बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती: लाल किला मैदान में 500+ जनजातीय समुदायों का महासमागम, अमित शाह ने यूसीसी पर भ्रम किया दूर
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली के लाल किला मैदान में 24 मई 2026 को आयोजित 'जनजातीय सांस्कृतिक समागम' में देशभर के 500 से अधिक जनजातीय समुदायों के प्रतिनिधि एकत्र हुए और बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती को भव्य रूप से मनाया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस अवसर पर स्पष्ट किया कि जनजातीय समाज को यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) के दायरे में नहीं लाया जाएगा।
समागम का स्वरूप और भागीदारी
भाजपा सांसद मनोज तिवारी के अनुसार, कार्यक्रम में अनुमानित एक लाख लोगों के आने की उम्मीद थी, लेकिन वास्तविक उपस्थिति लगभग दोगुनी रही। पारंपरिक वेशभूषा में सजे प्रतिभागियों ने ढोल-नगाड़ों के साथ नृत्य-गायन कर अपनी सांस्कृतिक विविधता का प्रदर्शन किया। वनवासी कल्याण आश्रम और जनजाति सुरक्षा मंच जैसे संगठनों ने आयोजन में अहम भूमिका निभाई।
भाजपा सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा, 'यह सच है कि दिल्ली में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में आदिवासियों का जमावड़ा हुआ है।' उन्होंने बताया कि देशभर में मौजूद करीब 740 आदिवासी समुदायों में से कई के प्रतिनिधियों ने इस समागम में हिस्सा लिया।
यूसीसी पर अमित शाह का स्पष्टीकरण
दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि जनजातीय समाज के बीच यह भ्रम फैलाया जा रहा था कि यूसीसी लागू होने के बाद उनके अधिकार और परंपराएं समाप्त हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन में साफ कर दिया कि जनजातीय समाज की अपनी परंपराएं और कानून हैं, इसलिए उन्हें यूसीसी से अलग रखा गया है।
मनोज तिवारी ने भी कहा कि शाह के भाषण के बाद यूसीसी को लेकर फैला बड़ा भ्रम दूर हो गया। यह ऐसे समय में आया है जब कई विपक्षी दल और जनजातीय संगठन यूसीसी के संभावित प्रभाव को लेकर आशंकाएं जता रहे थे।
धर्मांतरण पर तीखी आवाज़
केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गा दास उइके ने कहा कि इस समागम से एक बड़ा संदेश गया है — जो लोग धर्मांतरण कर चुके हैं और जो दूसरों का धर्म परिवर्तन करा रहे हैं, उन्हें जनजातीय सूची से बाहर किया जाना चाहिए। मनोज तिवारी ने भी कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य यह संदेश देना है कि अब जनजातीय समाज धर्मांतरण के जाल में नहीं फंसेगा।
नेताओं की प्रतिक्रिया
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि लाल किला मैदान में आज पूरे भारत की सांस्कृतिक झलक देखने को मिली और यह 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' का बेहतरीन उदाहरण बना। भाजपा सांसद कमलजीत सहरावत ने कहा कि जब पारंपरिक वेशभूषा में लोग ढोल-नगाड़ों के साथ नाचते-गाते नजर आए तो ऐसा लगा जैसे पूरा भारत एक जगह इकट्ठा हो गया हो।
आगे क्या
गौरतलब है कि बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर इस तरह के राष्ट्रीय स्तर के आयोजन को जनजातीय राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। यूसीसी पर स्पष्टीकरण और धर्मांतरण विरोधी संदेश के साथ, आने वाले समय में जनजातीय समुदायों की राजनीतिक और सामाजिक भागीदारी का स्वरूप और अधिक मुखर होने की संभावना है।