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यूसीसी से वनवासी समाज पर कोई पाबंदी नहीं: अमित शाह का जनजाति समागम में बड़ा ऐलान

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यूसीसी से वनवासी समाज पर कोई पाबंदी नहीं: अमित शाह का जनजाति समागम में बड़ा ऐलान

सारांश

यूसीसी पर सबसे बड़ा सवाल — क्या आदिवासी समाज इसके दायरे में आएगा — का जवाब अमित शाह ने लाल किला मैदान से दे दिया। वनवासी समाज को पूरी तरह बाहर रखने का यह ऐलान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के मंच से आया, जो इसे महज़ राजनीतिक नहीं, सांस्कृतिक घोषणा भी बनाता है।

मुख्य बातें

गृह मंत्री अमित शाह ने 24 मई 2026 को घोषित किया कि यूसीसी की कोई भी पाबंदी वनवासी समाज पर लागू नहीं होगी।
जनजातीय कल्याण बजट कांग्रेस काल के ₹28,000 करोड़ से बढ़ाकर मोदी सरकार में ₹1 लाख 50 हजार करोड़ किया गया।
कार्यक्रम 'धरती आबा' बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में लाल किला मैदान, नई दिल्ली में आयोजित हुआ।
पेसा सेल के माध्यम से आदिवासी समाज तक उनकी भाषा में पेसा अधिनियम 1996 की जानकारी पहुँचाई जा रही है।
शाह ने मध्य प्रदेश के पेसा कानून को आदर्श मॉडल बताया; भाजपा शासित सभी राज्यों में इसे लागू करने की बात कही।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 24 मई 2026 को नई दिल्ली के लाल किला मैदान में आयोजित 'जनजाति संस्कृति समागम' में स्पष्ट किया कि यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) की कोई भी पाबंदी वनवासी समाज पर लागू नहीं होगी और जनजातीय अधिकारों का किसी भी स्थिति में अतिक्रमण नहीं किया जाएगा। यह कार्यक्रम 'धरती आबा' बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में जनजाति सुरक्षा मंच और वनवासी कल्याण आश्रम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था, जिसमें देशभर से बड़ी संख्या में जनजातीय समाज के लोग उपस्थित हुए।

यूसीसी और जनजातीय अधिकार

गृह मंत्री अमित शाह ने यूसीसी को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए कहा कि वनवासी समाज की परंपराओं, रीति-रिवाजों और अधिकारों को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज अलग-अलग आस्थाओं के साथ जीवन जीता है और भारतीय संस्कृति हमेशा सबको जोड़ने का संदेश देती रही है। यह ऐलान ऐसे समय में आया है जब यूसीसी के दायरे को लेकर जनजातीय समुदायों में व्यापक चर्चा चल रही थी।

जनजातीय कल्याण बजट में ऐतिहासिक वृद्धि

शाह ने केंद्र सरकार की उपलब्धियाँ गिनाते हुए कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान जनजातीय कल्याण का बजट मात्र ₹28,000 करोड़ था, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बढ़ाकर ₹1 लाख 50 हजार करोड़ तक पहुँचाया गया है। यह वृद्धि लगभग पाँच गुना से अधिक है और जनजातीय विकास के प्रति केंद्र सरकार की प्राथमिकता को रेखांकित करती है।

पेसा कानून और सशक्तिकरण

गृह मंत्री ने पेसा (PESA) कानून और पेसा सेल की चर्चा करते हुए बताया कि इस विशेष प्रशासनिक प्रभाग के माध्यम से आदिवासी समाज तक उनकी अपनी भाषा में कानूनी जानकारी पहुँचाई जा रही है। पेसा सेल पंचायती राज मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत है और इसका उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को सशक्त बनाना तथा पेसा अधिनियम 1996 को प्रभावी रूप से लागू करना है। उन्होंने मध्य प्रदेश के पेसा कानून को आदर्श मॉडल बताते हुए कहा कि भाजपा शासित सभी राज्य इसे आगे बढ़ा रहे हैं।

