सोनू निगम का जीवन मंत्र: पिता की सीख 'पहले मेहनत, फिर आराम' ने बदली ज़िंदगी
सारांश
मुख्य बातें
मशहूर गायक सोनू निगम ने हाल ही में खुलासा किया कि उनकी सफलता के पीछे उनके पिता की एक सरल लेकिन गहरी सीख है — 'पहले मेहनत करो, बाद में आराम की ज़िंदगी जीना।' 5 अगस्त को प्रसारित ट्रेड एक्सपर्ट कोमल नाहटा की होस्टेड सीरीज़ 'गेम चेंजर्स: द म्यूज़िक सीरीज़' में सोनू ने बचपन के संघर्ष, गुस्से को ऊर्जा में बदलने और 18 साल की उम्र में मुंबई आने के फैसले के बारे में बेबाकी से बात की।
गुस्से को बनाया करियर की ताकत
सोनू निगम ने स्वीकार किया कि बचपन में उनका स्वभाव काफी आक्रामक था। उन्होंने कहा, 'बचपन में मेरा गुस्सा बहुत तेज था।' लेकिन उन्होंने इस गुस्से को नकारात्मक दिशा में जाने नहीं दिया — बल्कि इसे अपने करियर की आग में तब्दील कर दिया।
उन्होंने सिडनी ओपेरा हाउस में एक ही दिन दोपहर और शाम को तीन-तीन घंटे के दो शो करने का ज़िक्र करते हुए कहा, 'मैं ये कर पाया क्योंकि मेरे अंदर उस समय बहुत आग और गुस्सा था। उस आग में करुणा, मेहनत और दूसरों का ख्याल करना भी था।' उनके अनुसार, सही दिशा में लगाई गई आंतरिक ऊर्जा ही असली सफलता की कुंजी है।
पिता की दो रास्तों वाली सीख
सोनू निगम ने अपने पिता की उस बात को दोहराया जो उनके जीवन का मूल मंत्र बन गई। उन्होंने कहा, 'मेरे पिताजी हमेशा कहते थे कि तुम्हारे पास दो रास्ते हैं — या तो अभी मजे ले लो और बाद में संघर्ष करो, या फिर अभी संघर्ष कर लो और बाद में मजे की ज़िंदगी जी लो।'
यह सीख सोनू के लिए निर्णायक साबित हुई। उन्होंने संघर्ष का रास्ता चुना और आज उसी चुनाव का फल भोग रहे हैं। उनके शब्दों में, 'इसलिए मैंने उस वक्त संघर्ष करना चुना और आज मैं आराम की ज़िंदगी जी रहा हूं।'
18 साल में मुंबई का फैसला — जो ज़िंदगी बदल गया
12वीं कक्षा पास करते ही 18 साल की उम्र में सोनू निगम ने मुंबई का रुख किया। उन्होंने बताया कि वे स्वभाव से रोमांटिक थे और कॉलेज जीवन का आनंद लेने की इच्छा भी थी, लेकिन पिता की बात ने उन्हें रोक दिया।
उन्होंने कहा, 'मैं सच में बहुत रोमांटिक लड़का हुआ करता था और मेरी इच्छा थी कि एक गर्लफ्रेंड हो, लेकिन फिर सोचा कि पापा किसी वजह से ही ये कह रहे हैं कि समय बर्बाद मत करो, मेहनत करो।' यह आत्म-अनुशासन ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी बना।
सा रे गा मा और टेलीविजन की लहर
सोनू निगम ने बताया कि सही समय पर मुंबई आने का फैसला उनके लिए गेम-चेंजर रहा। उन्होंने कहा, 'अगर मैं उस वक्त नहीं आता, तो शायद मुझे 29 साल की उम्र तक भी काम नहीं मिलता।' 21 साल की उम्र में उन्होंने 'सा रे गा मा' जैसे लोकप्रिय टेलीविजन शो से अपनी पहचान बनाई और भारतीय टेलीविजन के शुरुआती दौर की उस लहर को पकड़ने में सफल रहे।
आज सोनू निगम देश के सबसे सम्मानित गायकों में शुमार हैं — और उनकी यह यात्रा बताती है कि सही समय पर लिया गया एक कठिन फैसला पूरी ज़िंदगी बदल सकता है।