5 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

लिवर रोग और टाइप-2 डायबिटीज पर मिशन मोड में कार्रवाई जरूरी: डॉ. जितेंद्र सिंह

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
लिवर रोग और टाइप-2 डायबिटीज पर मिशन मोड में कार्रवाई जरूरी: डॉ. जितेंद्र सिंह

सारांश

विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने ILBS में चेताया — लिवर रोग और टाइप-2 डायबिटीज मिलकर भारत के लिए एक गंभीर मेटाबोलिक संकट बन रहे हैं। इलाज नहीं, रोकथाम और भारतीय शोध ही इसका असली जवाब है।

मुख्य बातें

जितेंद्र सिंह ने 4 जुलाई 2026 को ILBS, नई दिल्ली में लिवर रोग और टाइप-2 डायबिटीज पर मिशन मोड में राष्ट्रीय कार्रवाई का आह्वान किया।
फैटी लिवर, हाइपरटेंशन, डिस्लिपिडेमिया और इंसुलिन रेजिस्टेंस को मंत्री ने एक परस्पर जुड़े मेटाबोलिक संकट का हिस्सा बताया।
भारतीयों में कम BMI पर भी डायबिटीज और फैटी लिवर का खतरा अधिक — जेनेटिक और फिनोटाइपिक कारण जिम्मेदार।
इलाज-केंद्रित व्यवस्था से हटकर रोकथाम, शुरुआती पहचान और जीवनशैली बदलाव को प्राथमिकता देने की अपील।
DST समर्थित 'लिवर एंड मेटाबोलिक डिज़ीज़ नेटवर्क' की तीसरी वर्षगांठ पर वैज्ञानिकों, चिकित्सकों और शोधकर्ताओं का संगम।
भारतीय डेटा और भारत-केंद्रित समाधानों की आवश्यकता पर विशेष बल।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 4 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि देश में लिवर रोग की बढ़ती महामारी और टाइप-2 डायबिटीज के तेज़ी से बढ़ते मामलों से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मिशन मोड में ठोस कदम उठाने की अत्यंत आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ये बीमारियाँ अब पहले की तुलना में कम उम्र के लोगों में भी देखी जा रही हैं, जो इस संकट की गंभीरता को और बढ़ाता है।

मुख्य घटनाक्रम

मंत्री इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (ILBS), नई दिल्ली में आयोजित 'लिवर एंड मेटाबोलिक डिज़ीज़ नेटवर्क' की तीसरी वर्षगांठ समारोह को संबोधित कर रहे थे। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के सहयोग से संचालित यह नेटवर्क लिवर और मेटाबोलिक रोगों के बढ़ते बोझ से निपटने हेतु संयुक्त शोध, नवाचार, शुरुआती पहचान और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को बल देता है।

मेटाबोलिक संकट की परस्पर जुड़ी चुनौतियाँ

विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के बयान के अनुसार, डॉ. सिंह ने कहा कि भारत में लिवर रोगों का बढ़ता प्रकोप और टाइप-2 डायबिटीज की तीव्र वृद्धि एक व्यापक मेटाबोलिक संकट के दो पहलू हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि फैटी लिवर, हाइपरटेंशन, डिस्लिपिडेमिया और इंसुलिन रेजिस्टेंस आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं और एक-दूसरे को बढ़ावा देते हैं।

मंत्री ने यह भी कहा कि भारतीयों में जेनेटिक कारणों, सेंट्रल ओबेसिटी (पेट के आसपास अधिक चर्बी) और विशिष्ट शारीरिक बनावट (फिनोटाइप) के चलते डायबिटीज, फैटी लिवर और हृदय रोगों का खतरा अधिक होता है — और यह जोखिम अक्सर उन लोगों में भी पाया जाता है जिनका बॉडी मास इंडेक्स (BMI) अपेक्षाकृत कम होता है।

इलाज से रोकथाम की ओर बदलाव की पुकार

डॉ. सिंह ने बीमारियों के बदलते स्वरूप का हवाला देते हुए कहा कि इलाज-केंद्रित स्वास्थ्य प्रणाली से आगे बढ़कर रोकथाम, शुरुआती पहचान और जीवनशैली में बदलाव को प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने कहा कि लिवर — शरीर का सबसे सशक्त और स्व-उपचारी अंग — अस्वस्थ खान-पान, नींद की गड़बड़ी, तनाव और पर्यावरणीय प्रदूषण के कारण लगातार दबाव में आ रहा है।

