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सोनू निगम का संघर्ष: रिकॉर्डिंग स्टूडियो से रोते लौटे, आज 6,000 गानों से करोड़ों दिलों के सरताज

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सोनू निगम का संघर्ष: रिकॉर्डिंग स्टूडियो से रोते लौटे, आज 6,000 गानों से करोड़ों दिलों के सरताज

सारांश

एक रिकॉर्डिंग स्टूडियो ने दरवाज़ा बंद किया, सोनू निगम रोते हुए लौटे — लेकिन हार नहीं मानी। फरीदाबाद से मुंबई तक के इस सफर में रफी के गाने ढाल बने, गुलशन कुमार ने मौका दिया, और आज 6,000 से ज़्यादा गानों के साथ वह भारतीय संगीत के सरताज हैं।

मुख्य बातें

सोनू निगम का जन्म 30 जुलाई 1973 को फरीदाबाद, हरियाणा में हुआ; पिता अगम कुमार निगम खुद गायक थे।
मात्र चार साल की उम्र में पहली बार मंच पर गाया — मोहम्मद रफी का 'क्या हुआ तेरा वादा' ।
मुंबई में 18-19 साल की उम्र में संघर्ष के दौरान एक रिकॉर्डिंग स्टूडियो ने मौका देने से इनकार किया, सोनू रोते हुए लौटे।
साल 1992 में टी-सीरीज के गुलशन कुमार के साथ 'रफी की यादें' एल्बम से करियर को मिली उड़ान।
अब तक 6,000 से अधिक गाने रिकॉर्ड; राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार , फिल्मफेयर , चार आईफा पुरस्कार और पद्मश्री 2022 से सम्मानित।

बॉलीवुड के मशहूर प्लेबैक सिंगर सोनू निगम की आवाज आज करोड़ों लोगों की धड़कन है, लेकिन इस मुकाम तक पहुँचने का सफर आँसुओं और अनगिनत ठोकरों से भरा रहा। 'कल हो ना हो', 'सूरज हुआ मद्धम', 'संदेसे आते हैं' और 'अभी मुझमें कहीं' जैसे कालजयी गानों से पहचाने जाने वाले सोनू ने अपने करियर के शुरुआती दौर में मुंबई के एक रिकॉर्डिंग स्टूडियो से खाली हाथ और आँखों में आँसू लेकर वापस लौटने का दर्द झेला था।

बचपन से ही मंच पर उतरे सोनू

सोनू निगम का जन्म 30 जुलाई 1973 को हरियाणा के फरीदाबाद में हुआ। उनके पिता अगम कुमार निगम स्वयं एक गायक थे, इसलिए संगीत घर में ही साँस लेता था। महज चार साल की उम्र में सोनू ने पहली बार पिता के साथ मंच पर कदम रखा और दिग्गज गायक मोहम्मद रफी का मशहूर गीत 'क्या हुआ तेरा वादा' गाकर श्रोताओं का दिल जीत लिया। उसी दिन से रफी साहब उनके आदर्श बन गए।

मुंबई में संघर्ष और स्टूडियो से रोते लौटने का वह पल

करीब 18-19 साल की उम्र में सोनू अपने पिता के साथ सपनों की नगरी मुंबई पहुँचे। लेकिन शुरुआत में किसी ने उनकी आवाज को गंभीरता से नहीं लिया। कई संगीतकारों से मुलाकात हुई, पर काम नहीं मिला। कुछ लोगों ने तो उनकी गायकी पर ही सवाल उठा दिए। सोनू ने कई इंटरव्यू में एक खास वाकये का जिक्र किया है — एक रिकॉर्डिंग स्टूडियो में उन्हें गाने का मौका देने से साफ इनकार कर दिया गया। स्टूडियो से बाहर निकलते ही वह अपने आँसू नहीं रोक सके और फूट-फूटकर रोए। यह वही पल था जो उन्हें तोड़ सकता था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

निराशा को ताकत में बदलते हुए सोनू ने स्टेज शोज का सहारा लिया और मोहम्मद रफी के गानों को अपनी आवाज देकर धीरे-धीरे पहचान बनानी शुरू की। इसी दौरान उन्होंने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की विधिवत शिक्षा भी ली, जिसने उनकी आवाज को और गहराई दी।

