भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ: राज्यसभा ने स्वतंत्रता सेनानियों को दी श्रद्धांजलि
सारांश
मुख्य बातें
राज्यसभा में शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 को भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ के अवसर पर देश के स्वतंत्रता सेनानियों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने सदन की कार्यवाही आरंभ होते ही इस ऐतिहासिक दिवस का उल्लेख किया और सभी सदस्यों से उन वीरों को नमन करने का आह्वान किया जिन्होंने मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।
ऐतिहासिक महत्व और पृष्ठभूमि
सभापति राधाकृष्णन ने अपने संबोधन में कहा कि अगस्त 1942 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में आरंभ हुआ 'भारत छोड़ो आंदोलन' भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक ऐतिहासिक और निर्णायक अध्याय था, जिसने देश की आज़ादी की लड़ाई को नई दिशा और अभूतपूर्व गति प्रदान की। उन्होंने रेखांकित किया कि यह आंदोलन ब्रिटिश शासन के विरुद्ध जन-जागरण का सबसे प्रभावशाली जन-आंदोलन बनकर उभरा।
गांधीजी का 'करो या मरो' का आह्वान
सभापति ने कहा कि महात्मा गांधी के 'करो या मरो' के ऐतिहासिक आह्वान ने देशभर के लाखों भारतीयों को जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र की समस्त सीमाओं से ऊपर उठकर स्वतंत्रता के साझे लक्ष्य के लिए एकजुट होने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश शासन के कठोर दमन, गिरफ्तारियों और असंख्य कठिनाइयों के बावजूद स्वतंत्रता सेनानियों ने अद्वितीय साहस, अटूट संकल्प और राष्ट्र के प्रति असीम समर्पण का परिचय दिया।
सदन की श्रद्धांजलि और मौन
सभापति के संबोधन के पश्चात सदन के सभी सदस्य अपने स्थान पर खड़े हुए और स्वतंत्रता संग्राम के अमर बलिदानियों की स्मृति में कुछ क्षणों का मौन रखा। यह भावपूर्ण क्षण इस बात का प्रतीक था कि संसद उन वीरों की विरासत को जीवित रखने के प्रति सचेत और प्रतिबद्ध है।
आदर्शों की प्रासंगिकता आज भी
सभापति राधाकृष्णन ने कहा कि भारत छोड़ो आंदोलन की वर्षगांठ केवल इतिहास के पन्ने पलटने का अवसर नहीं है, बल्कि उन महान सेनानियों के आदर्शों को आत्मसात करने का समय है। उन्होंने जोड़ा कि देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता, त्याग और राष्ट्रसेवा के वे मूल्य आज भी एक सशक्त, समृद्ध और समावेशी भारत के निर्माण की राह में प्रेरणास्रोत हैं। गौरतलब है कि स्वतंत्रता सेनानियों के निस्वार्थ बलिदान ने राष्ट्रीय आंदोलन को मज़बूती दी और अंततः 1947 में भारत की स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त किया।