6 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

नमो स्वच्छता अभियान: सोला सिविल अस्पताल से 79 किलो कचरा हटाया, 508 फायर एक्सटिंग्विशर सर्विस्ड

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
नमो स्वच्छता अभियान: सोला सिविल अस्पताल से 79 किलो कचरा हटाया, 508 फायर एक्सटिंग्विशर सर्विस्ड

सारांश

अहमदाबाद के सोला सिविल अस्पताल में नमो स्वच्छता अभियान के तहत 79 किलो कचरा हटाया गया, 159 बेकार उपकरण स्क्रैप किए गए और 508 फायर एक्सटिंग्विशर सर्विस्ड हुए। गुजरात सरकार का यह अभियान नोसोकोमियल इन्फेक्शन घटाने और सरकारी अस्पतालों की छवि बदलने की दिशा में ठोस कदम है।

मुख्य बातें

सोला सिविल अस्पताल, अहमदाबाद में नमो स्वच्छता अभियान के तहत 79 किलो ठोस कचरा हटाया गया।
159 बेकार मेडिकल उपकरणों और 1,365 खराब वस्तुओं को स्क्रैप करने की प्रक्रिया शुरू।
508 फायर एक्सटिंग्विशर रिफिल या स्थापित किए गए; 56 नलों की मरम्मत या बदलाव।
103 फर्नीचर, मेडिकल और आईटी उपकरण मरम्मत के बाद उपयोग-योग्य बनाए गए।
लगभग 300 पुरानी बेडशीट, तकिए के कवर और गद्दे चरणबद्ध रूप से बदले जा रहे हैं।
समस्त मेडिकल-पैरामेडिकल स्टाफ को कलर-कोडेड बायोमेडिकल कचरा निपटान पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया।

अहमदाबाद के सोला सिविल अस्पताल ने गुजरात राज्य सरकार के 'नमो स्वच्छता अभियान' के तहत 79 किलो ठोस कचरा हटाकर और 508 फायर एक्सटिंग्विशर की सर्विसिंग पूरी कर अस्पताल परिसर को व्यापक रूप से सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। 5 जुलाई को सामने आए इस अभियान का मुख्य उद्देश्य अस्पताल में होने वाले संक्रमण — जिसे चिकित्सा भाषा में नोसोकोमियल इन्फेक्शन कहते हैं — को नियंत्रित करना और मरीजों के लिए स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना है।

मुख्य घटनाक्रम

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, विभिन्न विभागों से 79 किलो ठोस कचरा हटाया गया है। इसके साथ ही 159 बेकार मेडिकल उपकरणों और 1,365 खराब हो चुकी वस्तुओं को निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत स्क्रैप करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अभियान में इनडोर-आउटडोर क्षेत्र, अस्पताल परिसर और शौचालय — सभी को शामिल किया गया है।

बुनियादी ढाँचे के रखरखाव के तहत जाँचे गए 319 नलों में से 56 की मरम्मत या बदलाव किया गया। विद्युत प्रणाली में 63 बल्ब और 22 सीलिंग फैन ठीक किए गए। अस्पताल के 575 फर्नीचर, मेडिकल और आईटी उपकरणों में से 103 को मरम्मत के बाद उपयोग के योग्य बनाया गया।

रेसिडेंट मेडिकल ऑफिसर की प्रतिक्रिया

रेसिडेंट मेडिकल ऑफिसर डॉ. हेमांगिनी पटेल ने बताया कि अस्पताल में संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए सफाई, कीटाणुशोधन और अनावश्यक सामान हटाने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। उन्होंने कहा, 'मरीजों के लिए सुरक्षित और साफ माहौल बनाने के लिए पूरे अस्पताल में लगातार निगरानी रखी जा रही है।'

डॉ. पटेल ने यह भी बताया कि लगभग 300 पुरानी बेडशीट, तकिए के कवर और गद्दों को चरणबद्ध तरीके से बदलने का काम शुरू हो गया है। उन्होंने स्पष्ट किया, 'सफाई कोई एक दिन का अभियान नहीं है, बल्कि सालभर चलने वाली प्रक्रिया है।'

स्टाफ प्रशिक्षण और बायोमेडिकल कचरा प्रबंधन

अभियान के अंतर्गत सभी मेडिकल और पैरामेडिकल स्टाफ को कलर-कोडेड पृथक्करण प्रणाली का उपयोग करते हुए बायोमेडिकल कचरे के वैज्ञानिक निपटान पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। फर्श, दीवारों, खिड़कियों, ग्लास पैनल और सीलिंग फैन की नियमित सफाई के साथ-साथ टॉयलेट, बाथरूम और टूटी हुई टाइलों की मरम्मत जैसे सिविल कार्य भी किए जा रहे हैं।

