80वें स्वतंत्रता दिवस पर उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन का आह्वान: 'विकसित भारत 2047' के लिए नए सिरे से संकल्प लें
सारांश
मुख्य बातें
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने 15 अगस्त 2026 को देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर देशवासियों से 'विकसित भारत 2047' के संकल्प को नए सिरे से दोहराने की अपील की। उन्होंने अपने विशेष लेख 'फ्रॉम द फ्रीडम दैट वाज वॉन टू द भारत वी बिल्ड' में देश की आजादी के लिए प्राण न्योछावर करने वाले ज्ञात और अज्ञात सभी स्वतंत्रता सेनानियों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।
एकता का संदेश: कश्मीर से तमिलनाडु तक
उपराष्ट्रपति ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में लिखा, "आजादी की लड़ाई लड़ने वाले, चाहे वे उत्तर में कश्मीर से हों या दक्षिण में तमिलनाडु से, पश्चिम में गुजरात से हों या पूर्व में असम से, सभी क्षेत्रों, पृष्ठभूमियों, उम्र और लिंग के लोग एक ही मकसद के साथ एकजुट हुए।" उनके इस संदेश का सार यह था कि स्वाधीनता संग्राम किसी एक क्षेत्र या वर्ग की लड़ाई नहीं थी — यह सम्पूर्ण भारत की सामूहिक चेतना का विस्फोट था।
अपने लेख में उन्होंने विस्तार से रेखांकित किया कि मां भारती की मुक्ति के लिए देश के कोने-कोने से, हर उम्र और हर पृष्ठभूमि के लोग एक ही लक्ष्य के लिए एकजुट हुए थे। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय एकता और क्षेत्रीय पहचान की बहस देश में फिर से प्रासंगिक हो उठी है।
'हर घर तिरंगा' और भारत छोड़ो आंदोलन की स्मृति
उपराष्ट्रपति ने उल्लेख किया कि 9 अगस्त को उन्हें अंडमान द्वीप समूह में 'हर घर तिरंगा' अभियान का शुभारंभ करने का सौभाग्य मिला। यह तिथि 'भारत छोड़ो आंदोलन' की स्मृति से भी जुड़ी है।
उन्होंने लिखा, "1942 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने 'भारत छोड़ो आंदोलन' शुरू किया था और देश को 'करो या मरो' का नारा दिया था। इस आह्वान के परिणामस्वरूप देशभर में आजादी की प्रबल इच्छा फैल गई थी।" गौरतलब है कि अंडमान वह भूमि है जहाँ सेलुलर जेल में अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों ने यातनाएँ सहीं — इसलिए यह चयन प्रतीकात्मक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण था।
स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि और PM मोदी की सराहना
राधाकृष्णन ने कहा कि आज हम जो आजादी की हवा में सांस ले पा रहे हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवैधानिक अधिकारों के साथ जी रहे हैं, यह उस पीढ़ी की देन है जिसने औपनिवेशिक ताकतों के खिलाफ मोर्चा लिया था। उन्होंने लिखा, "देशभर में लाखों स्वतंत्रता सेनानियों ने अटूट समर्पण और बलिदान के साथ लड़ाई लड़ी और कई लोगों ने मां भारती को मुक्त देखने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी।"
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल की भी सराहना करते हुए लिखा कि पीएम मोदी ने राष्ट्रीय आंदोलन के अनसुने नायकों को केंद्र में लाने का उल्लेखनीय कार्य किया है।
विकसित भारत 2047 का आह्वान
लेख के समापन में उपराष्ट्रपति ने देशवासियों को संबोधित करते हुए लिखा, "इस महत्वपूर्ण अवसर पर आइए हम चिंतन करें और अपनी मातृभूमि के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से नया करें। आइए हम इस अमृत काल में एक विकसित भारत 2047 के निर्माण के लिए खुद को समर्पित करें और अपने राष्ट्र की प्रगति और समृद्धि के लिए मिलकर काम करें।"
उनके अनुसार, यही उन वीरों को सबसे उपयुक्त श्रद्धांजलि होगी जिन्होंने अटूट साहस के साथ लड़ाई लड़ी और अपनी जान की कुर्बानी देकर आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता का उपहार दिया। 80वें स्वतंत्रता दिवस पर यह संदेश राष्ट्र के सामने एक स्पष्ट दिशा रखता है — अतीत के बलिदान को भविष्य के निर्माण की प्रेरणा बनाना।