राहुल गांधी की डिबेट चुनौती पर NDA का पलटवार: 'संसद में सबूत दें, वहाँ से क्यों भागते हैं'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सार्वजनिक बहस की चुनौती दिए जाने के बाद 4 नवंबर 2026 को राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ हो गई। एनडीए नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि राहुल गांधी विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) जैसे मुद्दों पर संसद के भीतर बहस से क्यों कतराते हैं। विपक्ष ने भी इस बहस में अपनी आवाज़ बुलंद की और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को केंद्र में रखा।
भाजपा का पलटवार
भाजपा नेता रोहन गुप्ता ने कहा कि राहुल गांधी को बहस करनी है तो उन्हें संसद में आना चाहिए, क्योंकि संसद लोकतंत्र का मंदिर है। उन्होंने कहा, 'एक तरफ संविधान की बात करते हैं, दूसरी तरफ संसद का अपमान करते हैं — जब संसद में राहुल गांधी की पोल खुल जाती है तो वे वहाँ से भाग क्यों जाते हैं।' गुप्ता ने स्पष्ट किया कि जो भी चर्चा होगी, वह संसद के भीतर ही होगी और विपक्ष के नेता को इसके लिए तैयार रहना चाहिए।
भाजपा नेता अतुल भातखलकर ने कहा कि संसद का अस्तित्व इसी उद्देश्य के लिए है कि वहाँ महत्वपूर्ण मुद्दों पर बहस हो। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद के बाहर राहुल गांधी के भाषण 'बचकाने' हैं और उनके पास उठाने के लिए कोई ठोस मुद्दा नहीं है। भातखलकर ने यह भी कहा कि सरकार संसद का विशेष सत्र बुलाने के लिए तैयार है जहाँ SIR सहित सभी मुद्दों पर खुलकर चर्चा हो सकती है।
विपक्षी दलों की राय
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद मनोज झा ने राहुल गांधी की चुनौती का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने सही कहा है कि जगह तय करें और बिंदुवार तरीके से सभी मुद्दों पर डिबेट करें, ताकि जनता को भी स्पष्टता मिले।
बीजू जनता दल (BJD) की सांसद सुलता देव ने देश में उठ रहे मुद्दों को रेखांकित किया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने की माँग की। देव के अनुसार, SIR के ज़रिए 13 करोड़ वोटरों के नाम मतदाता सूची से काटे गए, जो उनके शब्दों में 'धाँधली' है।
झारखंड से उठी माँगें
झारखंड सरकार के मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि देश डिबेट माँगता है और जनता जानना चाहती है कि प्रधानमंत्री मोदी के मन में क्या चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि 'लगातार वोट चोरी हो रही है' और देश को SIR की ज़रूरत नहीं थी। अंसारी ने सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की माँग दोहराई।
कांग्रेस नेता केशव महतो सहित झारखंड कांग्रेस के अन्य नेताओं ने ऐलान किया कि 'वोट बचाओ, देश बचाओ' अभियान नवंबर के अंत तक जारी रहेगा, जो बताता है कि SIR का मुद्दा फिलहाल राजनीतिक रूप से जीवित और सक्रिय है।
विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि SIR — यानी विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण — हाल के हफ्तों में एक प्रमुख राजनीतिक विवाद बन चुका है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर वैध मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। यह बहस ऐसे समय में आई है जब संसद सत्र के दौरान सदन में बार-बार गतिरोध की स्थिति बनती रही है।
आगे क्या होगा
यह विवाद निकट भविष्य में थमता नहीं दिख रहा। भाजपा संसद को ही बहस का उचित मंच बता रही है, जबकि विपक्ष सार्वजनिक मंच पर सीधी चुनौती को ज़्यादा पारदर्शी मानता है। 'वोट बचाओ, देश बचाओ' अभियान के नवंबर अंत तक चलने के ऐलान के साथ, यह मुद्दा आने वाले हफ्तों में और तीखा होने की संभावना है।