सोनू निगम का खुलासा: पिता की सीख ने बदली ज़िंदगी, 18 में मुंबई आए और 21 में 'सा रे गा मा' मिला
सारांश
मुख्य बातें
मशहूर गायक सोनू निगम ने हाल ही में एक खास बातचीत में अपने संघर्ष, गुस्से और पिता की उस सीख को साझा किया जिसने उनकी पूरी ज़िंदगी की दिशा बदल दी। मुंबई में ट्रेड एक्सपर्ट कोमल नाहटा की होस्टेड सीरीज़ 'गेम चेंजर्स: द म्यूजिक सीरीज़' में शिरकत करते हुए सोनू ने बताया कि बचपन में उनके भीतर गुस्सा बहुत तीव्र था, लेकिन उन्होंने उसी आग को अपने करियर की ऊर्जा में तब्दील किया।
गुस्से को बनाया हथियार
सोनू निगम ने स्वीकार किया कि बचपन में उनका गुस्सा काफी तेज़ था। उन्होंने कहा, 'मैंने सिडनी ओपेरा हाउस में दोपहर को तीन घंटे का शो और शाम को फिर तीन घंटे का शो किया। मैं ये कर पाया क्योंकि मेरे अंदर उस वक्त बहुत आग और गुस्सा था। उस आग में करुणा, मेहनत और दूसरों का ख्याल करना भी था।' उन्होंने आगे जोड़ा कि उस गुस्से ने उन्हें कभी गैर-ज़िम्मेदार नहीं बनाया, बल्कि उसे उन्होंने हमेशा सही दिशा में लगाया।
पिता की वह सीख जो आज भी याद है
सोनू निगम ने अपने पिता की उस बात को दोहराया जो उन्होंने बचपन में सुनी थी। उन्होंने कहा, 'मेरे पिताजी हमेशा कहते थे कि तुम्हारे पास दो रास्ते हैं — या तो अभी मजे ले लो और बाद में संघर्ष करो, या फिर अभी संघर्ष कर लो और बाद में मजे की ज़िंदगी जी लो।' इस सीख को उन्होंने अपने जीवन का मूलमंत्र बना लिया और संघर्ष का रास्ता चुना। आज वे मानते हैं कि यही फैसला उनकी सफलता की नींव बना।
18 साल में मुंबई, 21 में मिला बड़ा मौका
सोनू ने बताया कि 12वीं कक्षा पास करते ही 18 साल की उम्र में वे मुंबई आ गए — कॉलेज और दोस्तों के साथ वक्त बिताने की बजाय मेहनत को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा, 'मैं सच में बहुत रोमांटिक लड़का हुआ करता था, गर्लफ्रेंड की इच्छा भी थी, लेकिन पापा की बात याद आई — कि समय बर्बाद मत करो।' उनका यह फैसला सही साबित हुआ — 21 साल की उम्र में उन्हें 'सा रे गा मा' मिला और उन्होंने भारतीय टेलीविज़न की शुरुआती लहर को सही वक्त पर पकड़ा। उनका मानना है कि अगर वे उस उम्र में मुंबई न आते, तो शायद 29 साल तक भी काम न मिलता।
महत्वाकांक्षा और रोमांस के बीच संतुलन
सोनू निगम ने माना कि वे स्वभाव से रोमांटिक और भावुक इंसान हैं, लेकिन महत्वाकांक्षा ने हमेशा उन्हें केंद्रित रखा। उनके सुरीले गाने, भावपूर्ण प्रस्तुतियाँ और दशकों तक बनी रहने वाली लोकप्रियता इसी अनुशासन का नतीजा है। यह ऐसे समय में आया है जब युवा पीढ़ी अक्सर तत्काल सफलता की तलाश में रहती है — सोनू की कहानी धैर्य और दीर्घकालिक सोच की मिसाल पेश करती है।
आगे क्या
सोनू निगम आज भी भारतीय संगीत जगत के सबसे सक्रिय और सम्मानित आवाज़ों में शुमार हैं। उनका यह खुलासा न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन की झलक देता है, बल्कि उन तमाम युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है जो करियर और जीवन के बीच सही चुनाव की तलाश में हैं।