता जताई।
झारखंड के पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा ने आदिवासी समाज को 'जल, जंगल और जमीन का रक्षक' बताया।
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता और केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा भी समागम में उपस्थित रहे।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 24 मई 2025 को नई दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले मैदान में आयोजित जनजातीय सांस्कृतिक समागम में भाग लिया, जहाँ देशभर से आए जनजातीय समाज के प्रतिनिधि और नेता एकजुट हुए। इस अवसर पर साय ने कहा कि भारत में 12 करोड़ से अधिक जनजातीय आबादी है और उन सभी की जड़ें प्रकृति-पूजा की साझा परंपरा में हैं।

मुख्यमंत्री साय का संबोधन

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा, 'हमारे देश में जनजातीय आबादी 12 करोड़ से भी अधिक है, और हम सभी प्रकृति के उपासक हैं। हमारी अपनी विशिष्ट रीति-रिवाज, परंपराएँ और संस्कृति है।' उन्होंने आगे कहा कि पिछले कई वर्षों से कुछ धर्म-विरोधी तत्व जनजातीय परंपराओं को तोड़ने और संस्कृति को कमज़ोर करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने इस समागम को पूरे देश के जनजातीय समाज की शक्ति और एकजुटता का प्रतीक बताया।

सर्व आदिवासी समाज प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात

दिल्ली दौरे के दौरान सीएम साय ने छत्तीसगढ़ सदन में वरिष्ठ मंत्री केदार कश्यप के नेतृत्व में आए सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधिमंडल से भी मुलाकात की। इस बैठक में जनजातीय जनकल्याण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। साय ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार आदिवासी समाज के विकास, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

अर्जुन मुंडा और अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने इस समागम को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि देशभर से आए आदिवासी समुदायों का यह विशाल जमावड़ा पूरे राष्ट्र को एक सच्चा संदेश देता है। उन्होंने कहा, 'आदिवासी समुदाय इस धरती के ऐसे सपूत हैं जिन्होंने हमेशा जल, जंगल और जमीन के अधिकारों के लिए संघर्ष किया है।'

दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि शहरी, ग्रामीण और वनवासी — सभी भारतीय हैं, और उन्होंने आयोजकों को बधाई दी। केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने भी इस आदिवासी सांस्कृतिक समागम को देश की विविधता और एकता का उत्सव बताया।

आम जनता और जनजातीय समाज पर असर

यह समागम ऐसे समय में आयोजित हुआ जब जनजातीय पहचान, भूमि अधिकार और सांस्कृतिक संरक्षण राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में हैं। 12 करोड़ से अधिक की जनजातीय आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले इस आयोजन से आदिवासी समाज में एकता और सांस्कृतिक गर्व की भावना को बल मिलने की उम्मीद है। गौरतलब है कि इस तरह के राष्ट्रीय स्तर के जनजातीय सम्मेलन सरकारी नीतियों को आदिवासी हितों के अनुरूप दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

क्या होगा आगे

इस समागम के बाद जनजातीय जनकल्याण से जुड़े मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकारों के बीच संवाद और तेज़ होने की संभावना है। मुख्यमंत्री साय का यह दिल्ली दौरा छत्तीसगढ़ में आदिवासी समाज की माँगों और अपेक्षाओं को केंद्र सरकार तक पहुँचाने के लिहाज़ से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो स्पष्ट रूप से धर्मांतरण-विरोधी विमर्श से जुड़ता है। यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में आदिवासी पहचान और धर्म को लेकर तनाव बढ़ा है। असली सवाल यह है कि क्या यह एकजुटता का उत्सव ठोस नीतिगत माँगों में तब्दील होगा, या यह केवल एक राजनीतिक रैली तक सीमित रहेगा।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जनजातीय सांस्कृतिक समागम क्या है और यह कहाँ हुआ?
जनजातीय सांस्कृतिक समागम एक राष्ट्रीय स्तर का आदिवासी एकता सम्मेलन है जो 24 मई 2025 को नई दिल्ली के लाल किले मैदान में आयोजित हुआ। इसमें देशभर के जनजातीय समाज के प्रतिनिधि शामिल हुए।
सीएम विष्णुदेव साय ने समागम में क्या कहा?
सीएम साय ने कहा कि भारत में 12 करोड़ से अधिक जनजातीय आबादी है और सभी प्रकृति के उपासक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ धर्म-विरोधी तत्व आदिवासी परंपराओं और संस्कृति को कमज़ोर करने का प्रयास कर रहे हैं, जिसके विरुद्ध यह एकजुटता आवश्यक है।
अर्जुन मुंडा ने इस अवसर पर क्या संदेश दिया?
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि आदिवासी समुदाय इस धरती के ऐसे सपूत हैं जिन्होंने जल, जंगल और जमीन के अधिकारों के लिए हमेशा संघर्ष किया है। उन्होंने इस समागम को पूरे राष्ट्र के लिए एक सच्चा संदेश बताया।
इस समागम का आदिवासी समाज के लिए क्या महत्व है?
यह समागम ऐसे समय में हुआ जब जनजातीय पहचान, भूमि अधिकार और सांस्कृतिक संरक्षण राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में हैं। 12 करोड़ से अधिक की आबादी का प्रतिनिधित्व करते हुए यह आयोजन आदिवासी समाज में एकता और सांस्कृतिक गर्व को बल देता है।
छत्तीसगढ़ सरकार आदिवासी विकास के लिए क्या कर रही है?
मुख्यमंत्री साय के अनुसार, छत्तीसगढ़ सरकार आदिवासी समाज के विकास, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। दिल्ली दौरे के दौरान उन्होंने सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधिमंडल से भी इन विषयों पर चर्चा की।
राष्ट्र प्रेस
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