पप्पू यादव के साधु-भेष विरोध पर घनश्याम तिवारी का हमला: 'सनातन धर्म का अपमान, संसदीय गरिमा तार-तार'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद घनश्याम तिवारी ने शनिवार, 1 अगस्त 2026 को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि संसद परिसर के बाहर सांसद पप्पू यादव द्वारा साधु का भेष धारण कर किए गए प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन ने सनातन धर्म का अपमान किया है और संसदीय परंपराओं को आघात पहुँचाया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस कार्यक्रम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की मौजूदगी दुर्भाग्यपूर्ण रही।
मुख्य आरोप: साधु-वेश में अपमान
तिवारी ने कहा, 'पप्पू यादव ने जिस तरह एक साधु का भेष धारण करके यह प्रदर्शन किया, वह सनातन धर्म का सीधा तिरस्कार है और इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।' उन्होंने जोड़ा कि यह पूरा कार्यक्रम साधु-संतों के सम्मान के विरुद्ध था और संसदीय गरिमा को ठेस पहुँचाने वाला था।
गौरतलब है कि लोकसभा अध्यक्ष ने भी इस घटनाक्रम की निंदा की है, और तिवारी ने उस निंदा को अपना समर्थन दिया।
विपक्ष पर सवाल: संसद में चर्चा से पलायन
भाजपा सांसद ने विपक्षी दलों के रवैये पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि मानसून सत्र में जब भी सत्तापक्ष ने किसी अहम विषय पर चर्चा के लिए कदम बढ़ाया, विपक्षी दल सदन के भीतर भाग लेने की बजाय बाहर 'ड्रामा' करते नजर आए।
'जब सार्थक चर्चा की बात आती है तो उनके पास बोलने के लिए कुछ नहीं होता। उनका यह पूरा रवैया राजनीतिक दृष्टि से संदेह के घेरे में है,' तिवारी ने कहा। उनके अनुसार, विपक्ष का यह व्यवहार किसी 'फैशन शो' जैसा प्रतीत होता है, न कि जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी जैसा।
पंचायत और निकाय चुनाव पर BJP की तैयारी
तिवारी ने आगामी पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि इन चुनावों के लिए विभिन्न समितियों का गठन किया जा चुका है और पूरी रूपरेखा तय कर ली गई है।
'हम इस चुनाव को पूरे दमखम के साथ लड़ेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि रूपरेखा को जमीन पर उतारने में किसी प्रकार की कोताही न हो,' उन्होंने कहा। उन्होंने विश्वास जताया कि आगामी दिनों में इससे एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।
व्यापक संदर्भ
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब संसद का मानसून सत्र जारी है और सत्तापक्ष व विपक्ष के बीच तनातनी चरम पर है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के प्रतीकात्मक प्रदर्शन संसदीय मर्यादा की सीमाओं को लेकर बहस को नए सिरे से खड़ा करते हैं। यह पहली बार नहीं है जब संसद परिसर के बाहर विपक्षी प्रदर्शनों ने धार्मिक या सांस्कृतिक संवेदनशीलता को लेकर विवाद को जन्म दिया हो।
आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि पप्पू यादव और विपक्षी खेमा इस आरोप पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और लोकसभा अध्यक्ष इस मामले में कोई औपचारिक कार्रवाई करते हैं या नहीं।