24 अगस्त 2026
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बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती: लाल किला मैदान में 500+ जनजातीय समुदायों का महासमागम, अमित शाह ने यूसीसी पर भ्रम किया दूर

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बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती: लाल किला मैदान में 500+ जनजातीय समुदायों का महासमागम, अमित शाह ने यूसीसी पर भ्रम किया दूर

सारांश

बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर दिल्ली में हुआ यह महासमागम महज एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं था — यह जनजातीय राजनीति का एक सुविचारित संदेश था। अमित शाह का यूसीसी स्पष्टीकरण और धर्मांतरण विरोधी आह्वान मिलकर एक ऐसी रणनीति की झलक देते हैं जो आदिवासी मतदाताओं को सीधे संबोधित करती है।

मुख्य बातें

बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर 24 मई 2026 को दिल्ली के लाल किला मैदान में 'जनजातीय सांस्कृतिक समागम' आयोजित हुआ।
देशभर के 500 से अधिक जनजातीय समुदायों के प्रतिनिधि शामिल हुए; अनुमानित उपस्थिति एक लाख से लगभग दोगुनी रही।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि जनजातीय समाज को यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) के दायरे में नहीं लाया जाएगा।
केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गा दास उइके ने धर्मांतरण कर चुके लोगों को जनजातीय सूची से बाहर करने की माँग उठाई।
वनवासी कल्याण आश्रम और जनजाति सुरक्षा मंच ने आयोजन में प्रमुख भूमिका निभाई।

नई दिल्ली के लाल किला मैदान में 24 मई 2026 को आयोजित 'जनजातीय सांस्कृतिक समागम' में देशभर के 500 से अधिक जनजातीय समुदायों के प्रतिनिधि एकत्र हुए और बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती को भव्य रूप से मनाया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस अवसर पर स्पष्ट किया कि जनजातीय समाज को यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) के दायरे में नहीं लाया जाएगा।

समागम का स्वरूप और भागीदारी

भाजपा सांसद मनोज तिवारी के अनुसार, कार्यक्रम में अनुमानित एक लाख लोगों के आने की उम्मीद थी, लेकिन वास्तविक उपस्थिति लगभग दोगुनी रही। पारंपरिक वेशभूषा में सजे प्रतिभागियों ने ढोल-नगाड़ों के साथ नृत्य-गायन कर अपनी सांस्कृतिक विविधता का प्रदर्शन किया। वनवासी कल्याण आश्रम और जनजाति सुरक्षा मंच जैसे संगठनों ने आयोजन में अहम भूमिका निभाई।

भाजपा सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा, 'यह सच है कि दिल्ली में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में आदिवासियों का जमावड़ा हुआ है।' उन्होंने बताया कि देशभर में मौजूद करीब 740 आदिवासी समुदायों में से कई के प्रतिनिधियों ने इस समागम में हिस्सा लिया।

यूसीसी पर अमित शाह का स्पष्टीकरण

दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि जनजातीय समाज के बीच यह भ्रम फैलाया जा रहा था कि यूसीसी लागू होने के बाद उनके अधिकार और परंपराएं समाप्त हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन में साफ कर दिया कि जनजातीय समाज की अपनी परंपराएं और कानून हैं, इसलिए उन्हें यूसीसी से अलग रखा गया है।

मनोज तिवारी ने भी कहा कि शाह के भाषण के बाद यूसीसी को लेकर फैला बड़ा भ्रम दूर हो गया। यह ऐसे समय में आया है जब कई विपक्षी दल और जनजातीय संगठन यूसीसी के संभावित प्रभाव को लेकर आशंकाएं जता रहे थे।

धर्मांतरण पर तीखी आवाज़

केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गा दास उइके ने कहा कि इस समागम से एक बड़ा संदेश गया है — जो लोग धर्मांतरण कर चुके हैं और जो दूसरों का धर्म परिवर्तन करा रहे हैं, उन्हें जनजातीय सूची से बाहर किया जाना चाहिए। मनोज तिवारी ने भी कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य यह संदेश देना है कि अब जनजातीय समाज धर्मांतरण के जाल में नहीं फंसेगा।

नेताओं की प्रतिक्रिया

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि लाल किला मैदान में आज पूरे भारत की सांस्कृतिक झलक देखने को मिली और यह 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' का बेहतरीन उदाहरण बना। भाजपा सांसद कमलजीत सहरावत ने कहा कि जब पारंपरिक वेशभूषा में लोग ढोल-नगाड़ों के साथ नाचते-गाते नजर आए तो ऐसा लगा जैसे पूरा भारत एक जगह इकट्ठा हो गया हो।

आगे क्या

गौरतलब है कि बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर इस तरह के राष्ट्रीय स्तर के आयोजन को जनजातीय राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। यूसीसी पर स्पष्टीकरण और धर्मांतरण विरोधी संदेश के साथ, आने वाले समय में जनजातीय समुदायों की राजनीतिक और सामाजिक भागीदारी का स्वरूप और अधिक मुखर होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

धर्मांतरित व्यक्तियों को जनजातीय सूची से बाहर करने की माँग कानूनी और संवैधानिक जटिलताएं उठाती है, जिन पर मंच से कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं दिया गया। असली परीक्षा यह होगी कि क्या ये घोषणाएं ठोस नीतिगत कदमों में बदलती हैं, या यह भी उन भव्य आयोजनों की सूची में जुड़ जाता है जो सुर्खियाँ तो बनाते हैं पर ज़मीनी बदलाव नहीं लाते।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर दिल्ली में क्या हुआ?
24 मई 2026 को दिल्ली के लाल किला मैदान में 'जनजातीय सांस्कृतिक समागम' आयोजित हुआ, जिसमें देशभर के 500 से अधिक जनजातीय समुदायों के प्रतिनिधि शामिल हुए। अनुमानित एक लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया और पारंपरिक नृत्य-संगीत के साथ बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि दी।
अमित शाह ने यूसीसी और जनजातीय समाज पर क्या कहा?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि जनजातीय समाज को यूनिफॉर्म सिविल कोड के दायरे में नहीं लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की अपनी परंपराएं और कानून हैं, इसलिए उन्हें यूसीसी से अलग रखा गया है।
इस समागम में धर्मांतरण का मुद्दा क्यों उठा?
केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गा दास उइके और भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि इस कार्यक्रम का एक प्रमुख उद्देश्य जनजातीय समाज को धर्मांतरण के विरुद्ध एकजुट करना था। उइके ने माँग की कि धर्मांतरण कर चुके लोगों को जनजातीय सूची से बाहर किया जाए।
इस आयोजन में कितने जनजातीय समुदायों ने भाग लिया?
भाजपा सांसद मनोज तिवारी के अनुसार 550 से अधिक जनजातीय समुदायों के प्रतिनिधि दिल्ली पहुंचे, जबकि फग्गन सिंह कुलस्ते ने बताया कि देश के करीब 740 आदिवासी समुदायों में से कई के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। वनवासी कल्याण आश्रम और जनजाति सुरक्षा मंच ने आयोजन में प्रमुख भूमिका निभाई।
जनजातीय समाज के लिए यूसीसी से छूट का क्या महत्व है?
जनजातीय समुदायों की विशिष्ट परंपरागत विधियाँ और रीति-रिवाज हैं जो सामान्य नागरिक कानूनों से भिन्न हैं। यूसीसी से छूट का अर्थ है कि इन समुदायों के विवाह, उत्तराधिकार और संपत्ति संबंधी परंपरागत कानून यथावत बने रहेंगे, जिससे उनकी सांस्कृतिक और कानूनी स्वायत्तता सुरक्षित रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
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