इंडिया ब्लॉक के सुप्रीम कोर्ट मार्च पर बोले इमरान मसूद: '35 साल में ऐसा जनसैलाब नहीं देखा'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने 13 अक्टूबर 2026 को सहारनपुर में कहा कि सोमवार को दिल्ली में निकाले गए इंडिया ब्लॉक के सुप्रीम कोर्ट मार्च में उन्होंने अपने 30-35 साल के राजनीतिक जीवन में इतनी बड़ी भीड़ पहले कभी नहीं देखी। यह प्रदर्शन चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रद्द करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर आयोजित किया गया था।
इमरान मसूद की प्रतिक्रिया
मसूद ने कहा, 'कल दिल्ली के अंदर हाल देखिए, मैंने तो अपने जीवन में कभी नहीं देखा। 30-35 साल के अपने राजनीतिक जीवन में मैंने कभी दिल्ली में इतना जनसैलाब नहीं देखा।' उन्होंने जोड़ा कि यह माहौल इस बात का संकेत है कि 'लोगों को अब सच्चाई पता चल गई है।'
गौरतलब है कि विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक लगातार सड़कों पर उतरकर SIR प्रक्रिया का विरोध कर रहा है, जिसे आलोचकों का कहना है कि इसका इस्तेमाल मतदाता सूचियों में मनमाने ढंग से काट-छाँट के लिए किया जा सकता है।
भाजपा पर पलटवार
भाजपा नेता किरीट सोमैया द्वारा अभिनेता आमिर खान के भांजे की नागरिकता पर सवाल उठाने और पाकिस्तान फंडिंग के आरोपों के जवाब में मसूद ने कहा, 'हिंदुस्तान के अंदर पाकिस्तान और मुसलमान, दो ही इनके पास नारे हैं, इसके अलावा कुछ मिलता नहीं इन्हें।' उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के पास विकास के मुद्दों पर कोई जवाब नहीं है।
मसूद ने आगे कहा, 'पाकिस्तान एक बर्बाद मुल्क है, उसका क्या करना है? पाकिस्तान के साथ दोस्तियाँ तुम्हारी हैं, हमारी तो है नहीं।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज़ है।
जंतर-मंतर विवाद पर सफाई
प्रदर्शन स्थल की सूची से जंतर-मंतर को हटाए जाने पर मसूद ने कहा कि धरने के लिए हमेशा एक केंद्रीय स्थान ही उपयुक्त होता है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहज़े में कहा, 'कल को ये कहेंगे कि हिमालय की चोटी पर जाकर प्रदर्शन कर दो — ये कोई बात नहीं है।'
जेएमएम नेता की प्रतिक्रिया
रांची में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) नेता मनोज पांडे ने भी प्रदर्शन पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध के अधिकार के तहत भारी भीड़ जमा हुई थी और लोग उस सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे जो एक 'भ्रष्ट व्यक्ति' को बचा रही थी।
पांडे ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन से एक दिन पहले कथित तौर पर भाजपा समर्थकों ने पुलिस की मौजूदगी में सीजेपी सदस्यों और छात्रों पर हमला किया था। उन्होंने कहा कि सोमवार के मार्च के दौरान पुलिस अपनी सीमाओं में रही।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब SIR को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। विपक्ष का तर्क है कि यह प्रक्रिया मतदाता सूचियों से अल्पसंख्यकों और प्रवासी मजदूरों के नाम हटाने का एक औजार बन सकती है, जबकि चुनाव आयोग इसे नियमित सफाई प्रक्रिया बताता है। इंडिया ब्लॉक का यह सड़क आंदोलन आने वाले महीनों में चुनावी राजनीति को प्रभावित कर सकता है।