सोनू निगम का संघर्ष: रिकॉर्डिंग स्टूडियो से रोते लौटे, आज 6,000 गानों से करोड़ों दिलों के सरताज
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड के मशहूर प्लेबैक सिंगर सोनू निगम की आवाज आज करोड़ों लोगों की धड़कन है, लेकिन इस मुकाम तक पहुँचने का सफर आँसुओं और अनगिनत ठोकरों से भरा रहा। 'कल हो ना हो', 'सूरज हुआ मद्धम', 'संदेसे आते हैं' और 'अभी मुझमें कहीं' जैसे कालजयी गानों से पहचाने जाने वाले सोनू ने अपने करियर के शुरुआती दौर में मुंबई के एक रिकॉर्डिंग स्टूडियो से खाली हाथ और आँखों में आँसू लेकर वापस लौटने का दर्द झेला था।
बचपन से ही मंच पर उतरे सोनू
सोनू निगम का जन्म 30 जुलाई 1973 को हरियाणा के फरीदाबाद में हुआ। उनके पिता अगम कुमार निगम स्वयं एक गायक थे, इसलिए संगीत घर में ही साँस लेता था। महज चार साल की उम्र में सोनू ने पहली बार पिता के साथ मंच पर कदम रखा और दिग्गज गायक मोहम्मद रफी का मशहूर गीत 'क्या हुआ तेरा वादा' गाकर श्रोताओं का दिल जीत लिया। उसी दिन से रफी साहब उनके आदर्श बन गए।
मुंबई में संघर्ष और स्टूडियो से रोते लौटने का वह पल
करीब 18-19 साल की उम्र में सोनू अपने पिता के साथ सपनों की नगरी मुंबई पहुँचे। लेकिन शुरुआत में किसी ने उनकी आवाज को गंभीरता से नहीं लिया। कई संगीतकारों से मुलाकात हुई, पर काम नहीं मिला। कुछ लोगों ने तो उनकी गायकी पर ही सवाल उठा दिए। सोनू ने कई इंटरव्यू में एक खास वाकये का जिक्र किया है — एक रिकॉर्डिंग स्टूडियो में उन्हें गाने का मौका देने से साफ इनकार कर दिया गया। स्टूडियो से बाहर निकलते ही वह अपने आँसू नहीं रोक सके और फूट-फूटकर रोए। यह वही पल था जो उन्हें तोड़ सकता था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
निराशा को ताकत में बदलते हुए सोनू ने स्टेज शोज का सहारा लिया और मोहम्मद रफी के गानों को अपनी आवाज देकर धीरे-धीरे पहचान बनानी शुरू की। इसी दौरान उन्होंने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की विधिवत शिक्षा भी ली, जिसने उनकी आवाज को और गहराई दी।
गुलशन कुमार ने बदली किस्मत
सोनू के करियर में असली मोड़ तब आया जब टी-सीरीज के संस्थापक गुलशन कुमार ने उनकी प्रतिभा को पहचाना। साल 1992 में सोनू ने 'रफी की यादें' एल्बम में मोहम्मद रफी के गानों को अपनी आवाज दी, जिसे श्रोताओं ने खूब पसंद किया। इसके बाद फिल्म 'बेवफा सनम' का गाना 'अच्छा सिला दिया तूने मेरे प्यार का' ने उन्हें घर-घर में मशहूर कर दिया। यह ऐसे समय में आया जब बॉलीवुड में नए प्लेबैक गायकों की माँग तेज़ी से बढ़ रही थी।
सुपरहिट गानों की लंबी फेहरिस्त
एक बार पहचान मिलने के बाद सोनू निगम ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। फिल्म 'बॉर्डर' का 'संदेसे आते हैं', 'परदेस' का 'ये दिल... दीवाना', 'कल हो ना हो' का टाइटल ट्रैक, 'सूरज हुआ मद्धम' और 'अभी मुझमें कहीं' जैसे गाने उनकी आवाज की पहचान बन गए। इसके अलावा 'सतरंगी रे', 'साथिया', 'मैं हूँ ना', 'तनहाई', 'दो पल', 'शुकरान अल्लाह' और 'बोल दो ना ज़रा' जैसे गाने आज भी संगीत प्रेमियों की प्लेलिस्ट में बने हुए हैं।
सोनू ने हिंदी के अलावा कन्नड़, बंगाली, मराठी, तमिल, तेलुगु सहित कई भाषाओं में गाने गाए और अपनी बहुभाषी पहचान स्थापित की।
पुरस्कार और सम्मान
अपने करियर में सोनू निगम ने 6,000 से अधिक गाने रिकॉर्ड किए हैं। उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, कई फिल्मफेयर पुरस्कार और चार आईफा पुरस्कार मिले। साल 2022 में भारत सरकार ने उन्हें देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से नवाजा। गौरतलब है कि एक स्टूडियो के दरवाजे से रोते हुए लौटने वाले इस फनकार ने अपनी लगन और मेहनत के बल पर भारतीय संगीत जगत में अमिट छाप छोड़ी है।