क्या जनजाति समाज के लोग खुद को मुख्यधारा से अलग नहीं समझते? : किरेन रिजिजू

सारांश
Key Takeaways
- जनजाति समाज अब खुद को मुख्यधारा से अलग नहीं मानता।
- भाजपा सरकार ने आदिवासियों के विकास के लिए कई पहल की हैं।
- नरेंद्र मोदी की नीतियों से जनजातियों में खुशी है।
- सोशल मीडिया में जनजातियों को लेकर भ्रम फैलाने का प्रयास हो रहा है।
- आदिवासियों को अपने तरीके से जीने की स्वतंत्रता है।
नई दिल्ली, 31 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली में अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरि महाराज उपस्थित रहे।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मैं भाग्यशाली समझता हूँ कि भगवान बिरसा मुंडा के नामांकित भवन के उद्घाटन में शामिल होने का अवसर मिला। दिल्ली, जो कि देश की राजधानी है, यहां जनजाति समाज के किसी नेता के नाम पर बहुत कम भवन हैं। समय के साथ चिंतन में बदलाव आया है। भाजपा सरकार ने इस माहौल को बदल दिया है। आज जनजाति समाज के लोग अपने आप को मुख्यधारा से अलग नहीं मानते, क्योंकि हम ही मुख्यधारा हैं। देश सीमावर्ती इलाकों से शुरू होता है। हम जहां से आते हैं, देश वहीं से आरंभ होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने के बाद जनजाति समाज आज खुश है, उनके विकास के लिए हजारों कार्य किए गए हैं। आज इस समाज के युवा देश के लिए काम कर रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि कुछ लोग सोशल मीडिया पर अजीब माहौल बना देते हैं और एक नैरेटिव तैयार कर देते हैं। सरकार देश में संविधान के तहत समान नागरिक संहिता पर विचार कर रही है। हमने स्पष्ट रूप से कहा है कि आदिवासी क्षेत्रों में यह लागू नहीं होगा। आदिवासियों को अपने तरीके से जीने की स्वतंत्रता होगी, लेकिन आदिवासियों को आंदोलित कर सरकार के खिलाफ माहौल बनाने का प्रयास किया जा रहा है, इसे रोकना आवश्यक है। मोदी सरकार ने आदिवासियों के लिए जो किया, वह आजादी से पहले और बाद में किसी ने नहीं सोचा होगा।
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि देश में भगवान बिरसा मुंडा के नेतृत्व में धर्मांतरण के खिलाफ सबसे पहले आंदोलन हुआ था। उस समय जनजाति वर्ग के अस्तित्व को बचाने के लिए उन्होंने संघर्ष किया, जिसका परिणाम आज हमें मिल रहा है। उन्होंने अपनी जाति की गरिमा को बचाने के लिए बलिदान दिया। ब्रिटिश सरकार के समय आदिवासी समाज के लोगों को अपराधी बताकर कानून लागू किया गया था। भाजपा सरकार ने इस कानून को समाप्त किया।
आध्यात्मिक नेता महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरि महाराज ने कहा कि कांग्रेस की सरकार ने देश में मिशनरियों को बढ़ावा दिया और जनजाति संस्कृति को नष्ट कर दिया, जिसे बचाने का काम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कर रहा है। भारत का दुर्भाग्य है कि पिछली सरकार आतंकवाद और अलगाववाद को बढ़ावा देती रही। नॉर्थ ईस्ट में अरुणाचल प्रदेश ऐसा राज्य है, जहां आज भी हिंदी बोली जाती है। मोदी सरकार बनने के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास हो रहा है।
आरएसएस महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में आदिवासी जीवन के विभिन्न पहलुओं पर अनुसंधान करने के लिए बिरसा मुंडा भवन परिसर में एक केंद्र स्थापित किया जा रहा है।
होसबोले ने कहा कि वनवासी कल्याण आश्रम समिति ने जनजाति वर्ग के उत्थान में निरंतर काम किया है। देश के हर प्रांत में, जनजाति विकास में सदैव सक्रिय रहे। धारा भिन्न हो सकती है, पर स्रोत एक है, रक्त एक है। वनवासी क्षेत्र की अस्मिता रक्षा में कल्याण आश्रम समिति ने अपने लक्ष्य को सफलतापूर्वक प्राप्त किया है।
उन्होंने कहा कि देश का विकास हो और जनजाति समाज का न हो, ऐसा नहीं हो सकता। देश के विकास के लिए अगर उनके जल-जंगल-जमीन की आवश्यकता पड़ी तो उसे लेकर सरकार को पुनर्वास भी करना होगा, तभी देश आगे बढ़ सकेगा।