भारत में त्वचा कैंसर के मामलों में तेज़ी से वृद्धि, राज्यसभा में उठी चिंता

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भारत में त्वचा कैंसर के मामलों में तेज़ी से वृद्धि, राज्यसभा में उठी चिंता

सारांश

नई दिल्ली में राज्यसभा में त्वचा कैंसर के मामलों में वृद्धि पर चिंता व्यक्त की गई है। सांसद बाबूभाई जेसंगभाई देसाई ने सरकार का ध्यान इस महत्वपूर्ण विषय की ओर आकर्षित किया। जानिए इस गंभीर स्वास्थ्य संकट के बारे में और क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

Key Takeaways

  • त्वचा कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
  • सरकार ने कैंसर उपचार केंद्रों की संख्या बढ़ाई है।
  • समय पर उपचार से रोगी के जीवन को बचाया जा सकता है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में उपचार की सुविधाएं सीमित हैं।
  • जागरूकता अभियान की आवश्यकता है।

नई दिल्ली, 13 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत में त्वचा कैंसर के मामलों में तेज़ी से वृद्धि हो रही है। इस मुद्दे पर राज्यसभा में चिंता व्यक्त की गई है। गुजरात से बीजेपी के सांसद बाबूभाई जेसंगभाई देसाई ने शुक्रवार को इस विषय पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया।

उन्होंने कहा कि आज कैंसर केवल चिकित्सा चुनौती नहीं रह गया है, बल्कि यह एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है। बाबूभाई जेसंगभाई देसाई ने बताया कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम के अनुसार, वर्ष 2026 तक भारत में प्रतिवर्ष लगभग 15 लाख नए कैंसर मामलों की आशंका है। यह आंकड़ा हमारे स्वास्थ्य तंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती है।

उन्होंने बताया कि पहले यह माना जाता था कि भारतीयों की त्वचा में मेलेनिन की अधिक मात्रा के कारण त्वचा कैंसर का जोखिम कम होता है। किंतु अब जीवनशैली में बदलाव, बढ़ता वायु प्रदूषण, औद्योगिक रसायनों का संपर्क, अत्यधिक पराबैंगनी किरणें और जलवायु परिवर्तन जैसे कारणों से देश के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में त्वचा कैंसर के मामलों में वृद्धि हो रही है। इसके अलावा, जागरूकता की कमी के कारण कई रोगियों का उपचार समय पर नहीं हो पाता, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।

सरकार ने कैंसर उपचार और नियंत्रण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। वर्तमान में देश में लगभग 350 से अधिक समर्पित कैंसर उपचार केंद्र कार्यरत हैं, जिनमें 23 एम्स, कई क्षेत्रीय कैंसर केंद्र और अनेक सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल शामिल हैं। इसके अलावा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, और राष्ट्रीय कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग एवं स्ट्रोक नियंत्रण कार्यक्रम के तहत उपचार एवं वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है।

वर्ष 2022–24 के दौरान इस उद्देश्य के लिए लगभग 3000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि उपलब्ध कराई गई है। फिर भी, प्रतिवर्ष सामने आने वाले लगभग 15 लाख नए कैंसर मामलों की तुलना में उपचार सुविधाएं अभी भी पर्याप्त नहीं हैं।

सांसद ने कहा कि देश के कई जिलों में रेडियोथेरेपी मशीनें, आधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाएं, प्रशिक्षित ऑन्कोलॉजिस्ट और विशेषीकृत कैंसर अस्पतालों की कमी है। ग्रामीण और दूरदराज के मरीजों को उपचार के लिए बड़े शहरों की ओर जाना पड़ता है, जिससे उनकी लागत और कठिनाइयां दोनों बढ़ जाती हैं।

उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि कैंसर नियंत्रण के लिए एक व्यापक और दीर्घकालिक राष्ट्रीय रणनीति अपनाई जाए। जिला स्तर पर कैंसर स्क्रीनिंग और प्रारंभिक जांच केंद्र स्थापित किए जाएं। आधुनिक रेडियोथेरेपी और डायग्नोस्टिक उपकरणों की उपलब्धता बढ़ाई जाए। मेडिकल कॉलेजों में ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञों की संख्या बढ़ाई जाए और जन-जागरूकता अभियान को अधिक व्यापक बनाया जाए।

उन्होंने कहा कि यदि समय पर रोकथाम, प्रारंभिक पहचान और सुलभ उपचार की व्यवस्था को मजबूत किया जाए, तो हम लाखों लोगों के जीवन को बचा सकते हैं और इस बढ़ते स्वास्थ्य संकट पर प्रभावी नियंत्रण पा सकते हैं।

Point of View

यह स्पष्ट है कि त्वचा कैंसर के मामलों में वृद्धि पर चिंता जताना आवश्यक है। सरकार को इस गंभीर स्वास्थ्य संकट को गंभीरता से लेना चाहिए और उचित कदम उठाने की आवश्यकता है।
NationPress
13/03/2026

Frequently Asked Questions

भारत में त्वचा कैंसर के मामले क्यों बढ़ रहे हैं?
बदलती जीवनशैली, बढ़ता वायु प्रदूषण, और पराबैंगनी किरणों के संपर्क के कारण त्वचा कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं।
सरकार किन उपायों पर विचार कर रही है?
सरकार कैंसर उपचार केंद्रों की संख्या बढ़ाने, जागरूकता अभियान चलाने और वित्तीय सहायता प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
कैंसर का समय पर उपचार क्यों महत्वपूर्ण है?
समय पर उपचार से रोगी के जीवन को बचाया जा सकता है और स्थिति को गंभीर होने से रोका जा सकता है।
क्या ग्रामीण क्षेत्रों में उपचार की सुविधाएं उपलब्ध हैं?
अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों में उपचार सुविधाओं की कमी है, जिससे मरीजों को बड़े शहरों की ओर जाना पड़ता है।
कैंसर के मामलों की पहचान कैसे की जा सकती है?
कैंसर की पहचान के लिए प्रारंभिक जांच और स्क्रीनिंग कार्यक्रमों की आवश्यकता है।
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