वनडे वर्ल्ड कप फॉर्मेट विवाद: स्कॉटलैंड और नीदरलैंड्स ने ICC के एकतरफा बदलाव को बताया एसोसिएट क्रिकेट के लिए खतरा
सारांश
मुख्य बातें
क्रिकेट स्कॉटलैंड और रॉयल डच क्रिकेट एसोसिएशन (KNCB) ने 10 अगस्त 2026 को एक संयुक्त बयान जारी कर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) द्वारा मेंस वनडे वर्ल्ड कप की क्वालिफिकेशन प्रणाली और टूर्नामेंट ढाँचे में किए गए एकतरफा बदलावों पर कड़ी आपत्ति जताई है। दोनों बोर्डों का कहना है कि ये बदलाव एसोसिएट सदस्य देशों के लिए एक बड़ा झटका हैं और वैश्विक क्रिकेट के विस्तार की दिशा में वर्षों की मेहनत को कमज़ोर कर सकते हैं।
क्या बदला है फॉर्मेट में
मूल योजना के अनुसार, वनडे वर्ल्ड कप में 14 टीमें भाग लेतीं, जिन्हें सात-सात टीमों के दो ग्रुप में बाँटा जाना था और उसके बाद सुपर सिक्स स्टेज होना था। अब ICC ने इस ढाँचे में 'सुपर सीरीज' और 'सुपर 7' फेज जोड़ दिए हैं।
नई संरचना के तहत, क्वालीफाई करने वाली सबसे निचली तीन टीमें (12वीं, 13वीं और 14वीं रैंक) पहले एक अलग राउंड-रॉबिन सुपर सीरीज में खेलेंगी। इनमें से केवल विजेता टीम ही टॉप 11 टीमों के साथ दो मुख्य ग्रुप (छह-छह टीमें) में शामिल हो सकेगी। इसके बाद, प्रत्येक ग्रुप की टॉप तीन और अगली सर्वश्रेष्ठ टीम मिलकर सात टीमों के सुपर 7 राउंड-रॉबिन में जाएंगी, जहाँ से चार सेमीफाइनलिस्ट तय होंगे।
दोनों बोर्डों की मुख्य आपत्तियाँ
संयुक्त बयान में कहा गया, 'क्रिकेट स्कॉटलैंड और KNCB, ICC के उस हालिया फैसले से बहुत निराश हैं, जिसमें टूर्नामेंट शुरू होने में 18 महीने से भी कम समय बचे होने के बावजूद वनडे वर्ल्ड कप क्वालिफिकेशन प्रक्रिया और फॉर्मेट में बड़े संरचनात्मक बदलाव किए गए हैं।' दोनों बोर्डों का तर्क है कि ऐसे समय में जब क्रिकेट नए दर्शकों तक पहुँचना चाहता है और अंतर्राष्ट्रीय खेलों में अपनी स्थिति मज़बूत करना चाहता है, उभरते देशों के लिए सार्थक अवसर कम करना 'पूरी तरह से गलत संदेश' देता है।
गौरतलब है कि इन बदलावों की घोषणा जुलाई में एडिनबर्ग में हुई ICC की सालाना कॉन्फ्रेंस के लगभग एक महीने बाद की गई। एक एसोसिएट देश के अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि एडिनबर्ग बैठक के दौरान किसी भी सदस्य देश को इन बदलावों की कोई पूर्व जानकारी नहीं दी गई थी।
पारदर्शिता और प्रशासन पर सवाल
दोनों बोर्डों ने ICC की प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि बदलावों की घोषणा के बाद ICC के साथ दो आधिकारिक बैठकें हुईं, लेकिन दोनों में कोई औपचारिक लिखित प्रस्ताव या स्पष्टीकरण नहीं मिला। बयान में कहा गया, 'दूसरी बैठक के दो सप्ताह से अधिक समय बाद भी ICC की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, जो उठाए गए मुद्दों की गंभीरता को देखते हुए निराशाजनक और अनादरपूर्ण है।'
दोनों बोर्डों ने ICC से माँग की है कि भविष्य में एसोसिएट सदस्यों को प्रभावित करने वाले फैसलों में उन्हें पर्याप्त समय और सार्थक भागीदारी दी जाए। उन्होंने फुल सदस्यों के साथ होने वाली द्विपक्षीय योजना बैठकों में शामिल किए जाने का निमंत्रण भी माँगा है।
परिचालन और वित्तीय दबाव
दोनों बोर्डों ने बताया कि सदस्य देश और उनके खिलाड़ी वर्ल्ड कप की तैयारी में वर्षों की मेहनत लगाते हैं और उनकी योजनाएँ क्वालिफिकेशन ढाँचे की स्थिरता पर आधारित होती हैं। बीच में किए गए ये बदलाव पहले से ही सीमित संसाधनों पर काम करने वाले संगठनों पर अतिरिक्त परिचालन और वित्तीय बोझ डालते हैं और उनकी दीर्घकालिक योजनाओं को बाधित करते हैं।
ICC से खुली बातचीत की अपील
संयुक्त बयान में दोनों बोर्डों ने याद दिलाया कि वर्ल्ड कप ऐतिहासिक रूप से एसोसिएट देशों द्वारा मैदान पर किए गए बड़े उलटफेरों के कारण यादगार बना है। उन्होंने कहा, 'वर्ल्ड कप में खेलने का मौका एसोसिएट सदस्यों को निवेश बढ़ाने, खिलाड़ियों को प्रेरित करने और कमर्शियल व सरकारी समर्थन पाने का एक अनूठा अवसर देता है।' दोनों बोर्डों ने ICC से अपील की है कि वह एसोसिएट सदस्यों की माँगों पर पुनर्विचार करे और सभी सदस्यों के साथ खुलकर बातचीत का वादा करे। ICC की ओर से अब तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।