राहुल गांधी के पास न नैरेटिव है न विचारधारा, अवसरवाद की राजनीति: गौरव वल्लभ
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता और अर्थशास्त्री गौरव वल्लभ ने 15 मई 2025 को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि कांग्रेस नेता के पास न कोई स्पष्ट राजनीतिक नैरेटिव है और न ही कोई ठोस वैचारिक आधार। उनके अनुसार, कांग्रेस की पूरी रणनीति अवसरवाद पर टिकी है — जहाँ फायदा दिखे, वहाँ गठबंधन और जहाँ नुकसान हो, वहाँ नए सहयोगी।
गठबंधन की राजनीति पर तीखा कटाक्ष
वल्लभ ने कहा, नई दिल्ली में कांग्रेस और वामपंथी दल 'हम साथ-साथ हैं' की राजनीति करते हैं, लेकिन तिरुवनंतपुरम पहुँचते ही वही नेता वामपंथियों से पूछते हैं — 'हम आपके हैं कौन?' उन्होंने आगे कहा, 'दिल्ली में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के साथ खड़े दिखते हैं और कोलकाता में उन्हीं को भ्रष्ट बताते हैं।'
यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के घटक दल राज्यों में एक-दूसरे के विरुद्ध चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे गठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठ रहे हैं।
चुनावी प्रदर्शन पर सवाल
BJP नेता ने कांग्रेस के चुनावी रिकॉर्ड को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस असम में लगातार तीसरी बार चुनाव हार चुकी है और हर बार उसकी सीटें पहले से कम होती गई हैं। पश्चिम बंगाल में तो पार्टी का नामोनिशान तक नहीं बचा है।
गौरतलब है कि 2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस महज दो सीटों पर सिमट गई थी, जो उसके राज्य में लगातार कमज़ोर होते जनाधार का प्रमाण है।
तमिलनाडु और DMK पर आरोप
वल्लभ ने तमिलनाडु की राजनीति का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस वहाँ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के सहारे आगे बढ़ी और अब उन्हीं सहयोगियों को धोखा दे रही है। उन्होंने कहा, 'पाँच दिन पहले तक DMK नेता राहुल गांधी के बड़े भाई जैसे थे, लेकिन अब वे एम. के. स्टालिन को पहचानने से भी इनकार कर रहे हैं।'
केरल में कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी
कांग्रेस द्वारा वीडी सतीशन को केरल का मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनाए जाने के संदर्भ में वल्लभ ने कहा, 'गांधी परिवार के बाद कांग्रेस के असल नेता केसी वेणुगोपाल हैं। पार्टी के अंदर अब तीन-चार गुट हैं — एक सतीशन के नेतृत्व में, दूसरा चेन्निथला के, एक वेणुगोपाल के और एक केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मौजूदा अध्यक्ष के नेतृत्व में।'
उन्होंने चेताया कि इस गुटबाजी का खामियाज़ा केरल की जनता को भुगतना पड़ेगा, ठीक वैसे जैसे कर्नाटक में विकास ठप हो गया है। वल्लभ ने कहा, 'कर्नाटक के मुख्यमंत्री का सुबह से रात तक एकमात्र मकसद अपनी कुर्सी बचाना है, जबकि उपमुख्यमंत्री का ध्यान उसी कुर्सी पर काबिज होने पर है।'
आगे क्या
वल्लभ के इस बयान से BJP और कांग्रेस के बीच राजनीतिक तकरार और तेज होने के संकेत हैं। कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में केरल और कर्नाटक की राजनीतिक स्थिति पर दोनों दलों के बीच बयानबाजी जारी रहने की संभावना है।