राम मंदिर चढ़ावा विवाद: पप्पू यादव साधु वेश में संसद पहुंचे, विपक्ष ने की सांकेतिक 'दान' प्रदर्शनी
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 31 जुलाई को पूर्णिया सांसद पप्पू यादव साधु के वेश में संसद परिसर पहुंचे और अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा अनियमितता के आरोपों को लेकर विपक्षी सांसदों ने एक अनोखा प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया। इस दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं को सांकेतिक दान-पात्र में दान करते देखा गया।
प्रदर्शन का स्वरूप और मुख्य घटनाक्रम
पप्पू यादव ने साधु के भेष में नुक्कड़ नाटक जैसा प्रदर्शन किया और सांकेतिक तौर पर एक दान-पात्र लेकर आए, जो राम मंदिर में कथित चढ़ावा अनियमितताओं का प्रतीक था। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने नारा लगाया — 'राम राम जपियो रे, सब माल हड़पियो रे।' विपक्षी सांसदों ने एक बैनर भी प्रदर्शित किया, जिस पर लिखा था: 'अमित शाह संसद से गायब क्यों हैं?' — इस तरह केंद्रीय गृह मंत्री की संसद में अनुपस्थिति पर भी सवाल खड़े किए गए।
विपक्ष के आरोप और संसद में चर्चा की माँग
समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि प्रदर्शन का उद्देश्य उन आरोपों की ओर ध्यान आकर्षित करना था, जिनके अनुसार अयोध्या में दान करने वाले भक्तों को रसीदें नहीं दी गईं और मामले से जुड़ा सीसीटीवी फुटेज कथित तौर पर डिलीट कर दिया गया। उन्होंने कहा, 'यह अयोध्या में जो हुआ है, उसे दिखाने के लिए एक सिंबॉलिक प्रोटेस्ट है। भक्तों ने डोनेशन दिया, लेकिन आरोप हैं कि रसीदें नहीं दी गईं और सीसीटीवी फुटेज डिलीट कर दी गई। हम इस मुद्दे पर पार्लियामेंट में चर्चा चाहते हैं।' धर्मेंद्र यादव ने लोकसभा अध्यक्ष से इस मामले पर बहस की अनुमति देने की भी अपील की।
एसआईटी पुनर्गठन की पृष्ठभूमि
यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ जब उत्तर प्रदेश सरकार ने 26 जुलाई को आधिकारिक रूप से एसआईटी का पुनर्गठन किया था, जो अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान व चढ़ावे में कथित गड़बड़ियों की जांच करेगी। गौरतलब है कि इस मामले में अब तक चंपत राय के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है, जिसे लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।
विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने सरकार और ट्रस्ट से यह स्पष्ट करने की माँग की कि 'क्या इस एसआईटी नियुक्ति से भविष्य में होने वाली गड़बड़ियों को रोका जा सकेगा और इसके लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं?' उन्होंने कहा, 'चंपत राय के खिलाफ एफआईआर क्यों नहीं की गई, इस बारे में अभी भी सवालों के जवाब नहीं मिले हैं। जब तक सरकार सख्त कार्रवाई नहीं करती, हम मानेंगे कि प्रभावशाली लोगों को बचाया जा रहा है।'
कांग्रेस नेता अजय राय ने कहा, 'ट्रस्ट एक पवित्र मकसद के लिए बनाया गया था। हालांकि, आरएसएस से जुड़े लोगों ने भगवान राम के नाम पर भ्रष्टाचार और चोरी की।' उन्होंने माँग की कि राम मंदिर ट्रस्ट को पुनर्गठित किया जाए और शंकराचार्यों सहित संतों के मार्गदर्शन में रखा जाए। अजय राय ने यह भी कहा कि अयोध्या के स्थानीय निवासियों को भी ट्रस्ट में शामिल किया जाना चाहिए, क्योंकि उनका भगवान राम से गहरा ऐतिहासिक जुड़ाव है।
आगे क्या होगा
विपक्ष संसद में इस मुद्दे पर बहस की माँग पर अड़ा है, जबकि एसआईटी की जांच जारी है। चंपत राय के खिलाफ कार्रवाई और सीसीटीवी फुटेज की बहाली को लेकर विपक्षी दलों का दबाव आने वाले सत्र में और तेज होने की संभावना है।