24 अगस्त 2026
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मनुस्मृति विवाद: निशिकांत दुबे का राहुल गांधी पर हमला — 'पारसी धर्म के हैं, हिंदू ग्रंथों पर टिप्पणी का अधिकार नहीं'

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मनुस्मृति विवाद: निशिकांत दुबे का राहुल गांधी पर हमला — 'पारसी धर्म के हैं, हिंदू ग्रंथों पर टिप्पणी का अधिकार नहीं'

सारांश

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने एक्स पर राहुल गांधी को 'पारसी धर्म का अल्पसंख्यक' बताते हुए हिंदू, इस्लाम और ईसाई ग्रंथों पर टिप्पणी का अधिकार नकार दिया। मनुस्मृति पर राहुल के महाराष्ट्र वाले बयान ने BJP और योगी आदित्यनाथ को एकजुट कर दिया — और यह विवाद संसद तक पहुँचने की पूरी संभावना है।

मुख्य बातें

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने 24 अगस्त को एक्स पर पोस्ट कर राहुल गांधी को 'पारसी धर्म का' बताया और हिंदू, इस्लाम व ईसाई ग्रंथों पर टिप्पणी का अधिकार नकारा।
विवाद की जड़ राहुल गांधी का महाराष्ट्र में दिया वह बयान है, जिसमें उन्होंने महिलाओं से 'मनुस्मृति के बंधन तोड़ने' का आह्वान किया था।
दुबे ने 1775 में वारेन हेस्टिंग्स द्वारा गठित 11 विद्वानों की समिति और उसकी 1777 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए मनुस्मृति की मिश्रित प्रामाणिकता का तर्क दिया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रायबरेली में राहुल गांधी पर लोकतंत्र और देश की परंपराओं के प्रति जवाबदेही न निभाने का आरोप लगाया।
योगी ने राहुल गांधी को मनु को समझने के लिए अथर्ववेद , शतपथ ब्राह्मण और मत्स्य पुराण पढ़ने की सलाह दी।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद निशिकांत दुबे ने 24 अगस्त 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिए लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। यह विवाद राहुल गांधी के महाराष्ट्र में दिए उस बयान के बाद भड़का, जिसमें उन्होंने कहा था कि महिलाएं मनुस्मृति के बंधन को तोड़कर बाहर आएं।

निशिकांत दुबे का एक्स पोस्ट: क्या कहा

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा, राहुल गांधी फिरोज गांधी के पोते और वंशज हैं, और भारत के संविधान तथा धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वे पारसी धर्म के हैं। दुबे ने आरोप लगाया कि 'पारसी धर्म आपका कर्म है, इसलिए आपको सनातन धर्म यानी हिंदू धर्म, कुरान यानी इस्लाम तथा बाइबल यानी ईसाई धर्म और उनके धार्मिक ग्रंथों पर टिप्पणी करने का कोई हक और हूकूक नहीं है।'

दुबे ने अपनी पोस्ट में ऐतिहासिक संदर्भ भी दिया। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन के गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्स ने 27 मार्च 1775 को 11 पंडितों और विद्वानों की एक समिति गठित की थी, जिसका उद्देश्य भारत में उपलब्ध संस्कृत और पाली ग्रंथों का अनुवाद एवं अध्ययन करना था। दुबे के अनुसार इस समिति की रिपोर्ट 1777 में गवर्नर जनरल को सौंपी गई, जिसमें स्पष्ट लिखा गया था कि मनुस्मृति के कुछ श्लोक सही हैं, कुछ गलत हैं और कुछ काल्पनिक कालखंड के हैं। उन्होंने कांग्रेस से आग्रह किया कि वह यही दृष्टिकोण अन्य धर्म ग्रंथों पर भी लागू करे।

योगी आदित्यनाथ की प्रतिक्रिया

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रायबरेली में वीर सेनानायक राणा बेनी माधव बख्श सिंह की जयंती पर आयोजित भाव समर्पण कार्यक्रम में राहुल गांधी के मनुस्मृति संबंधी बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी के रूप में देश आपसे बहुत अपेक्षा नहीं करता, लेकिन भारत की संसद में नेता प्रतिपक्ष के रूप में आपको देश के लोकतंत्र के प्रति जवाबदेह बनाता है।'

