विझिंजम पोर्ट का दूसरा चरण: ₹16,000 करोड़ निवेश से क्षमता 57 लाख TEU, 5,000 नई नौकरियाँ
सारांश
मुख्य बातें
विझिंजम इंटरनेशनल सीपोर्ट पर आयात-निर्यात (EXIM) परिचालन पूरी तरह शुरू हो जाने के बाद अब इसके दूसरे चरण की घोषणा मंगलवार, 18 अगस्त को की गई। ₹16,000 करोड़ के नए निवेश से पोर्ट की वार्षिक क्षमता बढ़कर 57 लाख टीईयू (TEU) हो जाएगी और 1,200 मीटर का नया कंटेनर बर्थ जोड़ा जाएगा। इस विस्तार के साथ 5,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार सृजित होने का अनुमान है।
दूसरे चरण में क्या शामिल है
दूसरे चरण के तहत केवल बंदरगाह की भौतिक क्षमता ही नहीं बढ़ाई जाएगी, बल्कि रेल और सड़क कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउसिंग सुविधाएँ और अन्य बुनियादी ढाँचा भी विकसित किया जाएगा। इस पूरे चरण का विकास कार्य दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इस नए निवेश के साथ अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड (APSEZ) का विझिंजम परियोजना में कुल निवेश ₹30,000 करोड़ तक पहुँच जाएगा। कंपनी के अनुसार, यह केरल में किसी भी व्यावसायिक समूह द्वारा किया गया अब तक का सबसे बड़ा एकल निवेश है।
अदाणी ग्रुप का नज़रिया
APSEZ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और पूर्णकालिक निदेशक अश्वनी गुप्ता ने कहा, 'यह एक नए गेटवे की शुरुआत है जो केरल के टैलेंट, भारत के एंटरप्राइज और लाखों लोगों की उम्मीदों को ग्लोबल मार्केट से जोड़ता है।' उन्होंने यह भी कहा कि यह पोर्ट केवल कार्गो आवाजाही तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की आत्मनिर्भरता, वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और समुद्री क्षेत्र में नेतृत्व की आकांक्षाओं को भी पूरा करता है।
केरल सरकार की प्रतिक्रिया
केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीसन ने इसे 'गर्व का पल' बताते हुए कहा कि विझिंजम अब दुनिया के लिए एक गेटवे बन गया है। उन्होंने 'मिशन समुद्र' के तहत इस अवसर का पूरा लाभ उठाने की बात कही, जिसमें सड़क और रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करना और अधिक निजी निवेश आकर्षित करना शामिल है। सतीसन ने बताया कि सरकार रिंग रोड के लिए भूमि अधिग्रहण पर ₹3,200 करोड़ खर्च करेगी और निजी निवेश के लिए बातचीत पहले ही शुरू हो चुकी है।
भारत की समुद्री व्यापार क्षमता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब भारत का 75 प्रतिशत से अधिक कंटेनर ट्रांसशिपमेंट कार्गो अभी भी विदेशी बंदरगाहों के ज़रिए संभाला जाता है, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत और पारगमन समय दोनों बढ़ते हैं। विझिंजम के EXIM परिचालन से इस संरचनात्मक निर्भरता को कम करने, सप्लाई चेन की दक्षता बढ़ाने और भारत के समुद्री व्यापार से अधिकतम लाभ उठाने की क्षमता को मजबूत करने की उम्मीद है। गौरतलब है कि विझिंजम पहले एक ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में काम कर रहा था; अब EXIM परिचालन शुरू होने से यह वास्तव में भारतीय व्यापार और वैश्विक बाज़ार के बीच एक सेतु बन गया है।
आने वाले वर्षों में विझिंजम का प्रदर्शन यह तय करेगा कि भारत अपनी समुद्री महत्वाकांक्षाओं को ज़मीन पर उतार पाता है या नहीं।