कोविड-19 महामारी के समय से अस्पताल में कार्यरत सफाई कर्मचारी रमीला मकवाना ने बताया कि मरीजों के बिस्तर, लॉकर, वेंटिलेटर और मॉनिटर जैसे संवेदनशील उपकरणों को प्रतिदिन अच्छी तरह साफ और कीटाणु-मुक्त किया जाता है। उन्होंने कहा, 'जरूरत पड़ने पर मरीजों की चादर भी दिन में दो बार बदली जाती हैं।'

मरीजों के परिजनों की राय

सानंद के प्रकाश कुमार मेनिया ने बताया कि डॉक्टरों, सफाई कर्मचारियों और अन्य स्टाफ ने तत्काल और सहयोगपूर्ण सेवा दी। उन्होंने आने वाले लोगों से अस्पताल परिसर की स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करने की अपील भी की।

बोडकदेव की अमी पटेल ने कहा कि सोला सिविल अस्पताल आने के बाद सरकारी अस्पतालों के बारे में उनकी धारणा पूरी तरह बदल गई है। उनके अनुसार, 'लगातार सफाई, साफ पीने का पानी और व्यवस्थित माहौल के कारण यह अस्पताल किसी कॉर्पोरेट अस्पताल से कम नहीं लगता।'

आगे की राह

अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह पहल स्वच्छता स्तर को ऊँचा बनाए रखने, संक्रमण नियंत्रण उपायों को सुदृढ़ करने और स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढाँचे के दीर्घकालिक रखरखाव की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। गुजरात सरकार द्वारा पूरे राज्य में चलाए जा रहे इस अभियान का विस्तार अन्य सरकारी अस्पतालों तक भी किया जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि ये सुधार एकमुश्त प्रदर्शन हैं या दीर्घकालिक प्रणालीगत बदलाव। भारत के सरकारी अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण की विफलता अक्सर संसाधनों की कमी से नहीं, बल्कि निगरानी तंत्र की अनुपस्थिति से होती है। 508 फायर एक्सटिंग्विशर की सर्विसिंग और 79 किलो कचरा हटाना तभी अर्थपूर्ण होगा जब इसके साथ नोसोकोमियल इन्फेक्शन दर की नियमित सार्वजनिक रिपोर्टिंग भी हो। अभियान की सफलता का मापदंड सफाई की तस्वीरें नहीं, बल्कि अस्पताल-जनित संक्रमण में मापनीय गिरावट होनी चाहिए।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नमो स्वच्छता अभियान क्या है?
नमो स्वच्छता अभियान गुजरात राज्य सरकार द्वारा सरकारी अस्पतालों में स्वच्छता, संक्रमण नियंत्रण और बुनियादी ढाँचे के रखरखाव के लिए चलाया जा रहा राज्यव्यापी अभियान है। इसका मुख्य लक्ष्य नोसोकोमियल इन्फेक्शन को कम करना और मरीजों के लिए सुरक्षित वातावरण बनाना है।
सोला सिविल अस्पताल में इस अभियान के तहत क्या-क्या काम हुआ?
अस्पताल से 79 किलो ठोस कचरा हटाया गया, 159 बेकार मेडिकल उपकरण और 1,365 खराब वस्तुएँ स्क्रैप की गईं, 508 फायर एक्सटिंग्विशर सर्विस्ड हुए और 56 नलों की मरम्मत की गई। इसके अलावा 103 उपकरण दुरुस्त किए गए और लगभग 300 पुरानी बेडशीट व गद्दे बदले जा रहे हैं।
नोसोकोमियल इन्फेक्शन क्या होता है और यह अभियान इसे कैसे रोकता है?
नोसोकोमियल इन्फेक्शन वह संक्रमण है जो मरीज को अस्पताल में भर्ती होने के दौरान लग जाता है। सोला सिविल अस्पताल में गहन सफाई, कीटाणुशोधन, बायोमेडिकल कचरे का वैज्ञानिक निपटान और स्टाफ प्रशिक्षण के ज़रिए इस खतरे को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
क्या यह अभियान केवल सोला सिविल अस्पताल तक सीमित है?
नहीं, यह अभियान पूरे गुजरात के सरकारी अस्पतालों में चलाया जा रहा है। सोला सिविल अस्पताल इस राज्यव्यापी पहल का एक हिस्सा है, जिसमें सभी प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को शामिल किया गया है।
मरीजों और उनके परिजनों पर इस अभियान का क्या असर पड़ा है?
मरीजों के परिजनों ने अस्पताल की बेहतर स्वच्छता और व्यवस्थित माहौल की सराहना की है। बोडकदेव की अमी पटेल जैसे लोगों ने कहा कि सोला सिविल अस्पताल अब किसी कॉर्पोरेट अस्पताल जैसा अनुभव देता है, जिससे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति आम जनता का भरोसा बढ़ा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले