ब्यास-सतलुज नदियों पर बाढ़ सुरक्षा: पंजाब ने ₹32.09 करोड़ के 12 काम पूरे किए, मंत्री गोयल ने विधानसभा को दी जानकारी
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब के जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने 10 अगस्त 2026 को पंजाब विधानसभा में बताया कि राज्य सरकार ने ब्यास और सतलुज नदियों के संवेदनशील तटीय इलाकों में बाढ़ सुरक्षा ढाँचे को सुदृढ़ करने के लिए ठोस और तकनीकी रूप से सुव्यवस्थित कदम उठाए हैं। इन प्रयासों के तहत राज्य निधि से ₹32.09 करोड़ के बाढ़ सुरक्षा कार्य चिह्नित स्थानों पर पूरे किए जा चुके हैं।
मुख्य घटनाक्रम
मंत्री गोयल ने सदस्य राणा इंदर प्रताप सिंह और विधायक रजनीश कुमार दहिया के 'ध्यान आकर्षण नोटिस' के जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने संवेदनशील स्थानों की पहचान, प्राथमिकता निर्धारण और सुदृढ़ीकरण के लिए एक व्यवस्थित एवं तकनीकी दृष्टिकोण अपनाया है।
विभाग ने सबसे पहले संबंधित ड्रेनेज डिवीजनों से विस्तृत सर्वेक्षण करवाए। इसके बाद सुपरिटेंडिंग इंजीनियरों की समिति ने स्थलीय निरीक्षण कर संवेदनशील जगहों की पहचान की और तकनीकी उपाय सुझाए। तत्पश्चात् चीफ इंजीनियरों की उच्च-स्तरीय समिति ने इन स्थानों का पुनः निरीक्षण किया, प्राथमिकताओं को अंतिम रूप दिया और उचित बाढ़ सुरक्षा कार्यों की सिफारिश की।
पूरे किए गए प्रमुख कार्य
गोयल के अनुसार, स्वीकृत 13 कार्यों में से 12 पूरे हो चुके हैं और एक कार्य प्रगति पर है। पूर्ण किए गए कार्यों में शामिल हैं:
कपूरथला जिले के अमृतपुर राजेवाल गांव में आत्मा सिंह एडवांस बांध नंबर एक के डाउनस्ट्रीम में स्टड, रेवेटमेंट और स्पर निर्माण कर नदी कटाव रोकने के उपाय किए गए हैं। ब्यास नदी के किनारे आरडी 1,17,000 से आरडी 1,52,000 के बीच बाढ़ जोखिम न्यूनीकरण कार्य तथा वेस्ट बेइन के दोनों तटों पर सुरक्षात्मक कार्य भी पूरे कर लिए गए हैं।
कपूरथला और जालंधर जिलों में गिद्दरपिंडी एक्सटेंशन रिवर एज क्षेत्र में सतलुज नदी के तट पर बाढ़ जोखिम कम करने के कार्य भी संपन्न हुए हैं। इसके अतिरिक्त, 2025 की बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुए एडवांस बांध नंबर दो और सुज्जो कालिया एडवांस बांध की मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य भी पूरा कर लिया गया है।
सरकार की प्राथमिकताएँ
मंत्री ने रेखांकित किया कि इन सभी कार्यों में गाँवों की सुरक्षा, कृषि भूमि की रक्षा और जान-माल के नुकसान की रोकथाम को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब पंजाब के नदी-तटीय जिले हर मानसून में बाढ़ के गंभीर खतरे का सामना करते हैं।
आगे की राह
गौरतलब है कि 2025 की बाढ़ ने राज्य के कई बाढ़ सुरक्षा ढाँचों को क्षति पहुँचाई थी, जिससे इस वर्ष के पुनर्निर्माण और सुदृढ़ीकरण कार्यों की तात्कालिकता और बढ़ गई थी। राज्य सरकार की यह पहल आने वाले मानसून सत्रों में बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।