लिवर रोग और टाइप-2 डायबिटीज पर मिशन मोड में कार्रवाई जरूरी: डॉ. जितेंद्र सिंह
सारांश
मुख्य बातें
विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 4 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि देश में लिवर रोग की बढ़ती महामारी और टाइप-2 डायबिटीज के तेज़ी से बढ़ते मामलों से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मिशन मोड में ठोस कदम उठाने की अत्यंत आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ये बीमारियाँ अब पहले की तुलना में कम उम्र के लोगों में भी देखी जा रही हैं, जो इस संकट की गंभीरता को और बढ़ाता है।
मुख्य घटनाक्रम
मंत्री इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (ILBS), नई दिल्ली में आयोजित 'लिवर एंड मेटाबोलिक डिज़ीज़ नेटवर्क' की तीसरी वर्षगांठ समारोह को संबोधित कर रहे थे। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के सहयोग से संचालित यह नेटवर्क लिवर और मेटाबोलिक रोगों के बढ़ते बोझ से निपटने हेतु संयुक्त शोध, नवाचार, शुरुआती पहचान और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को बल देता है।
मेटाबोलिक संकट की परस्पर जुड़ी चुनौतियाँ
विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के बयान के अनुसार, डॉ. सिंह ने कहा कि भारत में लिवर रोगों का बढ़ता प्रकोप और टाइप-2 डायबिटीज की तीव्र वृद्धि एक व्यापक मेटाबोलिक संकट के दो पहलू हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि फैटी लिवर, हाइपरटेंशन, डिस्लिपिडेमिया और इंसुलिन रेजिस्टेंस आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं और एक-दूसरे को बढ़ावा देते हैं।
मंत्री ने यह भी कहा कि भारतीयों में जेनेटिक कारणों, सेंट्रल ओबेसिटी (पेट के आसपास अधिक चर्बी) और विशिष्ट शारीरिक बनावट (फिनोटाइप) के चलते डायबिटीज, फैटी लिवर और हृदय रोगों का खतरा अधिक होता है — और यह जोखिम अक्सर उन लोगों में भी पाया जाता है जिनका बॉडी मास इंडेक्स (BMI) अपेक्षाकृत कम होता है।
इलाज से रोकथाम की ओर बदलाव की पुकार
डॉ. सिंह ने बीमारियों के बदलते स्वरूप का हवाला देते हुए कहा कि इलाज-केंद्रित स्वास्थ्य प्रणाली से आगे बढ़कर रोकथाम, शुरुआती पहचान और जीवनशैली में बदलाव को प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने कहा कि लिवर — शरीर का सबसे सशक्त और स्व-उपचारी अंग — अस्वस्थ खान-पान, नींद की गड़बड़ी, तनाव और पर्यावरणीय प्रदूषण के कारण लगातार दबाव में आ रहा है।
भारतीय शोध और समाधान की अनिवार्यता
मंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत की अनूठी शारीरिक और आनुवंशिक विशेषताओं को देखते हुए भारतीय डेटा, भारतीय शोध और भारत-केंद्रित समाधान विकसित करना अनिवार्य है। केवल विदेशी शोध पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा।
आगे की राह
डॉ. सिंह ने 'लिवर एंड मेटाबोलिक डिज़ीज़ नेटवर्क' को एक महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय मंच बताया जो वैज्ञानिक संस्थानों, चिकित्सकों और शोधकर्ताओं को एकजुट करता है। उन्होंने कहा कि लिवर और मेटाबोलिक विकारों के बोझ को कम करने के लिए निरंतर वैज्ञानिक सहयोग और व्यापक जन-भागीदारी दोनों अपरिहार्य हैं। यह पहल भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति में एक दीर्घकालिक बदलाव की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है।