'तन्हा दिल' फेम शान: ट्यूशन, केबल कनेक्शन और बुटीक से सुपरस्टार सिंगर तक का सफर
सारांश
मुख्य बातें
गायक शान — असली नाम शांतनु मुखर्जी — का नाम सुनते ही 'तन्हा दिल', 'मुसु मुसु हासी', 'चांद सिफारिश', 'जब से तेरे नैना' और 'वो लड़की है कहां' जैसे गानों की यादें ताज़ा हो जाती हैं। 30 सितंबर 1972 को जन्मे इस गायक ने खुद एक इंटरव्यू में स्वीकार किया था कि संगीत को करियर बनाने के बारे में उन्होंने कभी गंभीरता से नहीं सोचा था। एक समय ऐसा भी था जब वह बच्चों को ट्यूशन पढ़ाते थे, मुंबई के घर-घर जाकर केबल टीवी कनेक्शन बेचते थे और बांद्रा की एक बुटीक में काम करते थे।
संगीतमय परिवार, लेकिन अनिश्चित राह
शान का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ जहाँ संगीत की जड़ें गहरी थीं। उनके पिता मानस मुखर्जी एक संगीत निर्देशक थे। उनकी बहन सागरिका भी बाद में गायिका बनीं। बावजूद इसके, शान ने सिंगर बनने का सपना शुरू से नहीं देखा था। इसकी एक बड़ी वजह उनके पिता का संघर्ष था — उन्होंने देखा था कि उनके पिता को वह मुकाम नहीं मिला जिसके वह हकदार थे। पिता के निधन के बाद घर की आर्थिक जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई।
गौरतलब है कि म्यूजिक से उनका नाता बहुत छोटी उम्र में ही जुड़ गया था। उन्होंने बताया था कि मात्र पाँच साल की उम्र में उन्होंने अपना पहला गाना रिकॉर्ड किया था — एक नर्सरी राइम। इसके बाद उन्होंने कई जिंगल्स और बच्चों के लिए गाने रिकॉर्ड किए, लेकिन यह सब उनके लिए पेशेवर लक्ष्य नहीं था।
संघर्ष के वे दिन
पढ़ाई के साथ-साथ शान ने आजीविका के लिए कई छोटे-छोटे काम किए। वह बच्चों को ट्यूशन पढ़ाते थे, घर-घर जाकर केबल टीवी कनेक्शन बेचते थे और बांद्रा की 'लुक्स' नाम की बुटीक में भी काम करते थे। उनके अपने शब्दों में, उन्हें नहीं लगता था कि सिर्फ संगीत के दम पर घर चल पाएगा।
इसी दौरान वह अपनी बहन सागरिका के साथ लाइव शोज में जाने लगे। शुरुआत में सागरिका मुख्य गायिका थीं और शान उनके साथ एक-दो गाने गाते थे। धीरे-धीरे दर्शकों को दोनों की जोड़ी पसंद आने लगी। उन्होंने खुद कहा था कि ऐसा लगा जैसे संगीत ने मुझे चुना हो।
करियर का निर्णायक मोड़
फिल्मों में उनकी शुरुआत 1989 की फिल्म 'परिंदा' से हुई। इसके बाद वह रिमिक्स एल्बम और पॉप म्यूजिक की दिशा में आगे बढ़े। 1999 में उनके करियर ने बड़ा मोड़ लिया जब 'तन्हा दिल' और 'मुसु मुसु हासी' लोगों की जुबान पर चढ़ गए।
शान ने बताया था कि 'तन्हा दिल' उनके लिए बेहद खास था — उनके कई दोस्त अलग-अलग शहरों में चले गए थे और उस अकेलेपन व बदलती ज़िंदगी की भावना से इस गाने का विचार उपजा। उन्होंने इसके बोल लिखे और संगीत पर भी काम किया।
इसके बाद 'दिल चाहता है', 'कल हो ना हो', 'फना', 'सांवरिया', '3 इडियट्स' जैसी तमाम बड़ी फिल्मों में उनकी आवाज़ गूंजी। 'चांद सिफारिश' की रिकॉर्डिंग के बारे में उन्होंने बताया था कि अनजाने में वह उदित नारायण की शैली में गाने लगते थे, क्योंकि आमिर खान की आवाज़ को वह लंबे समय से उदित की आवाज से जोड़कर सुनते आए थे। अपनी अलग पहचान बनाने के लिए उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ी।
पुरस्कार और टेलीविजन पहचान
'चांद सिफारिश' के लिए शान को फिल्मफेयर और आईफा में बेस्ट प्लेबैक सिंगर का सम्मान मिला। अगले साल 'जब से तेरे नैना' के लिए भी उन्हें फिल्मफेयर और आईफा अवॉर्ड से नवाज़ा गया। '3 इडियट्स' के गाने के लिए उन्हें आईफा बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर पुरस्कार मिला।
गायकी के साथ-साथ शान ने टेलीविजन पर भी अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने 'सा रे गा मा पा' जैसे लोकप्रिय सिंगिंग रियलिटी शो को होस्ट किया और बाद में ऐसे शोज में जज की भूमिका भी निभाई। केबल कनेक्शन बेचने वाले हाथों ने जो राह चुनी, वह आज हिंदी फिल्म संगीत के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है।