7 अगस्त 2026
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सोनू निगम का जीवन मंत्र: पिता की सीख 'पहले मेहनत, फिर आराम' ने बदली ज़िंदगी

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सोनू निगम का जीवन मंत्र: पिता की सीख 'पहले मेहनत, फिर आराम' ने बदली ज़िंदगी

सारांश

सोनू निगम ने बताया कि पिता की एक बात — 'अभी मेहनत करो, बाद में आराम जीना' — ने उन्हें 18 साल में मुंबई खींच लाई। बचपन के गुस्से को उन्होंने करियर की आग बनाया, और 21 साल में 'सा रे गा मा' से वो लहर पकड़ी जिसने उन्हें भारत का सबसे पसंदीदा गायक बना दिया।

मुख्य बातें

सोनू निगम ने 'गेम चेंजर्स: द म्यूज़िक सीरीज़' (होस्ट: कोमल नाहटा ) में अपने जीवन के अनछुए पहलू साझा किए।
पिता की सीख — 'या तो अभी मजे लो और बाद में संघर्ष करो, या अभी संघर्ष करो और बाद में आराम जीओ' — ने उनकी दिशा तय की।
18 साल की उम्र में 12वीं पास करते ही मुंबई आने का फैसला किया; कॉलेज और सामान्य युवा जीवन को पीछे छोड़ा।
21 साल की उम्र में 'सा रे गा मा' से टेलीविजन की शुरुआती लहर को पकड़ा।
सिडनी ओपेरा हाउस में एक ही दिन दो बार तीन-तीन घंटे के शो किए — बचपन की आंतरिक आग को सकारात्मक ऊर्जा में बदलकर।

मशहूर गायक सोनू निगम ने हाल ही में खुलासा किया कि उनकी सफलता के पीछे उनके पिता की एक सरल लेकिन गहरी सीख है — 'पहले मेहनत करो, बाद में आराम की ज़िंदगी जीना।' 5 अगस्त को प्रसारित ट्रेड एक्सपर्ट कोमल नाहटा की होस्टेड सीरीज़ 'गेम चेंजर्स: द म्यूज़िक सीरीज़' में सोनू ने बचपन के संघर्ष, गुस्से को ऊर्जा में बदलने और 18 साल की उम्र में मुंबई आने के फैसले के बारे में बेबाकी से बात की।

गुस्से को बनाया करियर की ताकत

सोनू निगम ने स्वीकार किया कि बचपन में उनका स्वभाव काफी आक्रामक था। उन्होंने कहा, 'बचपन में मेरा गुस्सा बहुत तेज था।' लेकिन उन्होंने इस गुस्से को नकारात्मक दिशा में जाने नहीं दिया — बल्कि इसे अपने करियर की आग में तब्दील कर दिया।

उन्होंने सिडनी ओपेरा हाउस में एक ही दिन दोपहर और शाम को तीन-तीन घंटे के दो शो करने का ज़िक्र करते हुए कहा, 'मैं ये कर पाया क्योंकि मेरे अंदर उस समय बहुत आग और गुस्सा था। उस आग में करुणा, मेहनत और दूसरों का ख्याल करना भी था।' उनके अनुसार, सही दिशा में लगाई गई आंतरिक ऊर्जा ही असली सफलता की कुंजी है।

पिता की दो रास्तों वाली सीख

सोनू निगम ने अपने पिता की उस बात को दोहराया जो उनके जीवन का मूल मंत्र बन गई। उन्होंने कहा, 'मेरे पिताजी हमेशा कहते थे कि तुम्हारे पास दो रास्ते हैं — या तो अभी मजे ले लो और बाद में संघर्ष करो, या फिर अभी संघर्ष कर लो और बाद में मजे की ज़िंदगी जी लो।'

यह सीख सोनू के लिए निर्णायक साबित हुई। उन्होंने संघर्ष का रास्ता चुना और आज उसी चुनाव का फल भोग रहे हैं। उनके शब्दों में, 'इसलिए मैंने उस वक्त संघर्ष करना चुना और आज मैं आराम की ज़िंदगी जी रहा हूं।'

