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लाल किले पर जनजाति सांस्कृतिक समागम: अमित शाह होंगे मुख्य अतिथि, 550+ समुदायों के 1.5 लाख प्रतिनिधि जुटेंगे

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लाल किले पर जनजाति सांस्कृतिक समागम: अमित शाह होंगे मुख्य अतिथि, 550+ समुदायों के 1.5 लाख प्रतिनिधि जुटेंगे

सारांश

लाल किले पर इतिहास का सबसे बड़ा जनजातीय जमावड़ा — 550 से अधिक समुदायों के 1.5 लाख प्रतिनिधि, पाँच अलग-अलग स्थानों से सांस्कृतिक शोभायात्राएँ, और गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी। बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष में यह समागम आदिवासी विरासत को राष्ट्रीय पटल पर स्थापित करने का प्रयास है।

मुख्य बातें

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह रविवार को लाल किला परिसर, नई दिल्ली में जनजाति सांस्कृतिक समागम में मुख्य अतिथि होंगे।
यह आयोजन आदिवासी नायक भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में किया जा रहा है।
देश भर की 550 से अधिक जनजातीय समुदायों से लगभग 1.5 लाख प्रतिनिधियों के भाग लेने की उम्मीद है।
पारंपरिक शोभायात्राएँ दिल्ली के पाँच स्थानों से शुरू होकर लाल किले पर एकत्रित होंगी।
खेल, शिक्षा, समाज सेवा और संस्कृति में योगदान के लिए लगभग 100 जनजातीय हस्तियों को सम्मानित किया जाएगा।
कार्यक्रम का संचालन जनजाति सुरक्षा मंच द्वारा किया जा रहा है; 20 विभाग लॉजिस्टिक्स प्रबंधन में तैनात हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह रविवार, 25 मई 2025 को नई दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला परिसर में आयोजित जनजाति सांस्कृतिक समागम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यह विशाल आदिवासी सांस्कृतिक सम्मेलन आदिवासी नायक भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार, देश भर की 550 से अधिक जनजातीय समुदायों से लगभग 1.5 लाख प्रतिनिधियों के इस समागम में भाग लेने की उम्मीद है।

समागम का उद्देश्य और महत्व

इस सम्मेलन का आयोजन जनजाति सुरक्षा मंच द्वारा किया जा रहा है। इसका मूल उद्देश्य जनजातीय पहचान, स्वदेशी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाना है, साथ ही भारत के इतिहास और राष्ट्र-निर्माण में आदिवासी समुदायों के योगदान को सम्मानित करना है। आयोजकों का कहना है कि यह पहली बार होगा जब देश के दूरदराज के वन और पहाड़ी क्षेत्रों से इतनी बड़ी संख्या में जनजातीय प्रतिभागी किसी सांस्कृतिक आयोजन के लिए राष्ट्रीय राजधानी में एकत्रित होंगे।

गौरतलब है कि भगवान बिरसा मुंडा को भारत के सबसे सम्मानित जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों में गिना जाता है, जिन्होंने ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध एक सशक्त प्रतिरोध आंदोलन का नेतृत्व किया और आदिवासी आस्था, पहचान एवं परंपराओं की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया।

मुख्य घटनाक्रम और सांस्कृतिक कार्यक्रम

पारंपरिक वेशभूषा और वाद्ययंत्रों से सुसज्जित जनजातीय पुरुषों और महिलाओं की रंगारंग सांस्कृतिक शोभायात्राएँ दिल्ली के पाँच अलग-अलग स्थानों से प्रारंभ होकर लाल किले के मुख्य स्थल पर समाहित होंगी। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों की जनजातीय सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करते हुए लोक नृत्य, पारंपरिक संगीत, हस्तशिल्प और प्रदर्शनियाँ प्रस्तुत की जाएंगी।

