लाल किले पर जनजाति सांस्कृतिक समागम: अमित शाह होंगे मुख्य अतिथि, 550+ समुदायों के 1.5 लाख प्रतिनिधि जुटेंगे
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह रविवार, 25 मई 2025 को नई दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला परिसर में आयोजित जनजाति सांस्कृतिक समागम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यह विशाल आदिवासी सांस्कृतिक सम्मेलन आदिवासी नायक भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार, देश भर की 550 से अधिक जनजातीय समुदायों से लगभग 1.5 लाख प्रतिनिधियों के इस समागम में भाग लेने की उम्मीद है।
समागम का उद्देश्य और महत्व
इस सम्मेलन का आयोजन जनजाति सुरक्षा मंच द्वारा किया जा रहा है। इसका मूल उद्देश्य जनजातीय पहचान, स्वदेशी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाना है, साथ ही भारत के इतिहास और राष्ट्र-निर्माण में आदिवासी समुदायों के योगदान को सम्मानित करना है। आयोजकों का कहना है कि यह पहली बार होगा जब देश के दूरदराज के वन और पहाड़ी क्षेत्रों से इतनी बड़ी संख्या में जनजातीय प्रतिभागी किसी सांस्कृतिक आयोजन के लिए राष्ट्रीय राजधानी में एकत्रित होंगे।
गौरतलब है कि भगवान बिरसा मुंडा को भारत के सबसे सम्मानित जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों में गिना जाता है, जिन्होंने ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध एक सशक्त प्रतिरोध आंदोलन का नेतृत्व किया और आदिवासी आस्था, पहचान एवं परंपराओं की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया।
मुख्य घटनाक्रम और सांस्कृतिक कार्यक्रम
पारंपरिक वेशभूषा और वाद्ययंत्रों से सुसज्जित जनजातीय पुरुषों और महिलाओं की रंगारंग सांस्कृतिक शोभायात्राएँ दिल्ली के पाँच अलग-अलग स्थानों से प्रारंभ होकर लाल किले के मुख्य स्थल पर समाहित होंगी। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों की जनजातीय सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करते हुए लोक नृत्य, पारंपरिक संगीत, हस्तशिल्प और प्रदर्शनियाँ प्रस्तुत की जाएंगी।
इसके अतिरिक्त, खेल, शिक्षा, समाज सेवा और संस्कृति के क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली लगभग 100 विशिष्ट जनजातीय हस्तियों को सम्मानित किए जाने की भी उम्मीद है।
तैयारियाँ और प्रशासनिक व्यवस्था
समागम से पहले दिल्ली के श्याम गिरि मंदिर में एक महत्वपूर्ण तैयारी बैठक आयोजित की गई, जिसमें आयोजकों और समुदाय प्रतिनिधियों ने भागीदारी, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की। कार्यक्रम के सुचारू संचालन के लिए कई समितियों सहित लगभग 20 विभागों को तैनात किया गया है, जो आवास, परिवहन, भोजन, पेयजल, चिकित्सा सुविधाएँ, सुरक्षा और स्वच्छता जैसी व्यवस्थाओं का प्रबंधन करेंगे।
आगे की राह
यह समागम केंद्र सरकार की उस व्यापक नीतिगत दिशा का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती को राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख स्मरण वर्ष के रूप में मना रही है। आयोजकों की अपेक्षा है कि यह समागम जनजातीय एकता और सांस्कृतिक गौरव के एक नए अध्याय की शुरुआत करेगा।