31 जुलाई 2026
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शहीद उधम सिंह के 87वें बलिदान दिवस पर PM मोदी ने किया नमन, बोले— 'हर पीढ़ी को प्रेरित करती रहेगी उनकी जीवनगाथा'

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शहीद उधम सिंह के 87वें बलिदान दिवस पर PM मोदी ने किया नमन, बोले— 'हर पीढ़ी को प्रेरित करती रहेगी उनकी जीवनगाथा'

सारांश

31 जुलाई को शहीद उधम सिंह के 87वें बलिदान दिवस पर PM मोदी ने एक्स पर संस्कृत सुभाषितम् के साथ नमन किया। उधम सिंह ने 1940 में जलियांवाला बाग नरसंहार का बदला लेते हुए माइकल ओ'डायर को गोली मारी थी और उसी वर्ष फाँसी पर चढ़ गए थे।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 31 जुलाई 2026 को शहीद उधम सिंह के 87वें बलिदान दिवस पर एक्स के ज़रिये श्रद्धांजलि दी।
मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया, जो वीर पुरुष के अजेय शौर्य का संदेश देता है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी एक्स पर उधम सिंह को 'कोटि-कोटि नमन' अर्पित किया।
उधम सिंह ने 13 मार्च 1940 को लंदन में माइकल ओ'डायर को गोली मारकर जलियांवाला बाग हत्याकांड का प्रतिशोध लिया था।
31 जुलाई 1940 को पेंटनविल जेल, लंदन में 40 वर्ष की आयु में फाँसी; 1974 में पार्थिव अवशेष भारत लाए गए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 जुलाई 2026 को महान क्रांतिकारी शहीद उधम सिंह के 87वें बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। मोदी ने कहा कि हिम्मत और हौसले से भरी उनकी जीवनगाथा देश की हर पीढ़ी को मातृभूमि के स्वाभिमान की रक्षा के लिए प्रेरित करती रहेगी।

PM मोदी का संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'महान क्रांतिकारी शहीद उधम सिंह को उनके बलिदान दिवस पर सादर नमन। हिम्मत और हौसले से भरी उनकी जीवनगाथा देश की हर पीढ़ी को मातृभूमि के स्वाभिमान की रक्षा के लिए प्रेरित करती रहेगी।'

इसके साथ ही मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् भी साझा किया— 'न जातु शौर्यं पुरुषस्य भानुरस्तं गतो भवति कदापि शश्वत्। यथा पुनस्तपति दिवाकरोऽयं तथा पुनर्विक्रमते स वीरः॥' — जिसका अर्थ है कि वीर पुरुष का शौर्य रूपी सूर्य कभी स्थायी रूप से अस्त नहीं होता; जैसे सूर्य पुनः उदय होकर तपता है, वैसे ही वीर पुरुष हर परिस्थिति के बाद अपने पराक्रम से विजय प्राप्त करता है।

लोकसभा अध्यक्ष का नमन

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी एक्स पर पोस्ट कर सरदार उधम सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने लिखा, 'महान क्रांतिकारी, शहीद सरदार उधम सिंह जी के बलिदान दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों के अनुरूप एक सशक्त, समरस, न्यायपूर्ण और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण हमारा प्रण है। उनका बलिदान और देशभक्ति सदैव प्रेरित करती रहेगी।'

उधम सिंह का जीवन और संघर्ष

26 दिसंबर 1899 को पंजाब में जन्मे उधम सिंह गदर पार्टी और हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिक एसोसिएशन से जुड़े थे। उन्होंने अमृतसर के जलियांवाला बाग हत्याकांड का प्रतिशोध लेने की ठान ली थी, जिसमें सैकड़ों निर्दोष भारतीय मारे गए थे। 13 मार्च 1940 को उन्होंने लंदन में ब्रिटिश पंजाब के पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर माइकल ओ'डायर को गोली मारकर उस नरसंहार का बदला लिया।

गौरतलब है कि माइकल ओ'डायर जलियांवाला बाग हत्याकांड के समय पंजाब का गवर्नर था और वहाँ दमनकारी नीतियों का प्रमुख समर्थक था। गिरफ्तारी के बाद उधम सिंह ने कहा था कि यह जलियांवाला बाग के निर्दोष शहीदों के लिए न्याय था।

बलिदान और विरासत

31 जुलाई 1940 को लंदन की पेंटनविल जेल में मात्र 40 वर्ष की आयु में उधम सिंह को फाँसी दे दी गई। 1974 में उनके पार्थिव अवशेष भारत लाए गए। यह ऐसे समय में आया जब देश उनके अदम्य साहस और राष्ट्रभक्ति को याद करते हुए उनकी विरासत को नई पीढ़ियों तक पहुँचाने का संकल्प दोहरा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि जलियांवाला बाग जैसी ऐतिहासिक घटनाओं की स्मृति को पाठ्यक्रम और सार्वजनिक संस्थाओं में कितनी गहराई से संजोया जा रहा है। उधम सिंह का बलिदान केवल व्यक्तिगत प्रतिशोध नहीं था — वह औपनिवेशिक जवाबदेही की माँग थी, जिसे ब्रिटेन ने आज तक औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया। एक्स पर संस्कृत श्लोक और भावपूर्ण पोस्ट स्वागतयोग्य हैं, किंतु उधम सिंह की विरासत तब सार्थक होगी जब उनके संघर्ष की गहराई को नई पीढ़ी तक ठोस शैक्षणिक पहल के ज़रिये पहुँचाया जाए।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शहीद उधम सिंह का बलिदान दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
31 जुलाई को शहीद उधम सिंह का बलिदान दिवस मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन 1940 में लंदन की पेंटनविल जेल में उन्हें फाँसी दी गई थी। उन्होंने जलियांवाला बाग नरसंहार का बदला लेने के लिए माइकल ओ'डायर को गोली मारी थी।
उधम सिंह ने माइकल ओ'डायर को क्यों मारा था?
माइकल ओ'डायर जलियांवाला बाग हत्याकांड (1919) के समय पंजाब का लेफ्टिनेंट गवर्नर था और वहाँ दमनकारी नीतियों का प्रमुख समर्थक था। 13 मार्च 1940 को लंदन में उधम सिंह ने उसे गोली मारकर उन निर्दोष शहीदों के लिए न्याय लिया, जो उस नरसंहार में मारे गए थे।
PM मोदी ने उधम सिंह को कैसे श्रद्धांजलि दी?
PM मोदी ने 31 जुलाई 2026 को एक्स पर पोस्ट कर उधम सिंह को 'सादर नमन' अर्पित किया और एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया, जो वीर पुरुष के अजेय शौर्य का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि उनकी जीवनगाथा हर पीढ़ी को मातृभूमि के स्वाभिमान की रक्षा के लिए प्रेरित करती रहेगी।
उधम सिंह का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
उधम सिंह का जन्म 26 दिसंबर 1899 को पंजाब में हुआ था। वे गदर पार्टी और हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिक एसोसिएशन से जुड़े थे और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख क्रांतिकारियों में गिने जाते हैं।
उधम सिंह के पार्थिव अवशेष भारत कब लाए गए?
31 जुलाई 1940 को लंदन में फाँसी के बाद उधम सिंह के पार्थिव अवशेष 1974 में भारत लाए गए। 2026 में उनका 87वाँ बलिदान दिवस मनाया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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