इसके अतिरिक्त, खेल, शिक्षा, समाज सेवा और संस्कृति के क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली लगभग 100 विशिष्ट जनजातीय हस्तियों को सम्मानित किए जाने की भी उम्मीद है।

तैयारियाँ और प्रशासनिक व्यवस्था

समागम से पहले दिल्ली के श्याम गिरि मंदिर में एक महत्वपूर्ण तैयारी बैठक आयोजित की गई, जिसमें आयोजकों और समुदाय प्रतिनिधियों ने भागीदारी, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की। कार्यक्रम के सुचारू संचालन के लिए कई समितियों सहित लगभग 20 विभागों को तैनात किया गया है, जो आवास, परिवहन, भोजन, पेयजल, चिकित्सा सुविधाएँ, सुरक्षा और स्वच्छता जैसी व्यवस्थाओं का प्रबंधन करेंगे।

आगे की राह

यह समागम केंद्र सरकार की उस व्यापक नीतिगत दिशा का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती को राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख स्मरण वर्ष के रूप में मना रही है। आयोजकों की अपेक्षा है कि यह समागम जनजातीय एकता और सांस्कृतिक गौरव के एक नए अध्याय की शुरुआत करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इस पैमाने का आयोजन स्पष्ट करता है कि जनजातीय मतदाता अब केंद्र की राजनीतिक प्राथमिकता सूची में ऊपर आ गए हैं। असली प्रश्न यह है कि क्या यह सांस्कृतिक पहचान की स्वीकृति नीतिगत ठोसपन — भूमि अधिकार, वन अधिकार और आर्थिक समावेश — में भी तब्दील होती है, या यह एक भव्य प्रतीकात्मक आयोजन बनकर रह जाती है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली में जनजाति सांस्कृतिक समागम क्या है?
यह लाल किला परिसर, नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य आदिवासी सांस्कृतिक सम्मेलन है, जिसका आयोजन जनजाति सुरक्षा मंच द्वारा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में किया जा रहा है। इसमें देश भर की 550 से अधिक जनजातीय समुदायों के लगभग 1.5 लाख प्रतिनिधियों के भाग लेने की उम्मीद है।
इस समागम में अमित शाह की क्या भूमिका है?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस समागम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। उनकी उपस्थिति इस आयोजन को केंद्र सरकार की जनजातीय समुदायों के प्रति नीतिगत प्रतिबद्धता के रूप में प्रस्तुत करती है।
भगवान बिरसा मुंडा कौन थे और उनकी 150वीं जयंती क्यों महत्वपूर्ण है?
भगवान बिरसा मुंडा भारत के सबसे सम्मानित जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों में से एक हैं, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध एक सशक्त प्रतिरोध आंदोलन का नेतृत्व किया। उनकी 150वीं जयंती वर्ष को राष्ट्रीय स्तर पर आदिवासी विरासत और योगदान के स्मरण का अवसर माना जा रहा है।
इस समागम में क्या-क्या कार्यक्रम होंगे?
समागम में जनजातीय लोक नृत्य, पारंपरिक संगीत, हस्तशिल्प प्रदर्शनियाँ और पाँच स्थानों से शुरू होकर लाल किले पर एकत्रित होने वाली सांस्कृतिक शोभायात्राएँ शामिल हैं। इसके साथ ही खेल, शिक्षा, समाज सेवा और संस्कृति के क्षेत्रों में योगदान देने वाली लगभग 100 जनजातीय हस्तियों को सम्मानित किया जाएगा।
इस समागम की व्यवस्था कैसे की गई है?
कार्यक्रम के सुचारू संचालन के लिए लगभग 20 विभाग तैनात किए गए हैं, जो आवास, परिवहन, भोजन, पेयजल, चिकित्सा सुविधाएँ, सुरक्षा और स्वच्छता का प्रबंधन करेंगे। इससे पहले श्याम गिरि मंदिर, दिल्ली में एक विस्तृत तैयारी बैठक भी आयोजित की गई थी।
राष्ट्र प्रेस
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