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इमाम हुसैन की शहादत पर PM मोदी का नमन — 'सत्य और साहस की अमर प्रेरणा'

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इमाम हुसैन की शहादत पर PM मोदी का नमन — 'सत्य और साहस की अमर प्रेरणा'

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर हजरत इमाम हुसैन की शहादत को नमन करते हुए उनकी कुर्बानी को सत्य, न्याय और साहस का अमर संदेश बताया — एक ऐसा संदेश जो 680 ईस्वी की कर्बला से आज भी पूरी मानवता को अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देता है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 26 जून 2025 को एक्स पर हजरत इमाम हुसैन की शहादत को नमन किया।
मोदी ने इमाम हुसैन को सत्य, न्याय, साहस और अटूट विश्वास का प्रतीक बताया।
इमाम हुसैन ने 61 हिजरी (680 ईस्वी) में कर्बला के मैदान में अत्याचारी शासक यजीद की सत्ता ठुकराकर शहादत स्वीकार की थी।
उन्होंने अपने परिवार और 72 साथियों के साथ तीन दिन भूखे-प्यासे रहकर संघर्ष किया।
PM का यह संदेश बहुलतावादी भारत में सामाजिक सौहार्द की परंपरा को रेखांकित करता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 जून 2025 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर हजरत इमाम हुसैन की शहादत को नमन किया और उन्हें सत्य, न्याय, साहस तथा अटूट विश्वास का प्रतीक बताया। मोदी ने लिखा कि इमाम हुसैन की कुर्बानी आज भी करोड़ों लोगों को सच्चाई और इंसाफ के रास्ते पर डटे रहने की प्रेरणा देती है।

PM मोदी का संदेश

अपनी पोस्ट में प्रधानमंत्री ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन का बलिदान अनगिनत लोगों को सत्य और न्याय की राह पर अडिग रहने की शक्ति देता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इमाम हुसैन की शहादत साहस, दृढ़ संकल्प और अटूट विश्वास की अमर स्मृति है — जो केवल किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए प्रासंगिक है।

कर्बला की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

हजरत इमाम हुसैन पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब के नवासे और हजरत अलीहजरत फातिमा के छोटे पुत्र थे। 61 हिजरी यानी 680 ईस्वी में कर्बला के मैदान में उन्होंने सत्य, न्याय और इंसानियत की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। इस्लाम के इतिहास में उनका स्थान सर्वाधिक सम्मानित माना जाता है।

अन्याय के सामने अडिग रहने की मिसाल

इतिहास के अनुसार, इमाम हुसैन ने अत्याचारी शासक यजीद की सत्ता को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया था। इसके बाद कर्बला के युद्ध में उन्होंने अपने परिवार और 72 वफादार साथियों के साथ तीन दिन तक भूखे-प्यासे रहकर संघर्ष किया और शहादत स्वीकार की, परंतु अन्याय के समक्ष कभी सिर नहीं झुकाया।

सार्वभौमिक संदेश

यह शहादत आज भी इस्लाम में अत्याचार के विरुद्ध खड़े होने का सबसे बड़ा प्रतीक मानी जाती है। गौरतलब है कि हजरत इमाम हुसैन का बलिदान केवल मुस्लिम समुदाय तक सीमित नहीं — सदियों बाद भी यह दुनिया भर के लोगों को अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने और सच्चाई के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है। प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश सामाजिक सौहार्द और बहुलतावादी भारत की उस परंपरा को रेखांकित करता है जिसमें हर धर्म के महापुरुषों का सम्मान राष्ट्रीय चरित्र का हिस्सा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और उसे रेखांकित करना एक सकारात्मक कदम है; परंतु असली कसौटी यह है कि नीतिगत स्तर पर अल्पसंख्यक समुदायों के साथ व्यवहार इस भावना के अनुरूप हो।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने हजरत इमाम हुसैन को नमन क्यों किया?
प्रधानमंत्री मोदी ने हजरत इमाम हुसैन की शहादत के अवसर पर एक्स पर पोस्ट कर उन्हें सत्य, न्याय और साहस का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन की कुर्बानी आज भी करोड़ों लोगों को सच्चाई के रास्ते पर डटे रहने की प्रेरणा देती है।
हजरत इमाम हुसैन कौन थे?
हजरत इमाम हुसैन पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब के नवासे और हजरत अली व हजरत फातिमा के छोटे पुत्र थे। 61 हिजरी (680 ईस्वी) में कर्बला के मैदान में उन्होंने अत्याचारी शासक यजीद की सत्ता अस्वीकार कर शहादत स्वीकार की थी।
कर्बला की लड़ाई में क्या हुआ था?
कर्बला के युद्ध में इमाम हुसैन ने अपने परिवार और 72 वफादार साथियों के साथ तीन दिन तक भूखे-प्यासे रहकर संघर्ष किया। उन्होंने अन्याय के सामने सिर झुकाने से इनकार किया और शहादत स्वीकार कर ली।
इमाम हुसैन की शहादत का क्या महत्व है?
इमाम हुसैन की शहादत इस्लाम में अत्याचार के विरुद्ध खड़े होने का सबसे बड़ा प्रतीक मानी जाती है। यह संदेश केवल मुस्लिम समुदाय तक सीमित नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए सत्य और न्याय की रक्षा का अमर उदाहरण है।
PM मोदी ने यह संदेश कहाँ दिया?
प्रधानमंत्री मोदी ने 26 जून 2025 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर यह पोस्ट किया। इसमें उन्होंने हजरत इमाम हुसैन की कुर्बानी को सत्य, साहस और दृढ़ संकल्प की अमर विरासत बताया।
राष्ट्र प्रेस
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