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने संविधान की शपथ ली है, फिर भी वे भारत की परंपरा और विरासत को कोसना अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते हैं। योगी ने यह भी कहा कि राहुल गांधी उत्तर प्रदेश से बाहर जाते हैं तो प्रदेश को लांछित करते हैं और भारत से बाहर जाते हैं तो देश का अपमान करते हैं।

मनु और भारतीय परंपरा पर योगी का तर्क

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यदि राहुल गांधी को मनु के बारे में जानना है तो उन्हें अथर्ववेद, शतपथ ब्राह्मण और मत्स्य पुराण पढ़ना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी की लोकतंत्र के प्रति निष्ठा पर सवाल उठाते हुए 1975 के आपातकाल का उल्लेख किया। योगी ने यह भी कहा कि अयोध्या में प्रभु श्रीराम के अस्तित्व पर भी कांग्रेस की ओर से प्रश्न खड़े किए गए।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि जब भारत की सेना सीमाओं पर दुश्मनों से लड़ती है, तब राहुल गांधी सैनिकों से प्रमाण मांगते हैं और आतंकवाद के खिलाफ देश की लड़ाई में देशद्रोही तत्वों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रोत्साहित करते हैं।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब संसद के मानसून सत्र में विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है। गौरतलब है कि मनुस्मृति पर बहस भारतीय राजनीति में नई नहीं है — यह ग्रंथ दशकों से सामाजिक न्याय और हिंदू परंपरा को लेकर राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रहा है। राहुल गांधी की धार्मिक पहचान को लेकर दुबे की टिप्पणी ने इस बहस को एक नया और विवादास्पद मोड़ दे दिया है।

आने वाले दिनों में कांग्रेस की ओर से इस पर औपचारिक प्रतिक्रिया और संभावित संसदीय हंगामे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक खतरनाक राजनीतिक मिसाल कायम करती है — क्योंकि यह तर्क किसी भी नागरिक की धार्मिक पहचान के आधार पर उसके संवैधानिक अभिव्यक्ति-अधिकार को सीमित करने की कोशिश करता है। दूसरी ओर, राहुल गांधी का मनुस्मृति पर बयान एक ऐसे ग्रंथ को लेकर है जिसकी व्याख्या और प्रासंगिकता पर स्वयं हिंदू विद्वानों में मतभेद रहे हैं। असली सवाल यह है कि क्या यह बहस संवैधानिक मूल्यों पर केंद्रित रहेगी, या धार्मिक पहचान की राजनीति में तब्दील होकर असली मुद्दों को दबा देगी।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर क्या आरोप लगाया?
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि राहुल गांधी फिरोज गांधी के वंशज होने के कारण संवैधानिक और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पारसी धर्म के हैं, इसलिए उन्हें हिंदू, इस्लाम या ईसाई धर्म के ग्रंथों पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।
यह विवाद किस बयान से शुरू हुआ?
राहुल गांधी ने महाराष्ट्र में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि महिलाएं मनुस्मृति के बंधन को तोड़कर बाहर आएं। इसी बयान पर भाजपा नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
योगी आदित्यनाथ ने राहुल गांधी के बारे में क्या कहा?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रायबरेली में कहा कि नेता प्रतिपक्ष होने के नाते राहुल गांधी की लोकतंत्र के प्रति जवाबदेही है, लेकिन वे भारत की परंपरा और विरासत को कोसना अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते हैं। उन्होंने राहुल को अथर्ववेद, शतपथ ब्राह्मण और मत्स्य पुराण पढ़ने की सलाह भी दी।
निशिकांत दुबे ने मनुस्मृति के बारे में ऐतिहासिक तर्क क्या दिया?
दुबे ने कहा कि 1775 में वारेन हेस्टिंग्स द्वारा गठित 11 विद्वानों की समिति की 1777 की रिपोर्ट में स्वयं लिखा गया था कि मनुस्मृति के कुछ श्लोक सही हैं, कुछ गलत हैं और कुछ काल्पनिक कालखंड के हैं। उन्होंने कांग्रेस से आग्रह किया कि वह यही दृष्टिकोण अन्य धर्म ग्रंथों पर भी अपनाए।
इस विवाद का राजनीतिक असर क्या हो सकता है?
यह विवाद संसद के मानसून सत्र के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच पहले से चले आ रहे तनाव को और बढ़ा सकता है। कांग्रेस की ओर से औपचारिक प्रतिक्रिया और संसद में हंगामे की आशंका है।
राष्ट्र प्रेस
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