10 अगस्त 2026
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वनडे वर्ल्ड कप फॉर्मेट विवाद: स्कॉटलैंड और नीदरलैंड्स ने ICC के एकतरफा बदलाव को बताया एसोसिएट क्रिकेट के लिए खतरा

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वनडे वर्ल्ड कप फॉर्मेट विवाद: स्कॉटलैंड और नीदरलैंड्स ने ICC के एकतरफा बदलाव को बताया एसोसिएट क्रिकेट के लिए खतरा

सारांश

ICC ने वनडे वर्ल्ड कप में सुपर सीरीज और सुपर 7 फेज जोड़कर एसोसिएट देशों के लिए मुख्य टूर्नामेंट में पहुँचने के रास्ते संकरे कर दिए हैं — और वो भी टूर्नामेंट से महज 18 महीने पहले, बिना किसी पूर्व सलाह-मशविरे के। स्कॉटलैंड और नीदरलैंड्स का यह विरोध ICC के प्रशासन और वैश्विक क्रिकेट के भविष्य पर बड़े सवाल खड़े करता है।

मुख्य बातें

क्रिकेट स्कॉटलैंड और KNCB (नीदरलैंड्स) ने 10 अगस्त 2026 को ICC के वनडे वर्ल्ड कप फॉर्मेट बदलावों पर संयुक्त आपत्ति दर्ज कराई।
ICC ने मूल 14-टीम, दो ग्रुप, सुपर सिक्स ढाँचे में सुपर सीरीज और सुपर 7 फेज जोड़े, जिससे एसोसिएट देशों के लिए मुख्य ग्रुप स्टेज तक पहुँचना और कठिन हो गया।
बदलावों की घोषणा जुलाई में एडिनबर्ग कॉन्फ्रेंस के बाद हुई, जबकि बैठक के दौरान किसी सदस्य को कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी।
दोनों बोर्डों ने ICC के साथ दो बैठकें कीं, लेकिन दो सप्ताह बाद भी कोई लिखित प्रतिक्रिया नहीं मिली।
टूर्नामेंट शुरू होने में 18 महीने से भी कम समय बचा है; दोनों बोर्डों ने ICC से खुली बातचीत और एसोसिएट सदस्यों की भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की है।

क्रिकेट स्कॉटलैंड और रॉयल डच क्रिकेट एसोसिएशन (KNCB) ने 10 अगस्त 2026 को एक संयुक्त बयान जारी कर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) द्वारा मेंस वनडे वर्ल्ड कप की क्वालिफिकेशन प्रणाली और टूर्नामेंट ढाँचे में किए गए एकतरफा बदलावों पर कड़ी आपत्ति जताई है। दोनों बोर्डों का कहना है कि ये बदलाव एसोसिएट सदस्य देशों के लिए एक बड़ा झटका हैं और वैश्विक क्रिकेट के विस्तार की दिशा में वर्षों की मेहनत को कमज़ोर कर सकते हैं।

क्या बदला है फॉर्मेट में

मूल योजना के अनुसार, वनडे वर्ल्ड कप में 14 टीमें भाग लेतीं, जिन्हें सात-सात टीमों के दो ग्रुप में बाँटा जाना था और उसके बाद सुपर सिक्स स्टेज होना था। अब ICC ने इस ढाँचे में 'सुपर सीरीज' और 'सुपर 7' फेज जोड़ दिए हैं।

नई संरचना के तहत, क्वालीफाई करने वाली सबसे निचली तीन टीमें (12वीं, 13वीं और 14वीं रैंक) पहले एक अलग राउंड-रॉबिन सुपर सीरीज में खेलेंगी। इनमें से केवल विजेता टीम ही टॉप 11 टीमों के साथ दो मुख्य ग्रुप (छह-छह टीमें) में शामिल हो सकेगी। इसके बाद, प्रत्येक ग्रुप की टॉप तीन और अगली सर्वश्रेष्ठ टीम मिलकर सात टीमों के सुपर 7 राउंड-रॉबिन में जाएंगी, जहाँ से चार सेमीफाइनलिस्ट तय होंगे।

दोनों बोर्डों की मुख्य आपत्तियाँ

संयुक्त बयान में कहा गया, 'क्रिकेट स्कॉटलैंड और KNCB, ICC के उस हालिया फैसले से बहुत निराश हैं, जिसमें टूर्नामेंट शुरू होने में 18 महीने से भी कम समय बचे होने के बावजूद वनडे वर्ल्ड कप क्वालिफिकेशन प्रक्रिया और फॉर्मेट में बड़े संरचनात्मक बदलाव किए गए हैं।' दोनों बोर्डों का तर्क है कि ऐसे समय में जब क्रिकेट नए दर्शकों तक पहुँचना चाहता है और अंतर्राष्ट्रीय खेलों में अपनी स्थिति मज़बूत करना चाहता है, उभरते देशों के लिए सार्थक अवसर कम करना 'पूरी तरह से गलत संदेश' देता है।

गौरतलब है कि इन बदलावों की घोषणा जुलाई में एडिनबर्ग में हुई ICC की सालाना कॉन्फ्रेंस के लगभग एक महीने बाद की गई। एक एसोसिएट देश के अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि एडिनबर्ग बैठक के दौरान किसी भी सदस्य देश को इन बदलावों की कोई पूर्व जानकारी नहीं दी गई थी।