बिरसा मुंडा की विरासत और सांस्कृतिक संदेश

शाह ने कहा कि यदि दुनिया में सबसे अधिक टिकाऊ और सस्टेनेबल जीवन मॉडल किसी ने विकसित किया है, तो वह भारत के जनजातीय समाज ने किया है। उन्होंने भगवान राम और शबरी तथा निषाद राज के उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में वनवासी समाज का सम्मान सदा से रहा है। गृह मंत्री ने यह भी कहा कि संचार सुविधाओं के अभाव के बावजूद बिरसा मुंडा ने देशभर की जनजातियों तक यह संदेश पहुँचाया था कि यह देश उनका है और उनके जंगलों पर कोई कब्जा नहीं कर सकता।

धर्म परिवर्तन पर कड़ा रुख

शाह ने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि हर व्यक्ति को अपने मूल धर्म में समान अधिकार के साथ जीने का अधिकार दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लालच या दबाव डालकर किसी का जबरन धर्म परिवर्तन नहीं कराया जा सकता। इस समागम को उन्होंने आने वाले वर्षों में जनजातीय समाज के 'महाकुंभ' के रूप में याद किए जाने की उम्मीद जताई। आगे चलकर यह कार्यक्रम भारत की संस्कृति, भूमि और धर्म की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाएगा, ऐसा उनका मानना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो 'छूट' की सीमा और कानूनी बाध्यता कितनी होगी, यह अस्पष्ट है। जनजातीय कल्याण बजट में पाँच गुना वृद्धि का आँकड़ा प्रभावशाली है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर वन अधिकार, विस्थापन और शिक्षा जैसे मुद्दों पर जनजातीय समुदायों की शिकायतें कम नहीं हुई हैं। मंच और संदेश मज़बूत हैं — जवाबदेही की कसौटी क्रियान्वयन में होगी।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूसीसी का वनवासी समाज पर क्या असर होगा?
गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार यूसीसी की कोई भी पाबंदी वनवासी समाज पर लागू नहीं होगी और जनजातीय अधिकारों का अतिक्रमण नहीं किया जाएगा। यह ऐलान 24 मई 2026 को नई दिल्ली के लाल किला मैदान में जनजाति संस्कृति समागम के दौरान किया गया।
जनजाति संस्कृति समागम क्या है और यह क्यों आयोजित हुआ?
यह कार्यक्रम 'धरती आबा' बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में जनजाति सुरक्षा मंच और वनवासी कल्याण आश्रम के तत्वावधान में नई दिल्ली के लाल किला मैदान में आयोजित किया गया। इसमें देशभर से जनजातीय समाज के लोग शामिल हुए और संस्कृति, परंपरा व अधिकारों पर विमर्श हुआ।
मोदी सरकार ने जनजातीय कल्याण बजट कितना बढ़ाया है?
अमित शाह के अनुसार कांग्रेस शासन में जनजातीय कल्याण बजट ₹28,000 करोड़ था, जिसे मोदी सरकार ने बढ़ाकर ₹1 लाख 50 हजार करोड़ कर दिया है। यह लगभग पाँच गुना से अधिक की वृद्धि है।
पेसा कानून और पेसा सेल क्या है?
पेसा (PESA) अधिनियम 1996 अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को स्वशासन का अधिकार देता है। पेसा सेल पंचायती राज मंत्रालय के अंतर्गत एक विशेष प्रशासनिक प्रभाग है जो आदिवासी समाज तक उनकी भाषा में इस कानून की जानकारी पहुँचाता है। अमित शाह ने मध्य प्रदेश के पेसा मॉडल को अन्य भाजपा शासित राज्यों के लिए आदर्श बताया।
बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती का क्या महत्व है?
बिरसा मुंडा एक प्रमुख आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्हें 'धरती आबा' कहा जाता है। उन्होंने संचार सुविधाओं के अभाव के बावजूद देशभर की जनजातियों को एकजुट कर यह संदेश दिया था कि जल, जंगल और ज़मीन पर उनका अधिकार है। उनकी 150वीं जयंती वर्ष को राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न कार्यक्रमों के साथ मनाया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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