18 साल में मुंबई का फैसला — जो ज़िंदगी बदल गया

12वीं कक्षा पास करते ही 18 साल की उम्र में सोनू निगम ने मुंबई का रुख किया। उन्होंने बताया कि वे स्वभाव से रोमांटिक थे और कॉलेज जीवन का आनंद लेने की इच्छा भी थी, लेकिन पिता की बात ने उन्हें रोक दिया।

उन्होंने कहा, 'मैं सच में बहुत रोमांटिक लड़का हुआ करता था और मेरी इच्छा थी कि एक गर्लफ्रेंड हो, लेकिन फिर सोचा कि पापा किसी वजह से ही ये कह रहे हैं कि समय बर्बाद मत करो, मेहनत करो।' यह आत्म-अनुशासन ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी बना।

सा रे गा मा और टेलीविजन की लहर

सोनू निगम ने बताया कि सही समय पर मुंबई आने का फैसला उनके लिए गेम-चेंजर रहा। उन्होंने कहा, 'अगर मैं उस वक्त नहीं आता, तो शायद मुझे 29 साल की उम्र तक भी काम नहीं मिलता।' 21 साल की उम्र में उन्होंने 'सा रे गा मा' जैसे लोकप्रिय टेलीविजन शो से अपनी पहचान बनाई और भारतीय टेलीविजन के शुरुआती दौर की उस लहर को पकड़ने में सफल रहे।

आज सोनू निगम देश के सबसे सम्मानित गायकों में शुमार हैं — और उनकी यह यात्रा बताती है कि सही समय पर लिया गया एक कठिन फैसला पूरी ज़िंदगी बदल सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह यह है कि सोनू ने गुस्से को दबाया नहीं — उसे पुनर्निर्देशित किया। यह भावनात्मक बुद्धिमत्ता का वह पाठ है जो किसी भी उम्र के युवा के लिए प्रासंगिक है।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोनू निगम के पिता ने उन्हें क्या सीख दी थी?
सोनू निगम के पिता ने उन्हें दो रास्ते बताए थे — या तो अभी मजे लो और बाद में संघर्ष करो, या अभी संघर्ष करो और बाद में आराम की ज़िंदगी जीओ। सोनू ने संघर्ष का रास्ता चुना और 18 साल की उम्र में मुंबई आ गए।
सोनू निगम ने 'गेम चेंजर्स: द म्यूज़िक सीरीज़' में क्या बताया?
इस सीरीज़ में सोनू निगम ने बचपन के गुस्से, पिता की प्रेरणा, 18 साल में मुंबई आने के फैसले और सिडनी ओपेरा हाउस में एक दिन में दो शो करने के अनुभव साझा किए। यह सीरीज़ ट्रेड एक्सपर्ट कोमल नाहटा ने होस्ट की है।
सोनू निगम ने अपने करियर की शुरुआत कैसे की?
सोनू निगम ने 12वीं पास करने के बाद 18 साल की उम्र में मुंबई का रुख किया। 21 साल की उम्र में उन्होंने 'सा रे गा मा' टेलीविजन शो से पहचान बनाई और भारतीय टेलीविजन के शुरुआती दौर की लहर को पकड़ा।
सोनू निगम ने बचपन के गुस्से को कैसे संभाला?
सोनू निगम ने खुद माना कि बचपन में उनका गुस्सा बहुत तेज था, लेकिन उन्होंने उसे अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। उस आंतरिक आग को उन्होंने करुणा, मेहनत और प्रदर्शन की ऊर्जा में बदल दिया, जिसका नतीजा सिडनी ओपेरा हाउस जैसे मंचों पर एक दिन में दो-दो शो के रूप में सामने आया।
सोनू निगम का मुंबई आने का फैसला क्यों अहम था?
सोनू निगम के अनुसार, अगर वे सही उम्र में मुंबई नहीं आते तो शायद 29 साल तक भी काम नहीं मिलता। सही समय पर लिए गए इस फैसले ने उन्हें टेलीविजन की शुरुआती लहर का हिस्सा बनाया और उनके करियर की नींव रखी।
राष्ट्र प्रेस
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