क्या दिल्ली शब्दोत्सव 2026 में देवभूमि के सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा का संकल्प लिया गया?
सारांश
Key Takeaways
- धामी सरकार का देवभूमि सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा का संकल्प।
- भूमि जिहाद के खिलाफ ठोस कदम उठाए गए।
- 10 हजार एकड़ भूमि अतिक्रमण से मुक्त की गई।
- मदरसों की पाठ्यक्रम की समीक्षा की जाएगी।
- अल्पसंख्यक शिक्षा में सुधार की दिशा में कदम।
नई दिल्ली, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को ‘दिल्ली शब्दोत्सव 2026’ में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि देवभूमि की जनसांख्यिकी और संस्कृति के मूल्यों को सुरक्षित रखने के लिए उनकी सरकार प्रतिबद्ध है। पूर्व की सरकारों ने इस दिशा में ध्यान नहीं दिया, जिसके परिणामस्वरूप दूर-दराज और पर्वतीय क्षेत्रों में भूमि जिहाद का मामला उठ खड़ा हुआ।
उन्होंने इस कार्यक्रम में कहा कि भूमि जिहाद एक सुनियोजित साजिश है, जिसके अंतर्गत ‘नीली, पीली और हरी चादर चढ़ाकर’ सरकारी संपत्ति पर अनधिकृत कब्जा किया गया। हमने इसके खिलाफ नियमों के अनुसार अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया। हमने पहले से ही लोगों को चेतावनी दी थी। कुछ लोगों ने अतिक्रमण हटा लिया, जबकि कुछ स्थानों पर प्रशासन की सहायता से इसे हटवाया गया।
पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि हमने उत्तराखंड में 10 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त किया है। जनसांख्यिकी के असंतुलन और देवस्थान की छवि को धूमिल करने वालों के खिलाफ भी हमने अभियान चलाया है और वेरिफिकेशन ड्राइव भी शुरू की गई है। उत्तराखंड में 2003 के बाद परिवार रजिस्टर में कई नाम जोड़े गए हैं। हमने हाल ही में एक निर्णय लिया है कि सभी जिलों के परिवार रजिस्टर को एक स्थान पर सील किया जाएगा। उनकी जांच की जाएगी।
मदरसा बोर्ड समाप्त होने पर उन्होंने कहा कि हम अल्पसंख्यक शिक्षा में सुधार के लिए कानून लाए हैं। इस कानून में सिख, जैन, पारसी, बौद्ध और ईसाई समुदायों को भी शामिल किया गया है। अल्पसंख्यक शिक्षा में सुधार को लेकर लाए गए कानून से इन समुदायों को भी लाभ होगा।
उन्होंने कहा कि मदरसों का नाम कुछ और है, लेकिन पढ़ाई कुछ और हो रही है। बाहरी तौर पर कुछ और दिखाई देता है, लेकिन संदिग्ध लोग पकड़ में आते हैं। पहचान छुपाकर लोगों को शरण दी जाती है। यहां के लोगों को आधुनिक शिक्षा नहीं मिल रही है। हमें यह तय करना चाहिए कि एक जुलाई 2026 के बाद ऐसे मदरसे बंद कर दिए जाएं, जिनमें उत्तराखंड सरकार द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाया जाएगा। हमने 250 से अधिक अवैध मदरसों को बंद कर दिया है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि हम देवभूमि में 500 साल पुरानी कट्टरवादी मानसिकता वाली शिक्षा या कबीलाई मानसिकता को पनपने नहीं देंगे। हमने शिक्षा और ज्ञान के मंदिर स्थापित करने का निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा कि जब हमने आयुष्मान योजना शुरू की थी तो हमें अनुमान था कि इसका खर्च 100 से 200 करोड़ होगा, लेकिन यह कई सौ करोड़ तक पहुंच गया है। जब हमने इसकी समीक्षा की तो आंकड़े चौंकाने वाले निकले। एसआईआर चल रहा है, लेकिन हम अपने स्तर पर पहले से ही सत्यापन शुरू करवा चुके हैं। उन्होंने कहा कि देवभूमि को साफ और सुथरा होना चाहिए। हमारा उद्देश्य किसी को टारगेट करना नहीं है।
पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जब आप कोई कार्य करते हैं, तो आकलन करके करते हैं। मैंने देवभूमि के हित के लिए कदम उठाया है। मैं आने वाली पीढ़ियों के लिए एक साफ-सुथरा उत्तराखंड बनाना चाहता हूं। बच्चों को असुरक्षित भविष्य नहीं देना चाहता। इसलिए मुझे लगता है कि अतिक्रमण हटाने और धार्मिक आधार पर काम करने के लिए भगवान की कृपा होती है। बड़ों का आशीर्वाद भी मिलता है। हमने नियमों के अनुसार कार्य किया है।
उन्होंने बताया कि 600 से अधिक ढांचे ऐसे थे, जो सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करके बनाए गए थे। देहरादून में एक पुरानी मजार थी, लेकिन उसके नीचे कुछ भी नहीं था। ऐसे 600 स्थानों की पहचान की गई थी। ये केवल भूमि पर अतिक्रमण करने के लिए बनाए गए थे।
उन्होंने कहा कि हमारा संकल्प है कि देवभूमि के देवत्व को कोई नुकसान नहीं होने देंगे। इसके लिए जो भी आवश्यक कदम होंगे, हम उठाएंगे। हम ऐसा कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। भारत और दुनिया के लोग चाहते हैं कि देवभूमि का अस्तित्व किसी भी कीमत पर खराब न हो। अब यह हमारी जिम्मेदारी है।