गुलशन कुमार ने बदली किस्मत

सोनू के करियर में असली मोड़ तब आया जब टी-सीरीज के संस्थापक गुलशन कुमार ने उनकी प्रतिभा को पहचाना। साल 1992 में सोनू ने 'रफी की यादें' एल्बम में मोहम्मद रफी के गानों को अपनी आवाज दी, जिसे श्रोताओं ने खूब पसंद किया। इसके बाद फिल्म 'बेवफा सनम' का गाना 'अच्छा सिला दिया तूने मेरे प्यार का' ने उन्हें घर-घर में मशहूर कर दिया। यह ऐसे समय में आया जब बॉलीवुड में नए प्लेबैक गायकों की माँग तेज़ी से बढ़ रही थी।

सुपरहिट गानों की लंबी फेहरिस्त

एक बार पहचान मिलने के बाद सोनू निगम ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। फिल्म 'बॉर्डर' का 'संदेसे आते हैं', 'परदेस' का 'ये दिल... दीवाना', 'कल हो ना हो' का टाइटल ट्रैक, 'सूरज हुआ मद्धम' और 'अभी मुझमें कहीं' जैसे गाने उनकी आवाज की पहचान बन गए। इसके अलावा 'सतरंगी रे', 'साथिया', 'मैं हूँ ना', 'तनहाई', 'दो पल', 'शुकरान अल्लाह' और 'बोल दो ना ज़रा' जैसे गाने आज भी संगीत प्रेमियों की प्लेलिस्ट में बने हुए हैं।

सोनू ने हिंदी के अलावा कन्नड़, बंगाली, मराठी, तमिल, तेलुगु सहित कई भाषाओं में गाने गाए और अपनी बहुभाषी पहचान स्थापित की।

पुरस्कार और सम्मान

अपने करियर में सोनू निगम ने 6,000 से अधिक गाने रिकॉर्ड किए हैं। उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, कई फिल्मफेयर पुरस्कार और चार आईफा पुरस्कार मिले। साल 2022 में भारत सरकार ने उन्हें देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से नवाजा। गौरतलब है कि एक स्टूडियो के दरवाजे से रोते हुए लौटने वाले इस फनकार ने अपनी लगन और मेहनत के बल पर भारतीय संगीत जगत में अमिट छाप छोड़ी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

केवल प्रतिभा और जिद के बल पर बॉलीवुड का दरवाज़ा खटखटाया। गुलशन कुमार जैसे निर्माताओं की भूमिका को अक्सर नज़रअंदाज़ किया जाता है, जबकि वे उस दौर के असली 'गेटकीपर' थे जिन्होंने कई आवाजों को पहला मौका दिया। आज जब स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ने संगीत की दुनिया बदल दी है, सोनू का 6,000 गानों का सफर यह भी बताता है कि बहुभाषी पहुँच और शास्त्रीय आधार ही किसी गायक को दशकों तक प्रासंगिक बनाए रखता है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोनू निगम का जन्म कब और कहाँ हुआ?
सोनू निगम का जन्म 30 जुलाई 1973 को हरियाणा के फरीदाबाद में हुआ था। उनके पिता अगम कुमार निगम एक गायक थे, जिनके साथ सोनू ने महज चार साल की उम्र में पहली बार मंच पर प्रस्तुति दी थी।
सोनू निगम को रिकॉर्डिंग स्टूडियो से क्यों रोते हुए लौटना पड़ा था?
मुंबई में करियर के शुरुआती संघर्ष के दौरान एक रिकॉर्डिंग स्टूडियो ने उन्हें गाने का अवसर देने से इनकार कर दिया था। यह रिजेक्शन उनके लिए बेहद निराशाजनक रहा और स्टूडियो से बाहर निकलते ही वह फूट-फूटकर रो पड़े। सोनू ने यह किस्सा खुद कई इंटरव्यू में साझा किया है।
सोनू निगम के करियर में बड़ा बदलाव कैसे आया?
साल 1992 में टी-सीरीज के संस्थापक गुलशन कुमार ने सोनू को 'रफी की यादें' एल्बम में मोहम्मद रफी के गाने गाने का मौका दिया, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा। इसके बाद फिल्म 'बेवफा सनम' के गाने 'अच्छा सिला दिया तूने मेरे प्यार का' ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई।
सोनू निगम को कौन-कौन से प्रमुख पुरस्कार मिले हैं?
सोनू निगम को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, कई फिल्मफेयर पुरस्कार और चार आईफा पुरस्कार मिले हैं। साल 2022 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया।
सोनू निगम ने अब तक कितने गाने गाए हैं?
सोनू निगम ने अब तक 6,000 से अधिक गाने रिकॉर्ड किए हैं। उन्होंने हिंदी के अलावा कन्नड़, बंगाली, मराठी, तमिल और तेलुगु सहित कई भाषाओं में गाने गाकर बहुभाषी पहचान बनाई है।
राष्ट्र प्रेस
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