विझिनजम पोर्ट पर 18 अगस्त से सीधे एग्जिम कार्गो ऑपरेशन, शशि थरूर ने किया स्वागत
सारांश
मुख्य बातें
केरल के विझिनजम इंटरनेशनल सीपोर्ट पर 18 अगस्त से सीधे एक्सपोर्ट-इंपोर्ट (एग्जिम) कार्गो ऑपरेशन शुरू होने जा रहे हैं। तिरुवनंतपुरम के सांसद और कांग्रेस नेता शशि थरूर ने 14 अगस्त को इस घटनाक्रम की जानकारी देते हुए इसे पोर्ट के विकास में एक ऐतिहासिक पड़ाव बताया। यह कदम विझिनजम को महज एक ट्रांसशिपमेंट हब से भारत के विदेशी व्यापार के सक्रिय प्रवेश द्वार में बदलने की दिशा में निर्णायक माना जा रहा है।
थरूर ने एक्स पर क्या कहा
थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'सीधे एग्जिम कार्गो आवाजाही की शुरुआत एक अहम पड़ाव होगी, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि केरल को अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह से सीधे आर्थिक लाभ मिलना शुरू हो। इस इलाके के सांसद के तौर पर, मैं इस खबर से बहुत खुश हूं।' उन्होंने यह भी बताया कि अब तक इस पोर्ट पर हैंडल होने वाले लगभग 60 फीसदी कंटेनर तीसरे देशों से आने या जाने वाले ट्रांसशिपमेंट कार्गो के थे।
मुख्यमंत्री करेंगे औपचारिक उद्घाटन
केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन एग्जिम ऑपरेशन का औपचारिक उद्घाटन करेंगे। इससे पहले कोच्चि में कस्टम्स कमिश्नर (प्रिवेंटिव) ने गेटवे कार्गो कामकाज के लिए एक विस्तृत ऑपरेशनल फ्रेमवर्क जारी किया था, जिसमें कस्टम्स और कार्गो-हैंडलिंग प्रक्रियाओं को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की व्यवस्था है।
शुरुआती चरण में क्या होगा
प्रारंभिक चरण में आयात ऑपरेशन मुख्यतः फुल-कंटेनर-लोड (FCL) कार्गो की सीधे पोर्ट डिलीवरी पर केंद्रित रहेंगे। निर्यात के मामले में फैक्ट्री-स्टफ्ड और सीलबंद फुल-कंटेनर-लोड कंसाइनमेंट को प्राथमिकता दी जाएगी। यह ढाँचा धीरे-धीरे विस्तृत होगा, जिससे व्यापारियों को संक्रमण काल में स्थिरता मिलेगी।
विझिनजम पोर्ट का महत्व
तिरुवनंतपुरम के निकट स्थित विझिनजम भारत के सबसे गहरे पानी वाले बंदरगाहों में से एक है और इसे एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में विकसित किया गया है। गौरतलब है कि अब तक यह पोर्ट केवल ट्रांसशिपमेंट तक सीमित था, जिससे केरल के स्थानीय कारोबारियों को प्रत्यक्ष लाभ नहीं मिल पा रहा था।
आम जनता और व्यापार पर असर
सीधे एग्जिम ऑपरेशन शुरू होने से केरल और आसपास के क्षेत्रों के आयातकों-निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय शिपिंग सेवाओं तक बेहतर और सीधी पहुँच मिलेगी। इससे लॉजिस्टिक्स लागत में कमी और वैश्विक समुद्री नेटवर्क में राज्य की स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है। यह कदम 'मेक इन इंडिया' और समुद्री व्यापार विस्तार के व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप भी है।