शान का खुलासा: 'गायकी में मैं परिवार की सबसे कमज़ोर कड़ी था', करियर अपनाने में हिचकिचाए थे
सारांश
मुख्य बातें
प्लेबैक सिंगर शान ने एक बार ऐसे दौर का ज़िक्र किया है जब उन्हें खुद पर यकीन नहीं था कि वे संगीत की दुनिया में अपनी जगह बना पाएँगे। फिल्म ट्रेड एक्सपर्ट कोमल नाहटा के पॉडकास्ट 'गेम चेंजर्स: द म्यूज़िक सीरीज़' में उन्होंने खुलकर बताया कि वे शुरुआती दिनों में गायकी को करियर के रूप में स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थे।
परिवार में संगीत, फिर भी आत्मविश्वास की कमी
शान के पिता संगीतकार और बेहतरीन गायक थे। उनके दादा, माँ और बहन भी अच्छे गायक रहे हैं। इस समृद्ध संगीत परिवार में पले-बढ़े शान को फिर भी हमेशा यह लगता था कि गायकी के मामले में वे परिवार के बाकी सदस्यों से पीछे हैं।
उन्होंने स्वयं कहा, "मैं अपने परिवार में संगीत के मामले में सबसे कमज़ोर कड़ी था। मेरे पिता संगीतकार और बहुत अच्छे गायक थे। मेरे दादा, माँ और बहन भी अच्छे गायक थे। सच कहूँ तो मुझे हमेशा लगता था कि संगीत के मामले में मैं अपने परिवार में सबसे कमज़ोर था।"
पत्रकारिता और विज्ञापन में था मन
शान ने बताया कि किशोरावस्था में उनके मन में एक विद्रोही सोच थी और उनकी रुचि पत्रकारिता तथा विज्ञापन की दुनिया में थी। उन्होंने कहा, "बड़े होते समय मेरे अंदर विद्रोही सोच थी। मैं पत्रकारिता और विज्ञापन करना चाहता था, इसलिए मेरा ध्यान उन चीज़ों की तरफ था। गायकी मेरे लिए स्वाभाविक रूप से आई। मैंने इसके लिए कोई प्रशिक्षण नहीं लिया था।"
यह ऐसे समय में दिलचस्प है जब भारत के कई शीर्ष संगीतकार संगीत की औपचारिक शिक्षा के बिना ही शिखर पर पहुँचे हैं। शान का यह अनुभव उस पीढ़ी की कहानी है जिसने प्रतिभा को प्रशिक्षण से अधिक महत्त्व दिया।
प्रतिभा जेनेटिक नहीं, कंडीशनिंग है
शान ने संगीत और आनुवंशिकता के प्रचलित विचार को चुनौती देते हुए कहा, "लोग अक्सर मानते हैं कि गायकी की प्रतिभा परिवार से मिलती है, लेकिन मैं इसे जेनेटिक चीज़ नहीं मानता। मैं इसे कंडीशनिंग मानता हूँ। जिस माहौल में कोई बच्चा बड़ा होता है, उसका असर भी उसकी प्रतिभा पर पड़ता है। घर में लगातार संगीत का माहौल होने की वजह से मेरे अंदर भी गायकी धीरे-धीरे आती गई।"
कम उम्र में मिले मौके, पर ठुकराए
शान की माँ कोरस सिंगर थीं और उनके पिता की संगीत जगत में अच्छी पहचान थी। जब उद्योग के लोगों को पता चला कि शान और उनकी बहन भी गा सकते हैं, तो उन्हें कम उम्र में ही विज्ञापनों के लिए गाने के अवसर मिलने लगे। बावजूद इसके, उन्होंने कई मौकों को ठुकरा दिया।
उन्होंने कहा, "मुंबई में रहने और माता-पिता के गायक होने की वजह से मुझे कम उम्र में ही गाने के कई मौके मिलने लगे थे। हालाँकि, उस समय मैंने कई मौकों को ठुकरा दिया था। मैं गायकी को करियर के तौर पर अपनाने के लिए तैयार नहीं था। बाद में लगातार मिलते अवसरों के कारण मैंने आखिरकार इसे स्वीकार कर लिया।"
आगे का सफर
आज शान भारतीय प्लेबैक संगीत के सबसे पहचाने जाने वाले चेहरों में से एक हैं। उनकी यह स्वीकारोक्ति न केवल उनकी विनम्रता को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि आत्मविश्वास की कमी और सही दिशा की तलाश किसी भी प्रतिभाशाली व्यक्ति की राह में शुरुआती रोड़ा बन सकती है।