भारतीय शोध और समाधान की अनिवार्यता

मंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत की अनूठी शारीरिक और आनुवंशिक विशेषताओं को देखते हुए भारतीय डेटा, भारतीय शोध और भारत-केंद्रित समाधान विकसित करना अनिवार्य है। केवल विदेशी शोध पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा।

आगे की राह

डॉ. सिंह ने 'लिवर एंड मेटाबोलिक डिज़ीज़ नेटवर्क' को एक महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय मंच बताया जो वैज्ञानिक संस्थानों, चिकित्सकों और शोधकर्ताओं को एकजुट करता है। उन्होंने कहा कि लिवर और मेटाबोलिक विकारों के बोझ को कम करने के लिए निरंतर वैज्ञानिक सहयोग और व्यापक जन-भागीदारी दोनों अपरिहार्य हैं। यह पहल भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति में एक दीर्घकालिक बदलाव की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'मिशन मोड' की बात अकेले पर्याप्त नहीं — असली सवाल यह है कि DST-समर्थित नेटवर्क की तीन साल की शोध-यात्रा से कितनी साक्ष्य-आधारित नीतियाँ ज़मीन पर उतरी हैं। भारत में मेटाबोलिक रोगों की बढ़ती दर और सार्वजनिक स्वास्थ्य बजट की सीमाओं के बीच की खाई को पाटने के लिए केवल जागरूकता अभियान नाकाफी हैं। जब तक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर शुरुआती जाँच और जीवनशैली परामर्श को संस्थागत रूप नहीं दिया जाता, तब तक ये घोषणाएँ सम्मेलन-कक्षों तक सीमित रहने का जोखिम उठाती हैं।
RashtraPress
5 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉ. जितेंद्र सिंह ने लिवर रोग और टाइप-2 डायबिटीज पर क्या कहा?
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत में लिवर रोग और टाइप-2 डायबिटीज एक बड़े मेटाबोलिक संकट का हिस्सा हैं और इनसे निपटने के लिए मिशन मोड में राष्ट्रीय कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने रोकथाम, शुरुआती पहचान और जीवनशैली बदलाव को प्राथमिकता देने पर बल दिया।
लिवर एंड मेटाबोलिक डिज़ीज़ नेटवर्क क्या है?
यह विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के सहयोग से चलने वाला एक राष्ट्रीय शोध नेटवर्क है, जो ILBS के नेतृत्व में लिवर और मेटाबोलिक रोगों पर संयुक्त अनुसंधान, नवाचार और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को बढ़ावा देता है। इसकी तीसरी वर्षगांठ 4 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में मनाई गई।
भारतीयों में कम BMI पर भी डायबिटीज का खतरा क्यों अधिक होता है?
मंत्री के अनुसार, जेनेटिक कारणों, सेंट्रल ओबेसिटी (पेट के आसपास चर्बी) और भारतीयों की विशिष्ट शारीरिक बनावट (फिनोटाइप) के चलते कम BMI वाले लोगों में भी डायबिटीज, फैटी लिवर और हृदय रोगों का जोखिम अधिक रहता है। इसीलिए भारत-केंद्रित शोध और समाधान जरूरी हैं।
लिवर रोग के बढ़ने के मुख्य कारण क्या हैं?
डॉ. सिंह ने बताया कि अस्वस्थ खान-पान, गलत जीवनशैली, नींद की गड़बड़ी, मानसिक तनाव और पर्यावरणीय प्रदूषण लिवर पर लगातार दबाव डाल रहे हैं। फैटी लिवर, हाइपरटेंशन, डिस्लिपिडेमिया और इंसुलिन रेजिस्टेंस आपस में जुड़े हैं और एक-दूसरे को बढ़ाते हैं।
सरकार इस स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए क्या कदम उठा रही है?
DST के सहयोग से 'लिवर एंड मेटाबोलिक डिज़ीज़ नेटवर्क' के ज़रिए वैज्ञानिक संस्थानों, चिकित्सकों और शोधकर्ताओं को एकजुट किया जा रहा है। मंत्री ने बड़े पैमाने पर जन-जागरूकता, भारतीय डेटा पर आधारित शोध और रोकथाम-केंद्रित स्वास्थ्य नीतियों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 8 महीने पहले
  4. 9 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले