शहीद उधम सिंह के 87वें बलिदान दिवस पर PM मोदी ने किया नमन, बोले— 'हर पीढ़ी को प्रेरित करती रहेगी उनकी जीवनगाथा'
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 जुलाई 2026 को महान क्रांतिकारी शहीद उधम सिंह के 87वें बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। मोदी ने कहा कि हिम्मत और हौसले से भरी उनकी जीवनगाथा देश की हर पीढ़ी को मातृभूमि के स्वाभिमान की रक्षा के लिए प्रेरित करती रहेगी।
PM मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'महान क्रांतिकारी शहीद उधम सिंह को उनके बलिदान दिवस पर सादर नमन। हिम्मत और हौसले से भरी उनकी जीवनगाथा देश की हर पीढ़ी को मातृभूमि के स्वाभिमान की रक्षा के लिए प्रेरित करती रहेगी।'
इसके साथ ही मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् भी साझा किया— 'न जातु शौर्यं पुरुषस्य भानुरस्तं गतो भवति कदापि शश्वत्। यथा पुनस्तपति दिवाकरोऽयं तथा पुनर्विक्रमते स वीरः॥' — जिसका अर्थ है कि वीर पुरुष का शौर्य रूपी सूर्य कभी स्थायी रूप से अस्त नहीं होता; जैसे सूर्य पुनः उदय होकर तपता है, वैसे ही वीर पुरुष हर परिस्थिति के बाद अपने पराक्रम से विजय प्राप्त करता है।
लोकसभा अध्यक्ष का नमन
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी एक्स पर पोस्ट कर सरदार उधम सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने लिखा, 'महान क्रांतिकारी, शहीद सरदार उधम सिंह जी के बलिदान दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों के अनुरूप एक सशक्त, समरस, न्यायपूर्ण और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण हमारा प्रण है। उनका बलिदान और देशभक्ति सदैव प्रेरित करती रहेगी।'
उधम सिंह का जीवन और संघर्ष
26 दिसंबर 1899 को पंजाब में जन्मे उधम सिंह गदर पार्टी और हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिक एसोसिएशन से जुड़े थे। उन्होंने अमृतसर के जलियांवाला बाग हत्याकांड का प्रतिशोध लेने की ठान ली थी, जिसमें सैकड़ों निर्दोष भारतीय मारे गए थे। 13 मार्च 1940 को उन्होंने लंदन में ब्रिटिश पंजाब के पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर माइकल ओ'डायर को गोली मारकर उस नरसंहार का बदला लिया।
गौरतलब है कि माइकल ओ'डायर जलियांवाला बाग हत्याकांड के समय पंजाब का गवर्नर था और वहाँ दमनकारी नीतियों का प्रमुख समर्थक था। गिरफ्तारी के बाद उधम सिंह ने कहा था कि यह जलियांवाला बाग के निर्दोष शहीदों के लिए न्याय था।
बलिदान और विरासत
31 जुलाई 1940 को लंदन की पेंटनविल जेल में मात्र 40 वर्ष की आयु में उधम सिंह को फाँसी दे दी गई। 1974 में उनके पार्थिव अवशेष भारत लाए गए। यह ऐसे समय में आया जब देश उनके अदम्य साहस और राष्ट्रभक्ति को याद करते हुए उनकी विरासत को नई पीढ़ियों तक पहुँचाने का संकल्प दोहरा रहा है।