विझिंजम पोर्ट में MSC ग्रुप का ₹11,700 करोड़ निवेश, 49% हिस्सेदारी के लिए अदाणी से करार
सारांश
मुख्य बातें
अदाणी पोर्ट्स एंड SEZ लिमिटेड (APSEZ) ने 30 जून 2026 को घोषणा की कि उसने MSC ग्रुप की कंटेनर टर्मिनल निवेश शाखा टर्मिनल इन्वेस्टमेंट लिमिटेड (TIL) के साथ एक निश्चित समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत TIL अदाणी विझिंजम पोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (AVPPL) में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए करीब 1.4 अरब डॉलर (लगभग ₹11,700 करोड़) का निवेश करेगी। यह सौदा भारत के बंदरगाह क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निजी निवेश माना जा रहा है।
सौदे की मुख्य शर्तें
इस समझौते के अनुसार, TIL विझिंजम पोर्ट में करीब 1.397 अरब डॉलर का निवेश करेगी, जो बंदरगाह के कुल 2.85 अरब डॉलर के मूल्यांकन पर आधारित है। यह निवेश नियामकीय मंजूरियों और अन्य आवश्यक स्वीकृतियाँ मिलने के बाद पूरा होगा। TIL दुनिया की सबसे बड़ी कंटेनर टर्मिनल संचालन कंपनियों में से एक है, जिसके पाँच महाद्वीपों में 100 से अधिक कंटेनर टर्मिनलों का नेटवर्क है और जो सालाना 7 करोड़ TEU से अधिक कार्गो का संचालन करती है।
विझिंजम पोर्ट की उपलब्धियाँ
दिसंबर 2024 में परिचालन शुरू करने वाला विझिंजम पोर्ट भारत का पहला डीप-ड्राफ्ट मेगा ट्रांसशिपमेंट पोर्ट है। इसकी मौजूदा क्षमता 16 लाख TEU है। APSEZ के पूर्णकालिक निदेशक एवं सीईओ अश्विनी गुप्ता के अनुसार, बंदरगाह ने मात्र 18 महीनों के भीतर 20 लाख TEU कार्गो हैंडलिंग का आँकड़ा पार कर लिया है — यह उपलब्धि हासिल करने वाला यह भारत का पहला बंदरगाह बन गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में बंदरगाह ने 13 लाख TEU कार्गो और 615 जहाजों का संचालन किया, और अपने पहले ही वर्ष में 10 लाख TEU का आँकड़ा पार करने वाला यह भारत का सबसे तेज़ बंदरगाह भी बन गया।
रणनीतिक महत्व
विझिंजम पोर्ट की सबसे बड़ी ताकत इसकी भौगोलिक स्थिति है — यह यूरोप, फारस की खाड़ी और सुदूर पूर्व को जोड़ने वाले प्रमुख ईस्ट-वेस्ट शिपिंग रूट से मात्र 10 नॉटिकल मील की दूरी पर स्थित है। APSEZ के अनुसार, MSC ग्रुप के साथ यह साझेदारी बांग्लादेश से आने वाले कार्गो की हिस्सेदारी बढ़ाने में सहायक होगी, जो अभी दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य ट्रांसशिपमेंट हब पर निर्भर है। इसके साथ ही पूर्वी अफ्रीका के व्यापार मार्गों पर उपस्थिति और रिले कार्गो की मात्रा में भी वृद्धि होगी।
विस्तार योजना
बंदरगाह का विस्तार कार्य वर्तमान में जारी है। कंपनी के अनुसार, दिसंबर 2028 तक इसकी क्षमता 3.5 गुना बढ़कर 57 लाख TEU हो जाएगी। गुप्ता ने कहा कि MSC के साथ यह सहयोग वैश्विक सप्लाई चेन को अधिक कुशल बनाएगा और भारत की प्रमुख विकसित तथा उभरते वैश्विक बाज़ारों तक पहुँच और मज़बूत करेगा।
भारतीय बंदरगाह क्षेत्र पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने ट्रांसशिपमेंट कार्गो का बड़ा हिस्सा कोलंबो, सिंगापुर और पोर्ट क्लैंग जैसे विदेशी बंदरगाहों के माध्यम से संचालित करता है। गौरतलब है कि विझिंजम का उभरना भारत की उस रणनीतिक महत्वाकांक्षा का हिस्सा है, जिसमें देश को हिंद महासागर क्षेत्र का प्रमुख शिपिंग केंद्र बनाना है। MSC जैसी वैश्विक शिपिंग दिग्गज का इस बंदरगाह में प्रत्यक्ष हिस्सेदारी लेना इस दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।