संभल हिंसा: सुप्रीम कोर्ट ने NSA रद्द किया, इमरान मसूद बोले — अधिकारी संविधान के दायरे में रहें
सारांश
मुख्य बातें
सुप्रीम कोर्ट द्वारा संभल हिंसा मामले में मुल्ला अफरोज के विरुद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत की गई कार्रवाई को रद्द किए जाने के बाद कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने 29 सितंबर 2026 को सहारनपुर में तीखी प्रतिक्रिया दी। मसूद ने अधिकारियों को सीधी चेतावनी दी कि यदि वे संविधान के दायरे से बाहर काम करते रहे, तो उन्हें कानूनी जवाबदेही का सामना करना पड़ सकता है।
मुख्य घटनाक्रम
इमरान मसूद ने कहा कि अधिकारियों को समझना चाहिए कि जिस तरह से वे काम कर रहे हैं, उससे जुड़े मामले अंततः सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच सकते हैं और जिम्मेदार अधिकारियों को कानूनी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने यह बयान सहारनपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया।
मसूद ने सहारनपुर मस्जिद से जुड़े एक अलग मामले का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, इस मामले में ऐसे दस्तावेज़ मौजूद हैं जो 'खुद अपनी कहानी बयाँ कर रहे हैं और उन्हें छिपाया नहीं जा सकता।' उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्म के आधार पर मस्जिदों को गिराना और नागरिकों को परेशान करना संविधान की भावना के विरुद्ध है।
संविधान और नागरिक अधिकारों पर जोर
मसूद ने कहा कि यही संविधान जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को पद संभालने का अधिकार देता है, और साथ ही नागरिकों के मूल अधिकारों की गारंटी भी देता है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब देशभर में NSA के दुरुपयोग को लेकर न्यायिक और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर बहस तेज़ हो रही है।
इंडी गठबंधन और अखिलेश यादव पर प्रतिक्रिया
समाजवादी पार्टी (SP) प्रमुख अखिलेश यादव के इंडी गठबंधन की आगामी बैठक में शामिल न होने की अटकलों पर मसूद ने कहा कि यह अखिलेश यादव का अपना फैसला है। हालाँकि उन्होंने जोड़ा कि आगामी चुनाव को देखते हुए इंडी गठबंधन का मजबूत और एकजुट बने रहना बेहद ज़रूरी है।
मसूद ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में SP गठबंधन का नेतृत्व कर रही है, इसलिए उसकी जिम्मेदारी और बड़ी हो जाती है। उनके अनुसार, यदि अखिलेश यादव बैठक से अनुपस्थित रहते हैं, तो इससे न केवल गठबंधन कमज़ोर होगा, बल्कि इसका नुकसान SP को भी उठाना पड़ सकता है।
चुनाव आयोग पर तीखा हमला
कांग्रेस सांसद ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि उनमें थोड़ी भी नैतिकता होती, तो उन्हें अपना पद छोड़ देना चाहिए था। मसूद ने सवाल उठाया कि इतने गंभीर आरोप सामने आने के बावजूद कोई व्यक्ति अपने पद पर कैसे बना रह सकता है।
उन्होंने आगाह किया कि जिस तरह से चुनाव आयोग काम कर रहा है, उसके बाद विपक्षी दलों के लिए मुकाबला करना आसान नहीं होगा। गौरतलब है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर विपक्षी दलों की आलोचनाएँ पिछले कई महीनों से लगातार तेज़ हुई हैं।
आगे क्या होगा
सुप्रीम कोर्ट के NSA रद्द करने के फैसले के बाद अब यह देखना होगा कि राज्य सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है। इमरान मसूद की यह बयानबाज़ी संभल हिंसा मामले को फिर से राजनीतिक विमर्श के केंद्र में ले आई है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा और संसद दोनों में गूँज सकता है।