मनुस्मृति विवाद: निशिकांत दुबे का राहुल गांधी पर हमला — 'पारसी धर्म के हैं, हिंदू ग्रंथों पर टिप्पणी का अधिकार नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद निशिकांत दुबे ने 24 अगस्त 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिए लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। यह विवाद राहुल गांधी के महाराष्ट्र में दिए उस बयान के बाद भड़का, जिसमें उन्होंने कहा था कि महिलाएं मनुस्मृति के बंधन को तोड़कर बाहर आएं।
निशिकांत दुबे का एक्स पोस्ट: क्या कहा
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा, राहुल गांधी फिरोज गांधी के पोते और वंशज हैं, और भारत के संविधान तथा धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वे पारसी धर्म के हैं। दुबे ने आरोप लगाया कि 'पारसी धर्म आपका कर्म है, इसलिए आपको सनातन धर्म यानी हिंदू धर्म, कुरान यानी इस्लाम तथा बाइबल यानी ईसाई धर्म और उनके धार्मिक ग्रंथों पर टिप्पणी करने का कोई हक और हूकूक नहीं है।'
दुबे ने अपनी पोस्ट में ऐतिहासिक संदर्भ भी दिया। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन के गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्स ने 27 मार्च 1775 को 11 पंडितों और विद्वानों की एक समिति गठित की थी, जिसका उद्देश्य भारत में उपलब्ध संस्कृत और पाली ग्रंथों का अनुवाद एवं अध्ययन करना था। दुबे के अनुसार इस समिति की रिपोर्ट 1777 में गवर्नर जनरल को सौंपी गई, जिसमें स्पष्ट लिखा गया था कि मनुस्मृति के कुछ श्लोक सही हैं, कुछ गलत हैं और कुछ काल्पनिक कालखंड के हैं। उन्होंने कांग्रेस से आग्रह किया कि वह यही दृष्टिकोण अन्य धर्म ग्रंथों पर भी लागू करे।
योगी आदित्यनाथ की प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रायबरेली में वीर सेनानायक राणा बेनी माधव बख्श सिंह की जयंती पर आयोजित भाव समर्पण कार्यक्रम में राहुल गांधी के मनुस्मृति संबंधी बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी के रूप में देश आपसे बहुत अपेक्षा नहीं करता, लेकिन भारत की संसद में नेता प्रतिपक्ष के रूप में आपको देश के लोकतंत्र के प्रति जवाबदेह बनाता है।'
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने संविधान की शपथ ली है, फिर भी वे भारत की परंपरा और विरासत को कोसना अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते हैं। योगी ने यह भी कहा कि राहुल गांधी उत्तर प्रदेश से बाहर जाते हैं तो प्रदेश को लांछित करते हैं और भारत से बाहर जाते हैं तो देश का अपमान करते हैं।
मनु और भारतीय परंपरा पर योगी का तर्क
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यदि राहुल गांधी को मनु के बारे में जानना है तो उन्हें अथर्ववेद, शतपथ ब्राह्मण और मत्स्य पुराण पढ़ना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी की लोकतंत्र के प्रति निष्ठा पर सवाल उठाते हुए 1975 के आपातकाल का उल्लेख किया। योगी ने यह भी कहा कि अयोध्या में प्रभु श्रीराम के अस्तित्व पर भी कांग्रेस की ओर से प्रश्न खड़े किए गए।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि जब भारत की सेना सीमाओं पर दुश्मनों से लड़ती है, तब राहुल गांधी सैनिकों से प्रमाण मांगते हैं और आतंकवाद के खिलाफ देश की लड़ाई में देशद्रोही तत्वों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रोत्साहित करते हैं।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब संसद के मानसून सत्र में विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है। गौरतलब है कि मनुस्मृति पर बहस भारतीय राजनीति में नई नहीं है — यह ग्रंथ दशकों से सामाजिक न्याय और हिंदू परंपरा को लेकर राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रहा है। राहुल गांधी की धार्मिक पहचान को लेकर दुबे की टिप्पणी ने इस बहस को एक नया और विवादास्पद मोड़ दे दिया है।
आने वाले दिनों में कांग्रेस की ओर से इस पर औपचारिक प्रतिक्रिया और संभावित संसदीय हंगामे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।