पारदर्शिता और प्रशासन पर सवाल

दोनों बोर्डों ने ICC की प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि बदलावों की घोषणा के बाद ICC के साथ दो आधिकारिक बैठकें हुईं, लेकिन दोनों में कोई औपचारिक लिखित प्रस्ताव या स्पष्टीकरण नहीं मिला। बयान में कहा गया, 'दूसरी बैठक के दो सप्ताह से अधिक समय बाद भी ICC की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, जो उठाए गए मुद्दों की गंभीरता को देखते हुए निराशाजनक और अनादरपूर्ण है।'

दोनों बोर्डों ने ICC से माँग की है कि भविष्य में एसोसिएट सदस्यों को प्रभावित करने वाले फैसलों में उन्हें पर्याप्त समय और सार्थक भागीदारी दी जाए। उन्होंने फुल सदस्यों के साथ होने वाली द्विपक्षीय योजना बैठकों में शामिल किए जाने का निमंत्रण भी माँगा है।

परिचालन और वित्तीय दबाव

दोनों बोर्डों ने बताया कि सदस्य देश और उनके खिलाड़ी वर्ल्ड कप की तैयारी में वर्षों की मेहनत लगाते हैं और उनकी योजनाएँ क्वालिफिकेशन ढाँचे की स्थिरता पर आधारित होती हैं। बीच में किए गए ये बदलाव पहले से ही सीमित संसाधनों पर काम करने वाले संगठनों पर अतिरिक्त परिचालन और वित्तीय बोझ डालते हैं और उनकी दीर्घकालिक योजनाओं को बाधित करते हैं।

ICC से खुली बातचीत की अपील

संयुक्त बयान में दोनों बोर्डों ने याद दिलाया कि वर्ल्ड कप ऐतिहासिक रूप से एसोसिएट देशों द्वारा मैदान पर किए गए बड़े उलटफेरों के कारण यादगार बना है। उन्होंने कहा, 'वर्ल्ड कप में खेलने का मौका एसोसिएट सदस्यों को निवेश बढ़ाने, खिलाड़ियों को प्रेरित करने और कमर्शियल व सरकारी समर्थन पाने का एक अनूठा अवसर देता है।' दोनों बोर्डों ने ICC से अपील की है कि वह एसोसिएट सदस्यों की माँगों पर पुनर्विचार करे और सभी सदस्यों के साथ खुलकर बातचीत का वादा करे। ICC की ओर से अब तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो क्या वह सिर्फ बड़े बाज़ारों की ओर इशारा करता है? 18 महीने पहले बिना सलाह-मशविरे के ढाँचा बदलना न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि यह उन एसोसिएट देशों के साथ विश्वासघात भी है जो सीमित संसाधनों के बावजूद वर्षों की योजना बनाकर तैयारी करते हैं। स्कॉटलैंड और नीदरलैंड्स का यह विरोध अकेला नहीं है — यह उस व्यापक असंतोष की आवाज़ है जो एसोसिएट जगत में लंबे समय से सुलग रही है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ICC ने वनडे वर्ल्ड कप फॉर्मेट में क्या बदलाव किए हैं?
ICC ने मूल 14-टीम, दो ग्रुप और सुपर सिक्स ढाँचे में 'सुपर सीरीज' और 'सुपर 7' फेज जोड़ दिए हैं। अब 12वीं, 13वीं और 14वीं रैंक की टीमें पहले सुपर सीरीज में आपस में खेलेंगी और केवल विजेता टीम ही मुख्य ग्रुप स्टेज में पहुँच सकेगी, जिससे एसोसिएट देशों के लिए अवसर सीमित हो गए हैं।
स्कॉटलैंड और नीदरलैंड्स ने ICC पर क्या आरोप लगाए हैं?
दोनों बोर्डों ने आरोप लगाया है कि ICC ने जुलाई में एडिनबर्ग कॉन्फ्रेंस के दौरान किसी को भी इन बदलावों की जानकारी नहीं दी और बाद में एकतरफा घोषणा कर दी। उन्होंने ICC की पारदर्शिता और प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं और बताया कि दो आधिकारिक बैठकों के बाद भी दो सप्ताह से कोई लिखित प्रतिक्रिया नहीं मिली।
इन बदलावों से एसोसिएट देशों पर क्या असर पड़ेगा?
नए फॉर्मेट में एसोसिएट देशों को मुख्य ग्रुप स्टेज तक पहुँचने के लिए एक अतिरिक्त बाधा पार करनी होगी। इससे उनके परिचालन और वित्तीय बोझ में वृद्धि होगी, दीर्घकालिक योजनाएँ बाधित होंगी और वर्षों की तैयारी अनिश्चितता में पड़ जाएगी।
यह विवाद क्यों महत्वपूर्ण है?
टूर्नामेंट से 18 महीने से भी कम समय पहले बिना सलाह-मशविरे के किए गए ये बदलाव ICC के 'वैश्विक क्रिकेट विस्तार' के दावों पर सवाल खड़े करते हैं। एसोसिएट देश वर्ल्ड कप में खेलने के आधार पर निवेश, स्पॉन्सरशिप और सरकारी समर्थन की योजना बनाते हैं, इसलिए बीच में बदलाव उनके पूरे ढाँचे को प्रभावित करता है।
दोनों बोर्डों ने ICC से क्या माँग की है?
क्रिकेट स्कॉटलैंड और KNCB ने ICC से माँग की है कि एसोसिएट सदस्यों की चिंताओं पर पुनर्विचार किया जाए, भविष्य में ऐसे फैसलों से पहले सार्थक परामर्श किया जाए और फुल सदस्यों के साथ होने वाली द्विपक्षीय योजना बैठकों में एसोसिएट सदस्यों को भी शामिल किया जाए।
राष्ट्र प्रेस
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